धूर्त व्यक्ति को ईमानदारी का पाठ पढ़ाने की गलती भूलकर भी मत कीजियेगा

अगर कोई व्यक्ति सबको यह कहता रहे कि ईमानदार व्यक्ति जैसा कोई व्यक्ति होता ही नही, ईमानदारी नाम की चीज ही नही है, तो उस व्यक्ति से दूरी बनाकर ही रखिये यही आपके लिए बढ़िया है, क्योंकि ऐसे व्यक्ति से धूर्त व्यक्ति कोई हो ही नही सकता।

ईमानदारी कोई शब्दो की मोहताज नही, यह बन्दे के कर्म है, उसके असूल है, उसकी लाइफ का discipline है, उसके घर वालों के दिए उसको संस्कार है।

जैसे कुएं में रहने वाला मेंढक सोचता है न कि यह कुआं ही सब कुछ है इससे बड़ा या इससे बाहर कुछ है ही नही, वैसे ही वह धूर्त व्यक्ति है, उसके लिए ईमानदारी नाम की चीज ही नही है, उसके लिए सिर्फ और सिर्फ धूर्तपंती ही है।

ऐसा व्यक्ति या तो आपको भी धूर्त बनने को कहेगा, अगर आप उसे ईमानदारी का पाठ पढ़ाने लगोगे तो वैसे ही कुएं के मेंढक की भांति आपको अन्य धूर्तों के साथ मिलकर मारकर भगा ही देगा।

इसलिए धूर्त व्यक्ति से बचकर ही रहिये इसी में आपकी भलाई है और उसे ईमानदारी का पाठ पढ़ाने की गलती भूलकर भी मत कीजियेगा।

जैसे सज्जन व्यक्ति अपनी सज्जनता नही छोड़ते, वैसे ही धूर्त लोग धूर्तपना नही छोड़ते।

दोस्तों अगर लेख में लिखा शब्द थोड़ा बुरा लगा हो तो माफ कीजियेगा, लेकिन यही जीवन को सच्चाई है। अगर आपके साथ ईमानदार लोग है, तो उनके साथ जीवन व्यतीत कीजिये। उन्ही के साथ मित्रता रखिये, नही तो आपकी जिंदगी बद्द से बद्दतर बनने में देर न लगेगी।

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5 thoughts on “धूर्त व्यक्ति को ईमानदारी का पाठ पढ़ाने की गलती भूलकर भी मत कीजियेगा”

  1. Baat to apki Sahi hai_lekin fir log esa kyun kehte Hain ki sangat Ka asar bhi ho jata h Kabhi Kabhi_agar dhurt insan imandar ke sath rahe to wo Uske sath rehkr ya samjhane sey imandar nahi ban sakta kya _? Plz tell me hum imandar hai or hamara mittr dhurt h but hame ussey lagab or attachments h lekin hum Uske Jaise Kam na karein to kya rishta todna jaruri hoga is ek bajah ke Karan ki wo dhurt h ?

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    • अगर वह आपका करीबी है तो आप उसे समझाने की कोशिश जरूर कीजिये लेकिन फिर भी हमारे जो बचपन के संस्कार होते है, भले ही वह अच्छे हो या बुरे, वह कभी नहीं जाते.

      ठीक उसी प्रकार यहाँ धूर्त व्यक्ति के बारे में कहा गया है कि वह हमेशा धूर्त ही रहता है. यहाँ खासतौर पर यह लिखा “अगर वह कहे कि “ईमानदारी नाम की चीज ही नही है” इसका यह अर्थ कि उसमे धूर्तता कूट-कूट कर भरी हुयी है. अगर उसमे थोड़ी-सी भी अच्छाई हो तो वह कम-से-कम ऐसा तो न कहे कि “ईमानदारी नाम की चीज ही नही है”.

      बाकि आप एक अन्य आर्टिकल “झूठा व्यक्ति हमेशा झूठा ही रहता है” यह भी जरूर पढ़े.

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