रविवार, 12 जून 2016

अक्ल बढ़ी या किस्मत (Akal Badi Ya Kismat) Part - 3



दोस्तों यह कहानी भी पिछली कहानी का ही आगे का part है जोकि last पार्ट है। अगर आपने इससे पहले की दोनों कहानियाँ पढ़ ली है फिर तो achhi बात है पर अगर नहीं पढ़ी तो पहले पढ़ ले।

अक्ल बढ़ी या किस्मत (Akal Badi Ya Kismat) Part - 1/3 


अक्ल बढ़ी या किस्मत (Akal Badi Ya Kismat) Part -2/3 








बेचारे Kisaan को फांसी की सजा मिल चुकी थी, जिसके पास kismat तो थी पर Gyan नहीं था। अब किस्मत हार मान चुकी थी और उसने अक्ल से कह दिया कि मैं हार गई ,सच में मैं कुछ भी नहीं कर पाई ,इतना कुछ करने के बावजूद भी। बल्कि मैंने किसान को अब मौत की सजा भी दिलवा दी। अब किस्मत को बहुत पछतावा हो रहा था कि उसने यह क्या कर दिया ?



अक्ल ने  किस्मत से कहा अगर अब तुमने हार मान ही ली है तो क्या अब मैं दिखाऊ कि ज्ञान के बल पर क्या-क्या किया जा सकता हैं।



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किस्मत बोली ,"अब तो किसान को faansi ki saja मिल ही चुकी है ,अब तुम क्या कर सकते हो ?" किस्मत आगे कहने लगी ,"चलो ,आज देख ही लेते है कि अक्ल कैसे इंसान को बचाती है ? अगर तुम कुछ कर सकते हो तो करो।"



अक्ल बोली ,"बस अब तुम देखती जाओ ,इसको कल सजा मिलनी है न ,बस अब तुम कल देखना।"



अगली सुबह हुयी और किसान को फांसी मिलनी थी तो उसे फांसी के लिए लाया गया।


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राजा ने last बार पूछा कि तुमने नदी में छलांग  क्यों लगाई थी।



अब किसान के पास अक्ल आ गई थी। तो अब किसान ने जवाब दिया ,"महाराज ,क्षमा करे ,किन्तु तब नदी में बिल्ली का बच्चा डूबता हुआ दिखाई दिया था और उसी को बचने के लिए मैंने नदी में छलांग लगाई। अगर किसी की जान बचाना गुनाह है, तो आप मुझे फांसी पर लटकवा दीजिये , मुझे मंजूर है।



राजा अब सोच-विचार में डूब गया। उसे अपना निर्णय गलत लगने लगा। राजा अब सोचने लगा कि जो व्यक्ति एक बिल्ली की जान बचाने के लिए नदी में कूद सकता है तो अगर मेरी बेटी पर किसी भी प्रकार की कोई भी मुसीबत आएगी ,तब पता नहीं यह क्या-क्या कर सकता है?



राजा को अब बहुत पछतावा हो रहा था और उन्होंने उस किसान से माफ़ी मांगी और कहने लगे ,"मुझे माफ़ कर दो बेटा ,मुझसे बहुत बड़ा अपराध होने जा रहा था। मैंने बिना कुछ सोचे-समझे ही तुम्हे सजा सुना दी जबकि तुम तो बहुत नेक दिल के हो।"



राजा ने सभी लोगो के सामने उस किसान से sorry मांग ली और राजकुमारी को उसके साथ उसके घर भेज दिया। अब किसान के पास अक्ल तो आ ही चुकी थी तो अब उसे मालूम था कि उसके खेत में जो है वह पत्थर नहीं बल्कि बेशकीमती मोती है। उसे अब श्रृंगार makeup के बारे में भी मालुम था :)। अब किसान और राजकुमारी एक दूसरे के साथ खुश थे और अपनी जिन्दगी बहुत ही अच्छे से जीने लगे।



अब  किस्मत भी समझ चुकी थी कि बिना अक्ल के वह कुछ भी नहीं कर सकती। उस दिन से किस्मत ने अक्ल से वादा कर लिया कि किसी के पास भी मैं अकेली कभी नहीं जाऊँगी। किस्मत ने कहा ,"अगर तुम (अक्ल) भी मेरे साथ किसी Insan के पास जाओगे ,मैं तभी उसके पास जाऊँगी ,अकेली कभी भी नहीं। 



तो दोस्तों उस दिन से किस्मत उसी के पास जाने लगी जिसके पास अक्ल थी। आप कभी भी यह मत सोचिये कि मेरे पास तो किस्मत है ही ,मुझे पढ़ने-लिखने की क्या जरूरत ? अगर आप पढ़े-लिखे होंगे और आपके पास ज्ञान होगा तभी किस्मत आपका साथ दे सकती है ,अगर अक्ल ही नहीं ,तो अक्ल बिना किस्मत क्या कर जाती है यह तो आपने जान ही लिया। तो एक बात जीवन में हमेशा गाँठ बांध लीजिए कि किस्मत उसी की होती है जिसके पास अक्ल होती है ,अक्ल नहीं तो किस्मत तो क्या ,आप भी नहीं। 


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यह कहानी मेरे प्रिय मित्र Amit Dua ने मुझे बताई थी ,जिसे थोड़ा रोचक बनाने के लिए मैंने अपने accordingly इसमें थोड़े-बहुत changes किये। 


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8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही बेहतरीन कहानी। अच्‍छा लिखते हैं आप। कमेंट बॉक्‍स में आपने जो मेल आई डी फिल की है। उस पर मैं आज रात एक मेल करने वाला हूं। कृप्‍या चेक कर लीजिएगा।

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    1. मुझे ख़ुशी हुयी आपको पसंद आई । होंसला बढ़ाने के लिए आपका धन्यवाद । मदद करते रहने के लिए भी आपका शुक्रिया ।

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  2. bahut hi umda kahani h... isse ek acchi sikh milegi sabko..

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    1. आपका बहुत बहुत शुक्रिया अभिषेक जी होंसला बढ़ाने के लिए ,मुझे ख़ुशी हुयी आपको पसंद आई ।

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  3. Sahi kaha aapne Nikhil ji Jiske pas Knowledge hoti hai wahi aadmi ko luch bhi chance deta hai.. aise hi kahani likhte rahe.

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    1. होंसला बढ़ाते रहने के लिए धन्यवाद सुरेन्द्र जी

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  4. Bahut acchi lagi kahani....mujhe bahut pasand aayi....bahut accha moral raha....ese hi aap aur bhi kahaniyan likhte rahiye....dhanyavad!

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    1. होंसला बढ़ाते रहने के लिए धन्यवाद अमूल जी

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