मेरे हाथों की लकीरें मुझसे कहती है कि

Haatho Ki Lakire Mujhse Kehti Hai Ki


मेरे हाथों की लकीरों में भी क्या खूब लिखा है
वह तो खुद ही मुझसे कहती है कि

“तू हमे मत देख, बल्कि अपने हाथों को देख
हम पर भरोसा मत करना, बल्कि अपने हाथों पर भरोसा करना
जब तक तू कर्म करता रहेगा तो सफलता जरूर मिलेगी
लेकिन जिस दिन कर्म करना भूलकर,
हम लकीरो के जाल में फंसेगा, तो फिर तेरा क्या होगा,
वह तो खुदा ही जाने।”

दोस्तों हाथों की लकीरों पर मत जाए। अगर कर्म करने के लिए हाथ है, और शरीर मे जान है तो कर्मशील बने रहिये। रुकिए मत, बढ़ते रहिये, मेहनत करते रहिए। हाथो की शक्ति का सदुपयोग करते रहिए। अगर ऐसा करेंगे तो चाहे लकीरो में गलत (नकारत्मक) ही क्यों न लिखा हो, तो वह लिखा भी गलत (सही) हो जाएगा। क्योंकि जो कर्मशील है, उसे अपने लक्ष्य तक पहुंचने से कोई नही रोक सकता ,उसके हाथों की लकीरें भी नही और फिर सफलता उसके कदम चूमती है ।

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1 thought on “मेरे हाथों की लकीरें मुझसे कहती है कि”

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