रविवार, 17 अप्रैल 2016

चाणक्य नीति (Chanakya Neeti) 1

आचार्य चाणक्य अपने समय के एक कुशल राजनीतिज्ञ थे। वैसे तो कहा जाता है कि चन्द्रगुप्त मौर्य ने मौर्य राज्य की स्थापना की परन्तु अगर आचार्य चाणक्य न होते तो इनके ज्ञान के बिना चन्द्रगुप्त मौर्य सफल नहीं हो सकते थे। आचार्य चाणक्य ने ही चन्द्रगुप्त को इतना प्रशिक्षित किया की वह अपना एक अलग से राज्य बना सके। आचार्य चाणक्य के विचार आज के समय में भी उतने ही उपयोगी है जितने की उस समय में थे। इनके विचारों को चाणक्य नीति के नाम से जाना जाता है। तो आइए इनके कुछ विचारों के बारे में पढ़ते है जिसे अपने जीवन में उतारकर हम भी एक सफल इंसान बन सके।








जिस देश में न सम्मान हो , न खाने-पीने के लिए हो , न कोई भाई-बन्धु हो और न ही विद्या का आगमन हो , वहाँ  मनुष्य को निवास नहीं करना चाहिए।








सेवा कार्य उपस्थित होने पर सेवकों की , आपत्तिकाल में मित्र की , दुःख में भाई-बन्धुओ की और धन के नष्ट होने पर स्त्रीकी परीक्षा की जाती है।







जो मनुष्य निश्चित वस्तु को छोड़ कर अनिश्चित वस्तु की और दौड़ता है तो उसकी निश्चित वस्तु भी नष्ट हो जाती है और अनिश्चित तो मानो पहले से ही नष्ट थी।







जिसका पुत्र अपने वश में हो ,स्त्री आज्ञाकारिणी हो और जो प्राप्त धन से संतुष्ट हो ,उसके लिए यह धरती ही स्वर्ग है।








वे ही पुत्र, पुत्र हैं जो पिता के भक्त हैं ,वही पिता पिता हैं जो अपनी संतान का यथा-योग्य पालन करता है। वही मित्र ,मित्र है जिसको आप पर विश्वास हैं और वही स्त्री ,स्त्री है जहां आपका हृदय आनन्दित होता है।







पहला कष्ट मुर्ख होना है ,दूसरा कष्ट है जवानी और इन सब कष्टों से भी बढ़कर कष्ट है ,पराये घर में रहना।







जो माता अपने बेटे को पढ़ाती नहीं ,वह शत्रु है। उसी प्रकार पुत्र को न पढ़ाने वाला पिता ,पुत्र का वैरी है।  क्यूंकि ऐसा करने से उनका पुत्र सभा में उसी तरह शोभित नहीं होता ,जिस प्रकार हंसो के बीच में बगुला।







स्त्री का वियोग ,अपनों द्वारा अपमान , युद्ध में बचा हुआ शत्रु ,दुष्ट राजा की सेवा और स्वार्थियों की सभा ,यह बातें बिना अग्नि के ही शरीर को जला डालती है।







दुराचारी ,व्यभिचारी ,दूषित स्थान के निवासी ,इन तीन प्रकार के मनुष्यों से जो मित्रता करता है , उसका जल्द ही विनाश हो जाता है।







नदी के तट पर लगे पेड़ ,पराये घर रहने वाली स्त्री ,बिना मंत्री का राजा ,यह शीघ्र ही नष्ट हो जाते हैं।



दोस्तों achhe विचार तो बांटने के लिए ही होते है और चाणक्य जी के विचार तो हमेशा ही सभी लोगो को प्रेरणा ही देते रहे है ,मैं जानता हूँ आप मेरे blog से इन विचारों को copy नहीं कर सकते लेकिन निराश मत  होइए आप इन्हे आसानी से download कर सकते है और उसके बाद Whatsapp ,Facebook ,Hike ,Google Plus आदि कही पर भी share कर सकते है। 
वैसे share कर सकते है यह कहना इतना सही नहीं बल्कि मैं तो कहूंगा कि आप अवश्य share करें क्यूंकि ज्ञान बांटने से ही बढ़ता है।



यह भी पढ़े : चाणक्य नीति (Chanakya Neeti) 2
Share:

1 टिप्पणी: