मोहन नाम का लगभग 8-9 वर्षों का एक लड़का था। वह भगवान से मिलना चाहता था। लेकिन जब भी वह अपने मम्मी-पापा से भगवान का पता पूछता तो वो कह देते कि भगवान जी अपने आप  तुमसे मिलने आएंगे ,वह अपने घर पर नहीं आने देंगे तुम्हे और ऐसा कहकर वह मोहन की बात को टाल देते।

पर मोहन की तो पक्की जिद या फिर यूं कहें उसके दिल में तो भगवान के प्रति अटूट प्यार भरा हुआ था कि उसने भगवान जी से मिलकर ही रहना है।

मोहन ने भगवान जी से मिलने का सोचा। वह यह तो जानता नहीं था कि भगवान रहते कहा है , इसलिए मोहन ने एक दिन सुबह-सुबह जल्दी उठकर खाना pack किया ,biscuits साथ में लिए और पीने के लिए शरबत भी अपनी bottle में डाल लिया और चल पड़ा भगवान की खोज में।

वह भगवान जी को ढूंढते-ढूँढ़ते दूर कहीं चला गया और पेड़ के नीचे बैठ गया।

उसके सामने ही एक बूढ़ी औरत भी बैठी थी।उन्होंने कितने दिन से कुछ नहीं खाया था और जिद्द में बैठी थी कि अगर भगवान आकर उसको कुछ खिलाएंगे तभी वह भोजन करेगी ,नहीं तो वह भूखी रहकर ही व्रत करती रहेगी।

मोहन उस बूढ़ी औरत के पास गया और बैग में से कुछ biscuits निकालकर आगे किये और अपने हाथों से उन्हें खिलाने लगा।

Biscuits के बाद ,शरबत भी  उन्हें पीने के लिए दिया।

दोनों बहुत खुश हुए और घर वापिस आ गए।

घर आकर मोहन ने अपनी मम्मी-पापा को बताया कि आज मैं भगवान जी से मिला और वो बहुत बूढ़े हो चुके है ,उनसे सही से चला भी नहीं जाता और शायद उनके घर पर खाना भी नहीं होता होगा क्योंकि वह बहुत भूखे थे।

वह बूढ़ी औरत जब घर गयी उसने अपने घर वालों से कहा कि आज भगवान जी ने मुझे खुद अपने हाथों से खाना खिलाया और वह बच्चे के रूप में मेरे पास आये थे और बड़े ही प्यार के साथ मुझे खिलाया-पिलाया।

मोहन की ज़िद्द थी कि भगवान जी से मिलना है और उस बूढ़ी औरत ने निश्चय किया हुआ था कि अगर भगवान  खुद आकर उसे खाना खिलाएंगे तभी वह खाना खायेगी।

दोनों की इच्छाएं पूरी हो गयी ,दोनों ने एक-दूसरे में भगवान को देख लिया और दोनों की ही मुरादे पूरी हो गयी।

मोहन को दर्शन हो गए और उस औरत को खाना भी खिला दिया।

दोस्तों ,कहानी तो आपने पढ़ ली पर अब जो असल बात है उसपर आते है। इस कहानी का मतलब यह है कि अगर हम भी भगवान पर अटूट भरोसा करते है लेकिन सोचते है कि अगर भगवान हमारे पास खुद चलकर आएंगे तभी हम कोई काम करेंगे ,तो हम गलत है। यह सच है कि ईश्वर हम सबको देखते है और अपने भक्तों की सहायता के लिए भी आते है। लेकिन यह जरूरी नहीं कि Bhagwan Ji खुद ही प्रकट हो, क्योंकि वह तो हम सभी के अंदर भी विराजमान है ही । बहुत बार Ishwar ऐसा करते है कि जो लोगों की जो भी दिक्कत होती है ,वह खुद किसी इंसान के स्वरुप के अंदर से प्रकट होकर हमारी मनोकामनायें (Wishes) पूरी कर देते है। जैसे कि इस कहानी में Bhagwan किसी रूप में नहीं आएं ,बल्कि उस बूढ़ी औरत के लिए Bhagwaan मोहन के रूप में आकर उसकी मनोकामना पूरी कर देते है और मोहन के लिए उस बूढ़ी औरत के रूप में उसकी भी मनोकामना पूरी कर देते है।

ईश्वर ऐसे ही दो लोगों का आपस में संपर्क करा देते है। कई बार आपने सुना भी होगा या आपके साथ भी हुआ  होगा कि आप जब कहीं बार गए होंगे या कभी भी आपके ऊपर कोई मुसीबत आयी होगी ,कई बार कोई ऐसा इंसान आपको मिल जाता है जो सारी की सारी मुश्किल का आसानी से हल करा देता है या उस मुसीबत से हमें बाहर निकाल देता है और ऐसा होने के बाद वह हमारी ज़िन्दगी से भी दूर चला जाता है यानी कि हमारा उसके साथ बाद में कोई contact नहीं रहता। यह सब ईश्वर ही करते है या तो वह हमारी सहायता के लिए किसी इंसान को भेज देते है या फिर क्या मालुम खुद ही इंसान का रूप लेकर हमारे सामने आये हो और हमें अपना असली रूप न दिखाना चाहते हो।

तो दोस्तों भगवान पर अटूट भरोसा तो रखिये लेकिन कभी ऐसा मत सोचिये कि अगर भगवान खुद हमारे पास आएंगे तभी हम मानेंगे कि भगवान है ,वह  खुद अपने रूप में नहीं आते ,बल्कि किसी इंसान को भेज देते है और उसके स्वरुप में खुद होते है या फिर खुद ही इंसान का रूप धारण करके आते है।

दोस्तों आपको ईश्वर से मुलाक़ात (Met With God ) कहानी कैसी लगी commnt करके जरूर बताये अगर पसन्द आयी तो दोस्तों के साथ Share करना न भूलें।

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Nikhil Jain

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