बुधवार, 22 मार्च 2017

बालों का काला करने का सबसे आसान और असरदार घरेलू उपचार (Get Black Hair Naturally In Hindi)

क्या आपके बाल कम उम्र में ही सफ़ेद हो गए? तरह-तरह के उपचार करने के बाद भी कोई हल न हुआ? तो अब आप इस Post को पढ़ने के बाद अपने बालों को आसानी से और कुदरती काला कर सकते है।



इसके लिए आपको आमला, रीठा और शिकाकाई की जरूरत है। और एक लोहे का बर्तन चाहिए।


बालों को कुदरती काला कैसे करे


जिसके भी बाल सफेद हो उसे करना सिर्फ इतना है कि आंवला ,रीठा और शिकाकाई तीनों को जिसमे आंवलों की मात्रा अन्य दोनों से थोड़ी-सी अधिक हो और इन तीनों को एक लोहे के बर्तन में डालकर पानी भरकर (लगभग 1 से 1.5 लीटर या जितने पानी से आपके बाल आसानी से धूल जाए) रात भर भिगो देना है। सुबह नहाने वक्त बालों पर अन्य कुछ भी इस्तेमाल नहीं करना और जो रात को मिश्रण भिगोया था उस पानी से बाल धो लेने है।



आप इसी मिश्रण को दो या तीन दिन तक इस्तेमाल कर सकते है और जब पानी में कालापन आना समाप्त हो जाए उसके बाद नया मिश्रण घोल ले।



क्योंकि यह without chemicals hair black karne ka tarika hai ,इसलिए आपको ऐसा महीनों भर करते रहना है और इसका असर दिखने में भी 3-4 महीने कम-से-कम लगेंगे। लेकिन बालों को कुदरती काला करने का इससे बेहतर कोई भी तरीका नहीं है।



सावधानी: natural तरीका है, इसका कोई side effect नहीं है, लेकिन अपने हाथों को संभालकर जरूर रखे और अच्छे से साफ़ करते रहे क्योंकि ऐसा करने से आपके हाथों में भी कालापन अवश्य आएगा।

कोई भी और किसी भी उम्र का इस नुस्खे को प्रोयोग कर सकता है।

शनिवार, 18 मार्च 2017

तेरी किरपा से ही तो चलती है मेरी जिंदगी.... (Teri Kirpa Se Hi To Chalti Hai Meri Zindagi....)

दोस्तों आज मैं आप सभी के साथ पहली बार अपने साथ recently बीती या फिर यूं कहें मेरे साथ न बीती घटना share करने जा रहा हूँ। इस story को पढ़कर आप सभी यह भी समझ जाएंगे की mostly मैं सभी stories ईश्वर या कर्मों से related ही क्यों लिखता हूँ।






बात 9 March, 2017 की है, जब मुझे मेरी life की first income मिली (mobile me account me add hone ka message aaya tha), तब मैं कितना खुश हुआ बता नहीं सकता..... उस समय मैं coaching class में था जो मैंने recently ही join की है।



वहां से वापसी करते वक्त भी मैं बहुत खुश था और ख़ुशी-ख़ुशी में bike भी शायद थोड़ी speed में थी.... और साथ ही साथ मुँह में भजन गुनगुनाता हुआ आ रहा था।



"तेरी किरपा से ही तो चलती है मेरी जिंदगी,
हे भोले जी, अपनी किरपा यूं ही बनाये रखना......"



ख़ुशी ख़ुशी में शायद मैंने traffic का इतना ध्यान नहीं दिया और overtake करते वक्त जब एकदम से पीछे को देखा कि कोई गाड़ी तो नहीं आ रही न, तभी एकदम से मेरी से आगे वाली गाड़ी ने break लगा दी और उस समय मेरी speed इतनी थी कि आगे को गाड़ी से जितना distance था, वो मुझे लगा ही नहीं कि एकदम से break लगेगी। लेकिन जैसा कि मैंने कहा कि मैं भजन गुनगुनाता हुआ आ रहा था, तो आधे second (या फिर एक सेकंड ) से भी कम समय में एकदम से अपने आप मुझसे bike की break लग गयी और बाइक का balance भी नहीं बिगड़ा और मैं बच गया।
(बाइक Pulsar 180, Front disc break जब एकदम से लगाये balance नही बनता)



मुझे नहीं मालूम क्या हुआ..... एकदम से कैसे ब्रेक लग गयी, क्योंकि अगर इतनी तेज ब्रेक लगाऊं तो बाइक मुझसे slip हो जाती है लेकिन उस समय बिलकुल minor सी slip हुयी और balance proper बना रहा।



दोस्तों, अपने साथ बीती यह बात आप सभी से इसलिये ही share कर रहा हूँ कि ईश्वर की कृपा को सभी जान और समझ सके। मैं अपने बारे में कुछ नहीं कहता, सिर्फ इतना कहता हूँ कि भक्ति जब दिल से होती है तो भगवान हमेशा हमारे साथ ही रहते है, कहते भी है न कि " भक्त के वश में है भगवान"। भगवान तो सदैव भक्त के साथ ही है ,सिर्फ हमे दिल में उन्हें जगह देनी आनी चाहिए।



लेकिन फिर भी कई बार मैं और बहुत से लोग, भगवान को दिल में जगह देकर भी कई बार निकाल देते है और उन्हें भूल जाते है, पर इसपर भी एक बात......



"मैं और मेरे भोले जी बहुत ही भुलक्कड़ है,
मैं उन्हें याद करना भूल जाता हूँ और वो मेरी गलतियों को याद करना भूल जाते है।"






दोस्तों, मैं जानता हूँ, बाइक चलाते वक्त थोड़ी-बहुत या फिर थोड़ी-ज्यादा ही ;) मेरो गलती थी..... लेकिन भोले जी की किरपा से मुझे कुछ भी नहीं हुआ और मैं वैसे का वैसे ही हूँ।


यह भी पढ़े :
ईश्वर से मुलाक़ात (Met With God)

सोमवार, 13 मार्च 2017

Holi Wishes In Hindi 2017

दोस्तों , GyanPunji की तरफ से GyanPunji के सभी पाठको को होली की बहुत-बहुत बधाई हो। होली का त्यौहार आप सभी के जीवन में खुशियों के रंग भर दे और आप सभी जीवन में हमेशा ऊँची बुलंदियों  छूते रहे। 


होली के उपलक्ष्य पर आपके साथ होली के greetings share कर रहा हूँ इसे आप अपने परिवार , दोस्तों ,प्रियजनों  के साथ download करके जरूर भेजे। 


Whatsapp Greetings On Holi In Hindi 

दोस्तों रोज hindi best quotes पढ़ने के लिए GyanPunji.com का Facebook Page Like करना न भूले 



होली के दिन की यह मुलाकात याद रहेगी 











होली का रंग धुल जाएगा लेकिन दोस्ती का कैसे धुल पायेगा। 

Holi Greetings For Best Friends In Hindi








रंगों का त्यौहार होली 









मुबारक हो आपको  होली का त्यौहार 













होली का रंग और देश भक्ति की लहर 









आपको तथा आपके परिवार को होली की 
हार्दिक शुभकामनायें 










Funny Greetings On Holi In Hindi














रंग उड़ाये पिचकारी 








तुम भी झूमो मस्ती में 
हम भी झूमे मस्ती में 
तुम्हे भी और मुझे भी 
होली की बहुत-बहुत बधाई 










वो भी क्या दिन थे 










Holi Wishes In Hindi









Holi Messages In Hindi









सितारों ने आसमान से सलाम भेजा है 









Lovely Holi Greetings In Hindi
Holi Wishes For Couples











होली का त्यौहार आज मनाना है











दिलो  को मिलाने का मौसम 










मंगलमय हो आपका यह रंगों का त्यौहार 










Holi Greetings On Trust 












Happy Holi











खुशियों से भरा हो आपका यह संसार 











यारों को होली की बधाई 










रंग चाहे फीका हो 
या हो गहरा 
लेकिन रिश्तो का रंग हमेशा रहे गहरा 










प्यार का त्यौहार होली 










 मुबारक हो आपको होली का त्यौहार 















जब तू है मेरे संग 
तो हमेशा जिंदगी में नयी उमंग 


Love Messages On Holi In Hindi
Holi Wishes For Married 
Holi Wishes For Spouse In Hindi


शुक्रवार, 10 मार्च 2017

दूसरों से उम्मीदे रखनी छोड़ दीजिये (Leave Hope From Others)



ऐसा कोई न मिले , हमको दे उपदेश। 
भौ सागर में डूबता , कर गहि काढे केश।।


दोस्तों, यह उपरोक्त कबीर जी का कथन है और इसी में ही हमारी ज़िन्दगी की सच्चाई भी छिपी हुयी है। कबीर जी को बहुत अधिक बोलने की आदत नहीं थी लेकिन वह जो भी बोले इतना सटीक बोले कि कुछ लफ्जो में ही सब कुछ कह देते थे। 



कुछ ऐसा ही इस दोहे में भी है। यह दोहा भले ही पढ़ने में छोटा लगे ,लेकिन इस dohe ka meaning बहुत ही गहरा है। आईये पहले इस दोहे के अर्थ को समझे और फिर इसकी गहराई को।  



दोहे का अर्थ :  कबीर जी कहते है कि उन्हें इस संसार में ऐसा कोई भी नहीं मिला जो उन्हें उपदेश दे सके यानी कि कुछ सीखा सके ,सच्ची राह दिखा सके और इस भौ सागर यानी कि भव सागर में डूबने से बचाने के लिए उनके केश पकड़कर उन्हें बाहर निकाल ले। 



भाव : हम जीवन में कईयो को अपने गुरु की तरह मानते है ,जिनसे हम सीखते है, कईयों के आदर्शों पर चलते है ,लेकिन जब जीवन में हमे सबसे अधिक किसी की जरूरत होगी तब कोई साथ नहीं देगा ,उस समय हमारा ज्ञान ,हमारी आध्यात्मिकता ही हमे बचाएगी।  ऐसा कोई गुरु नहीं जो भव सागर में निकलने से बचा सके क्योंकि निकलना हमे ही खुद ही पड़ेगा ,भव सागर में डूबने से बचाने वाला कोई नहीं।






अभी शायद अच्छे से समझ न आया हो क्योंकि गुरु तो ज्ञान देते है और वह भी बिना किसी स्वार्थ के ,तो फिर ऐसा क्यों लिखा कि भव सागर से निकालने वाला कोई भी नहीं। इसे भी एक example से समझते है।



Example : जब कोई swimming सीखता है तो वह simple pool में सीखता है या फिर कुछ लोग अपने दोस्तों के साथ कम बहाव वाली नदियों में भी सीख लेते है। जब  सीख रहे होते है तब सीखाने वाला हर तरह की परिस्थितियों में तैरने के बारे में बताता है और भारी बहाव  में कैसे तैर सकते है यह  भी बताता है। लेकिन अगर हम समुद्र के बीचों बीच अकेले हो और बहाव बहुत तेज हो तो क्या कोई हमे बचा सकेगा ?



कुछ इसी तरह से कबीर जी ने कहा है ,example में समुद्र शब्द शायद बहुत अजीब लगे कि समुद्र में कौन तैरने जाएगा ,इतने अधिक बहाव और इतने बड़े समुद्र में ? लेकिन अगर किसी ने मुक्ति प्राप्त करनी है तो हमारी जिंदगी समुद्र में तैरने की ही तरह है। कोई भी हमे थोड़ी बहुत समझ दे सकता है ,परेशानियों से  निकलने के लिए शायद कोई थोड़ा-बहुत बता दे या फिर सांत्वना दे दे लेकिन कहते है न जिस तन बीते ,वही तन जाने ,जिस पर बीतती है,उसके बारे में वही जानता है ,दूसरे सिर्फ बोल सकते है, कोई भी किसी का दुःख लेकर कम नहीं कर सकता ,सिर्फ थोड़ा सांत्वना ही दे सकते है।



भव सागर से पार उतरना भी कुछ ऐसा ही है। कोई हमे थोड़ा बहुत सीखा सकता है ,लेकिन हम कितना सीख रहे है और किन अर्थो में सीख रहे है और उसे  life में कैसे उतारते है ,यह तो हम पर ही निर्भर करता है। कोई भी हमारे दिमाग में कुछ घोलकर तो डाल नहीं सकता ,यही कबीर जी ने कहा कि कोई ऐसा न मिला जो केश खींचकर भव सागर से निकाल सके।



यह सब कबीर जी ने शायद हमारे लिए ही कहा हो क्योंकि वह तो महाज्ञानी थे और हम जैसे आम मनुष्य एक दूसरे से उम्मीदे लगाई रखते है कि वो कुछ कर देगा ,वो कुछ करा देगा ,लेकिन सीखना तो हमे ही पड़ेगा ,कोई हमारे दिमाग में तो कुछ डाल नहीं सकता। इसलिए स्वयं के इलावा ऐसा कोई भी नहीं है जो इस भव सागर को पार करा सके क्योंकि कर्म तो हर एक के अपने अलग-अलग है ,कोई भी हमे अच्छे कर्म करने के लिए प्रेरित तो जरूर कर सकता है ,लेकिन यह जरूरी नहीं कि हम वैसा करे ही।



इसलिए हमे दूसरों से उम्मीदे रखनी छोड़नी चाहिए और सच को जानकार इस भौतिकतावाद की जिंदगी से थोड़ा बाहर निकालकर अपनी जीवन नौका पार करने के लिए प्रयत्न करने चाहिए ताकि किसी समय हम जन्म-मरण के बंधन से मुक्त जरूर हो सके।






दोस्तों आपको यह आर्टिकल दूसरों से उम्मीदे रखनी छोड़ दीजिये (Leave Hope From Others) जोकि कबीर जी के दोहे से ही प्रेरित और गहराई से उनके दोहों का अर्थ समझाने के लिए लिखा गया है , कैसा लगा हमे comment करके जरूर बताये ,आपके comments हमे आगे भी इसी तरह के articles लिखने के लिए प्रेरित करते रहते है ,इसलिए comment करना न भूले और अपने दोस्तों के साथ भी Whatsapp, Facebook , Google Plus आदि पर भी जरूर शेयर करे।



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गुरुवार, 2 मार्च 2017

बुरे वक्त में भी किसी के सामने झुकना नहीं चाहिए (Never Beg)

हम सभी का ही जीवन कठिनाईयों से भरा पड़ा है। किसी के जीवन में अधिक मुश्किलें होती है तो किसी के जीवन में कुछ कम। लेकिन ऐसा कोई नहीं जिसे मुश्किलों का सामना न करना पड़ा हो।



लेकिन यह जरूरी ही है कि अगर किसी के पास अच्छे समय के बाद , कभी बुरा वक्त आ भी जाए तो वह बुरा वक्त जल्द ही तल जाएगा। हम सभी जानते है कि मुश्किलें और शोहरत दोनों में से कुछ नहीं टिकने वाला। अगर आज किसी के पास धन-दौलत है तो ऐसा भी हो सकता है कि कल उसके पास न हो और उसके बाद फिर से वह मेहनत करके अपना अच्छा वक्त वापस ला सकता है।






लेकिन इस समय में एक बात ध्यान रखने वाली है ,भले ही बुरा वक्त अगर कभी आ भी जाए तो भी हमे जीवन में हार नहीं माननी चाहिए और न ही किसी के सामने झुकना चाहिए या किसी अन्य से मदद मांगनी चाहिए क्योंकि बुरा वक्त तो कुछ समय के लिए आता है लेकिन अगर हम किसी के सामने झुककर उससे भीख मांगने लग जाए तो वह जीवन भर का बोझ ही बनकर रह जाता है।  चाहे व्यक्ति बाद में फिर से ऊँचे मुकाम पर भी आ जाए ,लेकिन एक बार की भीख पूरी जिंदगी की भीख बन जाती है ,खास तौर पर तब ,जब होंसलो में दम हो और मेहनत करने की पूरी लगन क्योंकि जिसमे कुछ कर जाने का जज्बा होता है वह अवश्य ही फिर से अपना अच्छा समय वापस ला सकता है ,लेकिन अगर वह किसी के सामने झुककर उससे भीख मांगे कि मेरी मदद कर दो तो वह पुरे जीवन के लिए श्राप बनकर रह जाएगा। क्योंकि जिससे हमे माँगना पड़े ,वह तो हमारा अपना हो ही नहीं सकता और फिर बाद में सभी को कहता फिरेगा कि "उस समय में मैंने इस व्यक्ति की मदद की थी , आज यह जो भी है सिर्फ मेरी वजह से।" और अगर हम अपनों की बात करे तो हमे कभी भी अपनों से माँगना नहीं पड़ता। अगर कोई सच में किसी का सच्चा दोस्त या मददगार है तो वह अपने आप मुश्किल में पड़े अपने साथी की सहायता करेगा। इसीलिए जिसके होंसले बुलंद हो उसे मुश्किल समय में भी किसी के सामने झुककर भीख नहीं मांगनी चाहिए। तभी तो कबीर जी भी कह गए कि



माँगन मरण समान ,मति मांगो कोई भीख। 
माँगन ते मरना भला ,यह सतगुरु की सीख।।



अर्थ : माँगना मरने के समान है ,कभी भी किसी से भीख नहीं मांगनी चाहिए। मागने से भला तो मर जाना चाहिए ,यही सच्चे गुरु कहते है।



भाव : कबीर जी कहते है कि किसी से कभी भी भीख नहीं मांगनी चाहिए। भीख मांगने से अच्छा तो मर जाना ही है। ऐसा कबीर जी ने इसलिए कहा ताकि मनुष्य सिर्फ पुरुषार्थ करे ,कर्म करे ,मेहनत करे ,लेकिन कभी भी किसी से कुछ मांगे न। क्योंकि अगर एक बार किसी से कुछ मांग लिया तो वह व्यक्ति देने वाले का दास बनकर रह जाता है। और बाद में अगर कभी वह ऊँचे  मुकाम पर पहुँच भी जाए तब भी वह उसके सामने झुका ही रहता है जिसने पहले भीख में कुछ दिया था। इसलिए कभी भी भीख नहीं मांगनी चाहिए बल्कि मेहनत करके ,अपना कमाकर खाना चाहिए।



दोस्तों ,इसमें भीख शब्द का अर्थ सिर्फ हर किसी से मांगने से ही नहीं है। बल्कि अगर हम पर कभी कोई विपत्ति आ भी जाए तो उस समय में किसी भी उस व्यक्ति के सामने न झुकने से है जो भी विपत्ति के समय में मदद करने को ऐसे बतलाये जैसे वह कोई बहुत बड़ा एहसान कर रहा हो। याद रखिये बुरा वक्त हर एक का कभी-न-कभी आता ही है और बाद में अच्छा समय फिर से आ जायेगा ,लेकिन अगर इस बुरे वक्त में किसी के सामने झुक गए और वो भी उसके सामने जो जिंदगी भर सुनाता रहे तो इससे बेहतर तो मर जाना ही है। लेकिन फिर भी मरना क्यों ? मेहनत करो और फिर से अपनी सफलता वापस ले आओ लेकिन कभी भी की के सामने झुको मत।



क्योंकि माँगना तो सिर्फ एक या दो बार का होगा 
लेकिन झुकना जीवन भर का बन जाएगा। 



इसलिए समय चाहे जैसा भी हो ,हम सभी को धीरज और अपने आप पर भरोसा रखना चाहिए। जो मेहनत करते है और जिन्हें अपने आप पर विश्वास है वह एक बात हमेशा याद रखे अगर अच्छे समय के बाद बुरा से आया है तो उस बुरे वक्त के बाद अच्छा वक्त भी जरूर आएगा।



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हम क्या लेकर आये थे और क्या लेकर जाएंगे ? (What We Will Carry With Us When We Go)
 

शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2017

शांत रहकर बदला कैसे ले (How To Take Revenge Silently)

शीतल स्वभाव के द्वारा ही गुस्से को ख़तम किया जा सकता है ,
क्योंकि ठंडा लोहा ही गर्म लोहे को काट सकता है। 





कई लोग होते है जो कहते है हमे अधिकतर गुस्सा नहीं आता ,कभी ही कोई ऐसी परिस्थिति आयी होगी जब हमने गुस्सा किया होगा। 



अच्छी बात है ,गुस्सा करना भी नहीं चाहिए ,लेकिन अगर गुस्सा करना ही नहीं ,तो क्या यह सही है कि  जो कहते है कभी  ही कोई ऐसी परिस्थिति होगी जब गुस्सा आ जाए ? गुस्सा किया....... ,अपने आप को ही गर्म किया ,इससे क्या  लाभ  हो गया ? क्या गुस्सा करने से हमारी शक्ति बढ़ गयी ? नहीं....... ,बल्कि गुस्सा करने से हम और भी अधिक कमजोर हो जाते है।






लोहा चाहे कितना भी मजबूत क्यों न हो ,लेकिन जब वह गर्म हो जाता है तब वह अपनी कठोरता खो देता है और उसी गर्म लोहे को ठंडा लोहा काट देता है। ठीक इसी तरह ,जब हम कभी भी गुस्सा कर ले ,तब हम अपने भीतर की कठोरता जोकि सोच-समझ (क्योंकि मनुष्य की असल ताकत उसका शरीर नहीं बल्कि उसका ज्ञान है) है उसे गँवा देते है। और हम कुछ भी सोचने के काबिल ही नहीं रह पाते और पता नहीं गुस्से में क्या-क्या बोल देते है और क्या-क्या कर देते है। लेकिन अगर उस परिस्थिति में भी हम ठन्डे बने रहे ,गुस्सा न करे तो दूसरे को अपने आप अपनी गलती का एहसास हो जाएगा। लेकिन अगर गलती का एहसास न भी हो तो हमे तो धीरज बनाये रखना है ,हम क्यों कुछ भी गलत बोले या करे ? सिर्फ इसलिए कि उसने दो-चार अपशब्द बोल दिए ? असल में अपशब्द तो उसके ही है ,क्योंकि कहते है न कि जिसके पास जो है ,वही वह दूसरे को दे सकता है। जो दूसरे के पास था वह तो उसने हमे दे दिया ,लेकिन क्या हमने उसे लिया या नहीं लिया ,यह हम पर निर्भर करता है क्योंकि अगर हमने भी बदले में अपशब्द बोल दिए ,इसका मतलब हमने उसके शब्द ले लिए थे ,अगर हम उसे कुछ कहे ही न ,तो उसका सामान तो उसके पास ही रह गया।

यह भी पढ़े : क्या इन्टरनेट बैंकिंग सच में फायदेमंद है (Is Internet Banking Really Beneficial In Hindi)


ऐसे में बदला लेने का सबसे बढ़िया तरीका आपको बताता हूँ।



जब गुस्सा करने के बाद दूसरा व्यक्ति शांत हो जाए या फिर कुछ दिनों बाद ,उसे एक बात कहिये -



उससे कहिये , "भाई ,अगर तुम मुझे कोई चीज गिफ्ट करो और उसे मैं न लूँ और वह छोड़कर (बिना touch किये) चले जाऊं तो क्या तुम उसे वापिस लेकर जाओगे या फिर वही पड़ी रहने दोगे। "



आपका दोस्त पहले तो बात मज़ाक में ही लेकर जाएगा कि मैं क्यों गिफ्ट दूंगा या फिर तुम क्यों नहीं लोगे लेकिन सही line पर उसे कैसे लाना है यह तो आप बेहतर जानते होंगे क्योंकि वह आपका दोस्त है।

यह भी पढ़े : नोट बंद होने के फायदे और नुक्सान (Advantages And DisAdvantages Of Notes Banned In India In Hindi)

बाद में उसका जवाब यही होगा कि "अगर तुम नहीं लोगे ,तो फिर तो मुझे वापिस ही लेकर जाना पढ़ेगा। "




बस सिर्फ इतना आपने सुनना है और बाद में कह दीजिये उस दिन तुमने मुझे जो गाली वगैरह निकाली थी न ,वह मैंने ली ही नहीं थी ,वह तो तुम अपने साथ ही वापिस ले गए।  अफ़सोस ......... तुमने अपने आप को ही इतनी सारी गालियां निकाली। :P



क्यों .......? आया मज़ा या नहीं ?ऐसा करने से आपका बदला भी पूरा और plus हंस-हंस कर आपका खून भी बढ़ ही जाएगा। और ऐसे ही आपने ठंडा लोहा बनकर गर्म लोहे को काट दिया।



तो अगर कभी अगली बार ऐसा कुछ हो तो ध्यान जरूर रखे गुस्सा नहीं करना ,बल्कि शीतल स्वभाव रखना है और दिमाग से काम लेना है।

यह भी पढ़े : क्या फायदा (What's The Benefit)


(लेकिन ऐसा सिर्फ अपने known वालो पर ही try करे :),नहीं तो लड़ाई फिर से बढ़ सकती है। )



एक और बात, अगर आप ऐसा नहीं कर सकते तो यह Post जरूर पढ़े : गुस्सा करने से होने वाले फायदे 

यह भी पढ़े : पुस्तके भी सोच-समझकर पढ़नी चाहिए (Every Book Is Not Enlightening)

इस Post का यह बिलकुल मतलब नहीं कि अगर कोई किसी को मारने भी आ जाए तब भी गुस्सा न करे। जीवन रक्षा जरूर करनी चाहिए लेकिन ,वैसे तो कभी ऐसी परिस्थिति किसी पर भी न आये लेकिन अगर कभी कुछ ऐसा हो जाए तो दिमाग को थोड़ा ठंडा रखकर सूझ-बूझ के साथ तथा अपने शारीरिक बल का सही प्रयोग करके उस विपत्ति से छुटकारा पाना चाहिए।



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मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017

गेम ,सोच और सफलता (Game, Thinking & Success)

दोस्तों आपने बचपन में अपने दोस्तों या परिवार के साथ जीरो काटी गेम तो खेली ही होगी। (जिसे Zero Cross और Tic Tac Toe भी कहते है। ) इसमें 9 डिब्बे होते है और जो भी तीन zero या तीन cross इकठ्ठे बना लेता है ,वह जीत जाता है।



यह गेम है तो मज़ेदार लेकिन इसमें जो पहले बाजी (turn) चलता है उसे 5 चांस मिलते है और जो बाद में चलता है ,उसे 4 chances ही मिल पाते है ,यानी की बराबर के मौके नहीं मिलते। और mostly यह होता है कि अगर दोनों game को अच्छे से खेलना जानते है तो फिर या तो गेम draw होती है या फिर जो first turn चलता है वह जीत जाता है। ऐसे में second बारी जो चलता है ,उसे एक turn कम मिलती है और वह जीत नहीं पाता। खैर गेम तो गेम है ,यह दिमाग की थोड़ी-सी कसरत के साथ-साथ मनोरंजन का साधन भी है ,लेकिन हमारी life में भी कई बार ऐसा ही होता है।






हमारी life भी एक तरह से गेम की ही तरह है ,लेकिन यह game जैसी होते हुए भी game नहीं है क्योंकि यह reality है। जैसा आपको Tic Tac Toe Game के बारे में बताया लाइफ भी कुछ ऐसी ही है। कई बार हम समझते है अब सब कुछ ख़तम हो गया ,अब आगे हम कुछ नहीं कर सकते। या फिर business में ही कुछ ऐसा हो जाता है कि हमे लगता है ,हम जो-जो कर सकते थे ,सब कुछ कर लिया ,अब बस Full Stop .

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लेकिन असल में ऐसा होता नहीं। हम सिर्फ हमारी सोच की सीमाओं के अंदर कैद होकर सोचते है ,उन सीमाओं से बाहर निकलकर कुछ करने का कभी सोचते ही नहीं।


क्योंकि Life तो Life  है ,इसलिए इसमें हम जो चाहे वह कर सकते है ,अगर हम अपनी सोच से हटकर सोचना चाहे तो वो भी सोच सकते है ,लेकिन हम तो सीमाओं में कैद है ,इसलिए उनसे बाहर का सोच नहीं पाते। एक बार कभी सोच की boundaries से बाहर निकलकर तो देखिये, तो सफलता जरूर मिलेगी। लेकिन सही दिशा की और न की गलत।

सफलता प्राप्त करने के लिए क्या करे ?


दोस्तों अब जानते है कि हम अपनी सोच की सीमाओं से बाहर कैसे निकल सकते है ?

यह भी पढ़े : सुबह जल्दी उठना फायदेमंद या फिर नुकसानदायक (Get Up Early In The Morning, Beneficial OR Harmful)

पहले गेम की ही बात करते है ,Picture देखिये और समझिये -




Picture आपने देखली, zero वाले को एक chance कम मिला था लेकिन अगर उस chance को boundaries के बाहर आकर पूरा किया जा सके तो कुछ ऐसा हो ,जैसा आप देख रहे है। सिर्फ एक chance और लेने से zero वाला जीत गया। खैर यह तो गेम है ,boundaries में ही रहकर खेलनी पड़ती है और ऐसा हम (सीमा से बाहर आकर खेलना) कर नहीं सकते। लेकिन हमारी ज़िन्दगी कोई ऐसी गेम नहीं जो boundaries के अंदर कैद हो सके ,हम real है ,हम कुछ भी कर सकते है। बस कुछ ऐसा ही हम सबको अपनी life के साथ करना है,अगर जिंदगी में सफल होना चाहते है।

यह भी पढ़े : जीवन में हमेशा सतर्क रहे (Always Be Careful In Life)

अगर किसी व्यक्ति को लगे कि सफलता के सारे रास्ते बन्द हो चुके है तो सिर्फ एक step/chance ऐसा भी जरूर लीजिये कि जो जिंदगी को बदलकर रख दे। आपका यह अंतिम कदम बिलकुल सोच-समझकर होना चाहिए ,लेकिन एक बार एक कदम जरूर उठाईये और अपनी सोच की सीमा से बाहर निकलिए और सोच का दायरा इतना बड़ा कीजिये कि सफलता की ही तरफ जाता हो।


लेकिन जरा संभलकर 



लेकिन जरा संभलकर ,कही किसी बहकावे में मत आ जाना कि सीमाओं से बाहर निकलो हर तरफ सफलता ही मिलेगी क्योंकि सभी रास्ते सफलता की ही तरफ नहीं जाते। जैसा कि आप ऊपर वाली पिक्चर में देख ही रहे है, अगर इस गेम में किसी भी और side zero डालते तो जीत न मिलती।

यह भी पढ़े : एक चुटकला जो जिंदगी जीना सीखा दे (One Inspirational Joke)

सीमाओं से बाहर निकलने का यह मतलब नहीं कि हर तरफ opportunities ही है। रास्ते बहुत है ,लेकिन सफलता उसे ही मिलेगी जिसके पास ज्ञान होगा और अपने ज्ञान का सही-सही इस्तेमाल करके सही रास्ता चुनेगा । जो सीमाओं से बाहर तो निकलेगा ,लेकिन गलत राह में नहीं फंसेगा। यह बात हमारी ज़िन्दगी के हर एक पहलू पर लागू होती है। कुछ ऐसा ही हमारे culture के साथ भी है ,लोग कहते है कि अब modern जमाना है कल्चर-वल्चर छोड़ो और अपनी सोच की सीमाओं से बाहर निकलो। लेकिन अगर सीमाओं से बाहर भी निकलना है तो एक दिशा होनी चाहिए जिससे सही रास्ते पर ही चला जा सके ,अगर कोई सीमाओं के किसी भी छोर पर चलने की सोचेगा तो फिर वह सफलता तो क्या ,कुछ भी नहीं प्राप्त कर सकेगा।






इसलिए दोस्तों सोचिये ,बड़ा सोचिये ,सोच की सीमाओं से भी बाहर आकर सोचिये ,लेकिन अपना रास्ता मत खो देना। अगर सीमाओं से बाहर आना है तो Gyan को भी बढ़ाना होगा ,कुछ अलग लेकिन सही सोचना होगा ,तभी सफलता मिलेगी। 


यह भी पढ़े : राजमहल या फिर जेल (Kingdom Or Prison)

दोस्तों आपको यह पोस्ट गेम ,सोच और सफलता (Game, Thinking & Success) कैसी लगी ,comment करके हमें जरूर बताये।


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