सोमवार, 1 मई 2017

समझदार व्यक्ति भी मूर्ख हो सकता है (Samjhdaar Ya Fir Murkh)

दोस्तों हमेशा याद रखे ,जरूरी नही कि नासमझ व्यक्ति ही मूर्ख हो, कई बार समझदार व्यक्ति भी मूर्खो से भी बदतर काम कर जाते है।



पहले यह कहानी पढ़िए-






पुराने समय की बात है एक मजदूर अपने गधे के साथ काम करके अपने गांव वापिस लौट रहा था। रास्ते में उसको एक चमकीला पत्थर दिखाई दिया ,उसे वह पत्थर पसन्द आ गया और उसने अपने गधे के साथ उस पत्थर को बांध दिया और वापिस अपने गांव को चलने लगा।



रास्ते मे उसे एक जोहरी दिखा, उसने गधे पर उस पत्थर को देखा तो वह समझ गया कि मजदूर नासमझ है, उसे इस पत्थर की कीमत का नही पता और वह जोहरी उस मजदूर के पास गया और उस पत्थर को उससे मांगा। मजदूर बोला कि वह उसे यह पत्थर 1000 रुपये में देगा।

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जोहरी ने कहा, "नही, मैं अधिकतम इसके 500 रुपये ही तुम्हे दूंगा और अगर तुम 500 रुपये में यह पत्थर मुझे देना चाहते हो तो दे दो, नहीं तो तुम्हारी मर्जी ।" लेकिन मजदूर ने पांच सो रूपये में वह पत्थर देने से इनकार कर दिया।



जोहरी भी यह सोचकर आगे चल पड़ा कि वह तो अनपढ़ मजदूर है,उसे इस पत्थर की कीमत क्या मालूम होगी? और वह अपने आप उसके पास आएगा और 500  रुपये में ही वह पत्थर दे देगा।



आगे चलते-चलते मजदूर को एक और जोहरी मिला। वह भी उसके पास पत्थर देखकर हैरान हुआ। दूसरा जोहरी भी मजदूर के पास आया और बोला कि ," क्या तुम मुझे अपना यह पत्थर बेचना चाहोगे?"

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मजदूर बोला, "ठीक है, लेकिन इसके बदले में मैं तुमसे 2000 रुपये लूंगा। दूसरे जोहरी ने तुरंत दो हज़ार रुपये अपनी जेब से निकाले और उससे वह पत्थर ले लिया।



पहले वाला जोहरी भी सोच रहा था कि कही इतना कीमती पत्थर हाथ से न चला जाये ,वह उसी रास्ते को ही चल पड़ा जिधर मजदूर गया था और उससे वह पत्थर मांगा।



मजदूर बोला, "वह पत्थर तो अब मैंने 2000 रुपये में बेच दिया।"

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जोहरी बोला,"तुम भी बिल्कुल पागल, नामसझ हो, उस पत्थर की कीमत लाखों रुपये की थी, जो तुमने सिर्फ 2000 रुपये में बेच दिया।" और भी उसे बहुत बुरा बोलै।



मजदूर हंसते हुए बोला, "हुजूर मैं तो हूं ही अनपढ़। अगर आपको इसकी असल कीमत मालूम थी ,फिर भी आपने वह पत्थर मुझसे क्यों नही लिया, जबकि आपको तो मैं सिर्फ 1000 रुपये में दे रहा था? आपने सिर्फ 500 रुपये के लालच में लाखों का नुकसान कर लिया। मैं तो अनपढ़ हूँ ,लेकिन आप तो पढ़े-लिखे होकर भी मूर्ख निकले, जो अपने इतना नुकसान कर लिया।"



दोस्तों, अब खुद ही बताइए बेवकूफ कौन? मजदूर को तो उस पत्थर की कीमत ही नही मालूम थी, इसलिए उसने सस्ते में बेच दिया। लेकिन पहला जोहरी, जिसे उस पत्थर की असल कीमत भी मालूम थी और उसे वह बहुत ही सस्ते में मिल भी रहा था ,लेकिन फिर भी उसने न खरीदा सिर्फ 500 रुपये के लालच में।






दोस्तों अगर जिंदगी में कभी ऐसा मौका आये कि कोई बहुत ही कीमती चीज आसानी से या बहुत कम कीमत पर मिल रही है और उस वस्तु का हम उपयोग भी कर सकते है तो कभी भी यह लालच नही करना चाहिए कि शायद थोड़ी और ही सस्ती मिल जाये, उसका सौदा उसी समय कर लेना चाहिए। वर्ना हमे भी मूर्ख बनने में समय नही लगेगा।

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4 टिप्‍पणियां:

  1. ऊपर उठने के लिए किस्मत हमें कई मोके देती है लेकिन हम और भी अच्छा मौका पाने की उम्मीद में हाथ आये मोके को भी खो देते है आपकी कहानी बहुत कुछ कहती है THANKS FOR SHARING

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  2. भाग्यशाली वे नही होते जिन्हें सबकुछ अच्छा मिलता है, बल्कि वे होते हैं जिन्हें जो मिलता है,उसे वो अच्छा बना लेते है । आपकी कहानी इस बात को पूर्णतया सत्य करती है । धन्यवाद Nikhil जी इतनी अच्छी कहानी शेयर करने के लिए।

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  3. आपकी यह कहानी काफी प्रेरणादायक और सरानीह है

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  4. Bhut hi acchi kahani ha jiske hisse me jo likha h wo usse hi milta h chahhe koi kitna bhi haasil kyu naa karna chahe

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