शुक्रवार, 11 नवंबर 2016

मृत्यु सत्य है (Death Is True)

महात्मा बुद्ध ग्राम-ग्राम विचरते हुए लोगों को धर्म-कर्म की शिक्षा दे रहे थे।  बुद्ध पेड़ के नीचे बैठे हुए थे तथा उनके साथ उनके शिष्य भी थे। तभी एक औरत रोती-रोती बुद्ध के पास आयी और बुद्ध जी से कहने लगी ,"महाराज ,अनर्थ हो गया ,मेरा कुछ भी न रहा ,मेरा एक ही बेटा , वह भी अब न रहा। आप उसे दुबारा जीवित कर दीजिये। आप तो सब कुछ कर सकते है ,मेरे बेटे को भी जीवित कर दीजिये। "



बुद्ध जी ने उस औरत को समझाने का प्रयास किया कि मृत व्यक्ति जीवित नहीं हो सकता लेकिन वह मानी न। फिर बुद्ध ने उसे शिक्षा देने का निश्चय किया और कहा ,"ठीक है ,मैं तुम्हारे बेटे को जीवित कर दूंगा ,लेकिन तुम्हे एक काम करना होगा कि मुझे किसी ऐसे घर से भिक्षा लाकर दो ,जहाँ कोई भी कभी मरा न हो। 




वह औरत मान गयी और उसने सोचा कि ऐसा कोई-न-कोई घर तो मैं ढूंढ ही लूंगी। वह पुरे गाँव में ढूंढने लगी जहा कोई भी न मरा हो लेकिन उसे ऐसा कोई भी घर न मिला।



अंत में निराश होकर वह बुद्ध के पास वापिस आयी और कहा कि उसे ऐसा कोई भी घर नहीं मिला। तब बुद्ध(Buddha) ने उसे समझाते हुए कहा कि ,"देह त्याग ही शाश्वत सत्य है। जो इंसान भी इस दुनिया में आया है ,उसे एक-न-एक दिन अपनी देह को त्यागकर मृत्यु को प्राप्त होना ही है। एक दिन सब अपने नश्वर शरीर का त्याग करेंगे। कोई पहले चले जाता है और कोई थोड़ा रूककर ,लेकिन एक दिन सब ने ही अपने शरीर और संसार को छोड़कर परलोक में जाना ही है। इसलिए अपने मन को समझायो। तुमने अपना बेटा खोया है ,लेकिन यह भी सत्य है जो आया है वह एक दिन जरूर जाएगा। पुत्र मोह को त्यागो को सच को समझो।


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तब बुद्ध जी से उस औरत को सांत्वना मिला और वह सच की खोज में बुद्ध के पास दीक्षित हो गयी।



दोस्तों , यह कहानी भले ही कुछ लोगों हक़ीक़त में न सोचकर देखी हो ,लेकिन एक बार जरा इसे सच में सोचकर देखिये कि एक माँ ,जिसने अपने इकलौते बेटे को खो दिया हो उस पर क्या बीतेगी? लेकिन यह भी सच है कि जो आया है ,उसे एक-न-एक दिन जाना तो जरूर ही है। इसलिए बुद्ध ने भी उस औरत को समझाया कि वह मोह को त्याग दे और हक़ीक़त को स्वीकार करे।



यह दुनिया ही जन्म-मरण की दुनिया है। जो भी पैदा हुआ है ,चाहे वो इंसान हो या जानवर ,पशु हो या पक्षी हूँ , जलचर हो या थलचर ,जिसने भी जन्म लिया है ,उसने इस दुनिया को त्यागना ही है।बस अपने मोह पर थोड़ा control रखे और सच को स्वीकार करे।



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2 टिप्‍पणियां:

  1. Bahut acchi aur sacchi post hai....lekin ek din iska bhi solution ho hi jayega.....kabhi kisi ne socha bhi nahi hoga ki india se america seconds me baat ho jayegi...wo bhi bina taar ke....lekin aaj ho jati hai....aur aaj ham sochte hain ki sabhi ko ek din jarur marna hai lekin ek din esa jarur aayega jab kisi ki mratyu nahi hogi....sach me esa ho sakta hai......

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    1. jrur Amul ji, aisa kuch aa skta hai, lekin mrityu kabhi na ho aisa nahi hoga kyki fir duniya ka santulan bigar jayega . Lekin aisa jrur ho skta hai ki mnushya hzaaro saalo tk jeevit reh ske. Agar hum Kailash Parvat par reh rhe saadhuyon ke baare me jaankaari ikathi kare to vaha par kyi aise saadhu hai jinki umar bahut hi jyada adhik hai, tapasya ke dwara veh aisa kar paate hai . Lekin Vigyaan ke dwara bhi umar badhaane ka trika doondh hi liya jaayega aur iska sahi sahi hal Ayurveda aur Himalaya Ke pahadho se hi mil skta hai ,jisse mnushya ki umar hzaaro saal ho skti hai . Apne vichaar hmaare sath bantne ke liye dhanyawaad.

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