वक्त को बदले, न कि वक्त के साथ बदले

Vakt ko badle Na ki Vakt ke Sath Badle

लोग कहते है वक्त के साथ बदल जाना जरूरी है
लोग कहते है जो वक्त के साथ-साथ नही बदलता
वह प्रगति नही कर सकता।

लेकिन अगर आपके इरादे मजबूत है और संस्कार सच्चे है,
तो वक्त को बदलकर दिखाईये, लेकिन खुद कभी न बदलिए।

दोस्तों , लोग कहते है आज के वक्त में आज जैसे ही बनिये, आज के वक्त से साथ आप भी बदल जाईये। और इस बदलने का मतलब सिर्फ छोटा-सा बदलाव ही नही होता बल्कि संस्कार भी बदलने को कह दिए जाते है।

अगर कोई सच्चा है, तो लोग कहेंगे, झूठ बोलना सीख, वक्त के साथ बदल जा।

अगर कोई ईमानदार है तो उसे बेईमानी का पाठ पढ़ाया जाएगा।

अगर कोई भारतीय संस्कृति और भारतीय पहरावे का प्रेमी है तो उसे पश्चिमी पहरावे के बारे में बताया जाएगा।

क्या हमारे संस्कारों की कोई कद्र ही नही? क्या हम सब ऐसे ही है? क्या हमारे मूल सिद्धांत कुछ भी नही, और झूठ, फरेब, बेईमानी, पश्चिम सभ्यता में लीनता ही सब कुछ है?

नही….. ऐसा नही है, आपके इरादे अगर मजबूत है और आपके संस्कार सच्चे है तो कभी मत बदलिए।

हमेशा याद रखिये उच्च पद पर सभी नही विराजमान हो सकते, जो उसके लायक होता है, सिर्फ वही उसपर विराजमान हो पाते है।

इसलिए कभी भी वक्त के साथ बदलिए मत, अपने ईमान को बेचिए मत, अपनी संस्कृति की बेकद्री करिये मत, चाहे सारा जमाना, चराचर जगत भी आपका विरोधी हो जाये तो भी सच्चाई से मत डगमगाइये।

Note: सच्चाई का मतलब सच्चेपन से होता है, सच्चेपन और संस्कारों में किसी प्रकार ही हिंसा नही होती। अगर किसी को हिंसा सच्चाई और संस्कार लगे तो वो झूठी/गलत जानकारी है। इसलिए इस आर्टिकल से कंफ्यूज मत होइएगा। आतंकवादी भी अपने इरादों से नही पलटते, लेकिन वह हिंसक है, उसमे दूसरों को दुख देते है, इसलिए वह गलत है। जो सबका सुख सोचे, और सबके दुख को अपना समझे, वही सच्चा हो सकता, जो किसी को भी दुख दे, वह कभी सच्चा और संस्कारी नही हो सकता।

दोस्तों इस आर्टिकल पर अपने सुझाव देना मत भूलिए ,अगर पसन्द आया हो तो शेयर भी जरूर करे।

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