अक्ल बढ़ी या किस्मत (Akal Badi Ya Kismat) Part – 2


दोस्तों  अगर आपने इससे पिछली कहानी पढ़ ली है फिर तो achhi बात है, पर अगर नहीं पढ़ी तो पहले यह कहानी जरूर पढ़ ले – अक्ल बढ़ी या किस्मत (Akal Badi Ya Kismat) क्यूंकि यह कहानी उस कहानी का ही आगे का Part है।

अब जिन्होंने कहानी नहीं पढ़ी थी ,उन्होंने भी पढ़ ली होगी , अब आगे की कहानी पढ़े –

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किस्मत बहुत निराश हो जाती है जब किसान उन मोतियों को मामूली पथर समझता है और मंत्री से कहता है कि  अगर आपको चाहिए तो आप ले जाओ।

लेकिन किस्मत अभी भी हार नहीं मानती , उसकी जिद्द थी कि वो साबित करके रहेगी कि बिना ज्ञान के भी किस्मत किसी को भी धनवान बना सकती है।

मंत्री राजदरबार में पहुँचता है और राजा से कहता है ,”महाराज , हमे लगता था कि हम बहुत ही ज्यादा अमीर है ,जितना धन हमारे पास है उतना किसी के पास नहीं होगा।  परन्तु महाराज ,हम गलत थे।”



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राजा कहते है ,”बात क्या है बताओ ?”

मंत्री  कहने लगा ,”महाराज ,आज जब मैं घर से राज भवन आ रहा था तब मैंने एक खेत देखा ,उस खेत में फसल नहीं, बल्कि मोती ही मोती उगे हुए थे। सिर्फ इतना ही नहीं महाराज ,जब मैंने उस किसान से मोतियों के बारे में पूछा तो उसने कहा कि अगर आपको भी चाहिए तो ले जा सकते हो। उस आदमी के पास बहुत ही अधिक धन-दौलत होगी जो उसने ऐसे कह दिया।

राजा उसकी बात सुनकर हैरान भी हुए है और खुश भी। हैरानी इस बात की, कि उनसे भी बढ़कर कोई अमीर है और ख़ुशी इस बात की ,कि वो उनके ही राज्य का है।

महाराज मंत्री से कहते है ,”अगर ऐसा ही है तो हम अपनी राजकुमारी का विवाह उस लड़के से करेंगे। कल ही उसे राजदरबार बुलाया जाये और उसे कह देना कि का उसकी राजकुमारी से शादी है। “

जब किसान तक यह सन्देश पहुँचता है तो वो बहुत ही प्रसन्न हो जाता है और सारे गाँव वालो को कह देता है कि कल मेरा विवाह राजकुमारी से है और आप सब भी मेरे साथ राज भवन में चलना। पर कोई भी उसकी बात पर विशवास नहीं करता और सोचते है कि खुद तो मरेगा ही और साथ ही साथ हमे भी मरवायेगा।

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अगले दिन किसान अकेला ही राज दरबार में चले जाता है। जब राजा और बाकि सब भी, किसान को अकेला आया देखते है और साधारण कपड़ो में ही वह आया था तो सभी सोचते है कि यह व्यक्ति तो बहुत ही सादगी पसंद है। इससे बढ़िया लड़का तो कोई हो ही नहीं सकता ,इतना अमीर होने के बावजूद भी साधारण कपड़े और अकेला ही आ गया।

राजा को लड़का पसंद आ जाता है और उसका विवाह राजकुमारी से हो जाता है।

किस्मत ने एक बार फिर से किसान का साथ दिया पर आगे जाकर पता लगेगा कि क्या बिना अक्ल के किस्मत किसी काम की भी है या फिर नहीं ?

राजकुमारी और किसान का विवाह हो चूका था अब वो राजमहल से विदा लेते है और राजकुमारी भी अब किसान के घर आ जाती है। जब किसान कमरे में जाता है और राजकुमारी को देखता है तो एकदम से डर जाता है क्यूंकि राजकुमारी ने काफी ज्यादा श्रृंगार makeup किया हुआ था और किसान को इसकी समझ नहीं थी। किसान राजकुमारी को कोई चुड़ैल समझकर ,घर से भाग जाता है और नदी में छलांग लगा देता है।

राजकुमारी ने दासियों से कहकर राजदरबार में खबर पहुंचा दी।

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राजा के सैनिक किसान को पकड़ लेते है। Raja Kisaan से पूछता है कि उसने छलांग क्यों लगाई ? मगर किसान चुप रहता है और कुछ नहीं बोलता। किसान के ऐसे बर्ताव को देखकर राजा को काफी गुस्सा आ गया और सोचने लगा कि मैंने किसी पागल से अपनी Rajkumari की शादी कर दी और उसका भविष्य खराब कर दिया। राजा ने उसे अगले दिन सुबह-सुबह फांसी पर लटकाने का आदेश दे दिया।

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किस्मत इस बार तो बहुत ही ज्यादा निराश हो गई। अब उसने हार मान ली। उसने सोचा कि मेरी वजह से उस किसान को फांसी मिल जाएगी और अब वह उसे बचाने के लिए कुछ भी नहीं कर सकती थी।

तो दोस्तों अब आपको पता लग गया होगा कि अकेली किस्मत कुछ भी नहीं कर सकती पर अगर kismat के साथ akal मिल जाए तो क्या कुछ हो सकता ,यह जानने के लिए आप इसका Last Part अगली Post में जरूर पढ़े। 

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8 thoughts on “अक्ल बढ़ी या किस्मत (Akal Badi Ya Kismat) Part – 2”

  1. बहुत ही ज्ञानवर्धक कहानी। यह हमें बताती है की हमें किस्मत से ज्यादा अक्ल की जरुरत होती है। कहानी के अगले पार्ट का इन्तेजार है।

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    • आपका इन्तजार जल्द ही समाप्त होगा कहानी के सबसे रोचक पार्ट के साथ , बस थोड़ी-सी प्रतीक्षा करे ।

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    • ऐसी ही अन्य कहानियां पढ़ते रहने के लिए हमारे ब्लॉग के साथ जुड़े रहे और ब्लॉग को subscribe करना मत भूले ।

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  2. वाह, बहुत खूब। किस्‍मत का अक्‍ल के साथ गठबंधन होना कितना जरूरी है। यह आपने कितनी सहजता से बताया। मुझे आपकी रचना के दोनों पार्ट बहुत ही अच्‍छे लगे। हां मैंनें आपके कमेंट का रिप्‍लाई भी किया है, उसे देख लीजिएगा।

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    • मुझे ख़ुशी हुयी की आपको यह कहानी पसंद आई । इस कहानी का अगला पार्ट, last part है उसे भी जरूर पढियेगा ।
      आप अपने ब्लॉग पर बहुत ही बखूबी समझाते है । बहुत बहुत शुक्रिया इतना बारीकी-से समझाने के लिए ।

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