गर्मियां शुरू होते ही झूठे और दोगले लोगो का समय भी आ गया है

दोस्तों, अक्सर आपने गर्मियों में लोगों को एक मैसेज बहुत ही अधिक शेयर करते हुए देखा होगा जिसमे वह लिखते है कि “गर्मियों के दिनों में कृपा अपनी छत पर पानी का बर्तन जरूर रखे ताकि इस तपती गर्मी में बेचारे पक्षी अपनी प्यास बुझाकर राहत ले सके.”

क्यों दोस्तों, पढ़ा ही होगा न आपने?

वैसे इस मैसेज में कोई बुराई तो नहीं है, अच्छा ही काम है कि पक्षिओं को भी पानी मिले लेकिन इस में दोगलापन क्या हुआ? आईये हम आपको इस बारे में बताते है.

pakshio ki jhoothi parvah dikhave ke liye mat kare

झूठे लोगों का दोगलापन

दोस्तों ऐसे मैसेज बार-बार भेजने वालों में से अधिकतर वही लोग होते है जो मांसाहार का सेवन करते है और मांस आदि खाने को अपनी शान समझते है.

और वही लोग गर्मी होती नहीं कि पक्षिओं कि झूठी परवाह करने लग जाते है.

अगर उन्हें सच में पशु/पक्षिओं से प्रेम है तो वह मांसाहार का सेवन करते ही क्यों है?

आखिर जिन जानवरो को वह मारकर खाते है, उनमे भी तो जान है.

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मुर्गा हो या भले ही को मछली सब में है एक ही आत्मा का वास

दोस्तों भले ही मुर्गा हो या मछली हो, कोई भी जानवर या जीव हो सब में एक ही आत्मा का वास है, उनमे भी जान है, उन्हें भी दर्द होता है, तो उन्हें क्यों मारकर मात्र स्वाद के लिए खाया जाता है?

इन गर्मियों में पक्षिओं पर तो प्रेम आता है, लेकिन उन जानवरों/जीवों का क्या जिन्हे मरकर यह लोग खाते है.

कभी कसाई की भी दूकान पर देख लीजियेगा किस तरह से मुर्गे भी बाहर गर्मी में पड़े होते है और बाद में कैसे निर्दयता से उन्हें मार दिया जाता है, उनमे से भी वैसा ही लाल खून निकलता है, जैसा कि किसी इंसान के शरीर में होता है. रंग सबके खून का लाल ही है.

तो ऐसे लोगों को उन जीवों पर दया क्यों नहीं आती? तब वह कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं देते और तब क्यों आजादी का हवाला या स्वाद का हवाला दे देते है.

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दोगले मत बने

दोस्तों किसी भी जानवर के लिए भी कुछ भला करना अच्छी बात है, लेकिन यहाँ बात यह है कि लोग दोगले क्यों बनते है? अगर सच में जानवरों से प्रेम है तो वह क्यों जीवों को सिर्फ स्वाद के लिए मारते है और अगर प्रेम नहीं है तो फिर गर्मियां आते ही झूठी सहानुभूति क्यों दिखाने लग जाते है.

मेरी सलाह, हमेशा शाकाहारी रहे

दोस्तों मै तो सबको यही कहूंगा कि सभी को शाकाहारी ही होना चाहिए क्यूंकि शाक-आहार ही उत्तम आहार है.

मांसाहार बंदे में तामसिक गुणों को लाता है जिससे आदमी में क्रूरता जैसे भाव पैदा होते है. और तो और किसी कि जान लेकर ऐसे लोगों को क्या मिल जाएगा…. मात्र स्वाद? स्वाद में इतना क्या जो शाक में नहीं और शाक से उत्तम भी कुछ अन्य नहीं.

इसलिए हमेशा शुद्ध और शाकाहारी आहार ही अपनाएं और ऐसे दोगलेपन से भी दूर रहे.

हमेशा याद रखे भले ही वह जीव है, उन्हें भी दर्द/तकलीफ महसूस होती है और उनके भी परिवार होते है.

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