रविवार, 15 जनवरी 2017

हम क्या लेकर आये थे और क्या लेकर जाएंगे ? (What We Will Carry With Us When We Go)





हम क्या लेकर आये थे और क्या लेकर जाएंगे ? , दोस्तों ऐसा तो आपने बहुत बार सुना ही होगा और सभी कहते है , हम न कुछ लेकर आये थे और न ही कुछ लेकर जाना है। सभी यही सोचेंगे कि जब हम पैदा हुए थे कुछ नहीं लेकर आये थे और जब मरेंगे तब कुछ लेकर भी नहीं जा सकते। क्योंकि अगर किसी ने जन्म लिया है तो उसका मरन भी निश्चित है।



लेकिन अगर हम गहराई से सोचे तो हम कुछ लेकर आये भी थे और बहुत कुछ लेकर जाएंगे भी। जब पैदा हुए थे ,तब हमारे पास एक दिल था, लेकिन जब जाएंगे ,तब कुछ लेकर जाएंगे या नहीं ,यह हमारे ऊपर depend करता है।



अगर हम सच्चे स्वभाव के रहेंगे और दूसरों की मदद करते रहेंगे  तो फिर जब जाएंगे तो सैंकड़ो, हज़ारो दिल लेकर भी जा सकते है ,लेकिन अगर दूसरों का हमेशा बुरा चाहते रहेंगे तो फिर कुछ भी  नहीं लेकर जा सकते ,बुरे कर्मों के इलावा।



दोस्तों, अक्सर सभी कहते है कि दुनिया मोह/माया है ,यह दुनिया सब झूठ है ,जो भी हम देखते है सिर्फ छलावा है ,हक़ीक़त में यह कुछ भी नहीं ,लेकिन क्या यह सच है ? अगर दुनिया सच में ही मोह/माया है, सब कुछ झूठा है , तो फिर भगवान ने कर्म फल क्यों बनाया? क्योंकि कर्म तो अगले जन्मों में भी हमारे साथ ही रहते है और परलोक में भी हमारे साथ ही रहते है। फिर अगर यह दुनिया झूठ है तो झूठी वस्तु में कुछ सत्य कैसे ? इसका तो यही मतलब हुआ कि दुनिया सच ही है और हमारा मोह भी एक तरह से सच ही है।



इसे एक example के द्वारा समझते है -



मुझे एक सपना आया कि मेरी एक करोड़ रुपये की लाटरी (lottery) निकल गयी ,मुझे वह सब पैसे भी मिल गए और मैं बहुत ही अमीर हो गया। लेकिन जब मैं जागा तो ऐसा कुछ भी नहीं था और अगली रात सोते वक्त भी ऐसा कुछ नहीं हुआ। यानी कि सपना वही पर ख़तम और हक़ीक़त में कुछ भी न हुआ।



अब ऐसे ही दुनिया है ,अगर यह झूठ होती तो कर्म अगले जन्मों में फल कैसे देते ?अगर यह झूठी है तो कर्मों द्वारा परलोक कैसे अच्छा या बुरा हो सकता है ? यानी की दुनिया जो भी है ,कुछ न कुछ सच तो है ही। बस अब इसी सच को लेकर चलना है।



अब बात आती है क्या लेकर आये थे और क्या लेकर जाएंगे ? दोस्तों फिर से वही बात एक दिल लेकर आये थे और अनेकों दिल लेकर जा सकते है। सिर्फ हमे कर्म कुछ ऐसे करने है कि दूसरों का भला हो और वह हमे ज़िन्दगी भर याद रखे। अगर किसी का भला नहीं भी कर सकते ,तो कम-से-कम हमारे द्वारा किसी को कोई हानि भी न पहुंचे। अगर हमारे जाने के बाद भी दूसरे लोग हमे याद रखेंगे और हमारी अच्छाई के कारण दूसरों के साथ भी अच्छा करेंगे तो हमारे कर्मों का पेड़ ,हमारे जाने के बाद भी बढ़ता-फूलता रहेगा और इसका फल हमें परलोक और अगले जन्मों में भी मिलता रहेगा ।



इसलिए दोस्तों आगे से ऐसा कभी मत कहना कि न कुछ लेकर आये थे और न कुछ लेकर जाना है। हमें अपने कर्म ऐसे करने है कि जो हमें हमेशा के लिए दूसरों के दिलो में जिन्दा रख सके। जैसे शहीद भगत सिंह की ही बात कर लेते है ,छोटी सी उम्र में ही शहीद हो गए ,लेकिन वह कुछ ऐसा करके गए थे कि आज भी लोगों के होंसलो में जूनून भर देते है और सभी को भारतीयता का गर्व कराते है। जरूरी नहीं कि शहीदी से ही लोग हमे याद रख सकते है। महान सूफी संत बुल्लेह शाह जी को ही ले लीजिये ,जीवन उनका साधारण व्यक्ति से भी साधारण था ,लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ लिखा जिससे आज भी लोग उन्हें याद रखते है। उनका अलौकिक प्रेम आज भी हम सभी के लिए मिसाल है और उनकी रचनाये हमे आज भी प्रेम और भक्ति सीखाती है।इन्होंने अपना जीवन तो अपने  मुरशद के नाम कर दिया था लेकिन फिर भी इन्होंने जो लिखा हम सभी के लिए अमर साहित्य है।



तो दोस्तों बस ज़िन्दगी में कुछ ऐसा कीजिये कि ईश्वर हमे जब भी अपने पास बुलाये ,दुनिया छोड़ने के बाद भी हम लोगों के दिलो में जिन्दा रह सके क्योंकि मृत्यु तो एक-न-एक दिन सभी को आनी ही है ,यह भी शाश्वत सत्य है।



तो आगे से हमेशा यही सोचना कि हमे अब कितने दिल लेकर जाना है ,इस दुनिया में जब आये थे तब कर्मों के इलावा एक दिल लाये थे और उस दिल को कितने दिलों के साथ जोड़कर कितने दिल लेकर जाएंगे यह हम पर निर्भर करता है।क्योंकि न कुछ लेकर आये थे और न कुछ लेकर जाएंगे ,यह तो भौतिकवादी लोग ही कहते है ,हम पैसा ,जमीन वगैरह कुछ नहीं लेकर आये थे ,सिर्फ कर्मो द्वारा हमे अच्छा दिल प्राप्त हुआ है और अच्छे कर्मो के द्वारा सभी का भला करते हुए दिल जीतते जाने है। जो इस दुनिया से दिल जीतकर जाएंगे  ,वह अवश्य सद्गति ही प्राप्त करेंगे।



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मंगलवार, 10 जनवरी 2017

क्या जियो सिम इस्तेमाल करने के लिए बिल आएंगे (Is It True Jio Sending Bills For Using Welcome Offer)

दोस्तों , जब से Jio sim आया है, free offers के चलते यह काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रतिद्वंदी companies भी अपने एक-से-एक सस्ते plans launch करते जा रहे है ताकि Jio को टक्कर दे सके। जिसके चलते Airtel , Vodafone , BSNL , Idea आदि coampnies भी आकर्षक प्लान्स दे रहे है, ताकि वह भी market में अपनी पकड़ बनाये रख सके।



लेकिन क्योंकि Jio तो पूरी तरह से free है तो इसको लेकर काफी तरह की अफवाहे भी आ रही है। Social Media पर इसके bill को लेकर भी बहुत images share हो रही है और काफी लोग परेशानी में भी है कि Jio Sim इतनी देर से इस्तेमाल कर रहे है कही उन्हें भी न बिल आ जाए।  तो क्या इनका यह डर सही है अथवा नहीं ? क्या jio सच में अपने ग्राहकों को बिल भेजेगा ? इस बारे में पूरी जानकारी आप पढ़िए।

क्या जियो सच में बिल भेजेगा 


अब बात यह आती है कि social media पर इतना कुछ share हो रहा है jio bills भेजे जाने को लेकर ,तो क्या सच में जिओ बिल भेजेगा या नहीं।








 जियो के किसी भी customer को बिल नहीं आएंगे ,यह एक proper company है और कोई भी rule बिना किसी सार्वजनिक सूचना के कभी भी नहीं बदल सकती।  इसलिए किसी को भी कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है।



अगर फिर भी आपको चिंता रहे तो एक बात जान लीजिये तो तरह के sim connection होते है ,Prepaid और Postpaid . Prepaid यानी की जिस में recharge कराना पड़ता है तभी इसका इस्तेमाल कर सकते है और दूसरे Postpaid जिसका बिल आता है। अगर आपका Prepaid Connection है  फिर तो बिलकुल  ही न चिंता कीजिये क्योंकि Prepaid का कभी भी bill आ ही नहीं सकता।


Jio Sim प्रीपेड है या पोस्टपेड कैसे पता करे 


दोस्तों अब सवाल यह आता है कि जो आपके पास जिओ सिम है वह prepaid है या फिर postpaid यह कैसे पता करे। क्योंकि आपने तो सिम लिया है और मुफ्त था जो मिल गया ले लिया। पर अब पता कैसे करे की प्रीपेड है या फिर पोस्टपेड। 


Step 1: इसके लिए आप सबसे पहले MyJio app open कीजिये।


Step 2 : App open करने के बाद MyJio Open कीजिय।


Step 3 : फिर Skip Sign In ,उसके बाद top left corner पर click कीजिये।


Step 4 : फिर My Plans पर click  करने के बाद check करलीजिये की आपका connection Prepiad है या Postpaid .




 दोस्तों अब आप समझ गए होंगे की Jio का connection कौनसा है , कैसे पता  कर सकते है। अंत में  इतना ही ,चाहे आपका सिम prepaid हो या फिर postpaid, tension लेने की जरूरत नहीं ,आपको कोई भी bill नही आएगा ,अगर कभी company अपने नियम बदलती है तो आपको उसकी जानकारी company द्वारा अवश्य दी जाएगी।


अगर अभी भी कोई सवाल हो और आप कुछ पूछना चाहते है तो comment करके पूछ सकते है।


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गुरुवार, 5 जनवरी 2017

भगवान के दर्शन (Bhagwan Ke Darshan)


दोस्तों,  जो भी मनुष्य ईश्वर को मानता है , वह अक्सर सोचता है कि , "काश ,मुझे एक बार भगवान के दर्शन हो जाए ,सिर्फ एकबार अपने इष्ट को देखना चाहता हूँ। " ऐसी भावना हर एक के मन में होती ही है जिनकी भी ईश्वर में अटूट श्रद्धा है। आपके मन में भी होती ही होगी।



लेकिन क्या यह इच्छा पूरी होती है ? अधिकतर तो सोचते है कि ईश्वर तो दर्शन देंगे ही नहीं। जीते जी उनके दर्शन हमे हो ही नहीं सकते। पर क्या यह पूर्णतः सच है ? नहीं। ईश्वर के दर्शन भी लोगों को हो सकते है और होते भी है ,सिर्फ देखने के लिए आँखें  होनी चाहिए।



अब बात आती है आँखों की ,आँखें तो सभी मनुष्यों के पास है ही। आँखों के इलावा अन्य कौनसी आँखें हो? तो जवाब है मन की आँखें और सच्चाई की आँखें।






शायद यह उत्तर आपने बहुत बार सुना होगा ,लेकिन इसको गहराई से कईयो ने ही समझा होगा। अब सच्चाई की आँखों में ऐसा क्या है? ,जबकि वह तो सचाई है ,न कि कोई आँखें। आँखें और सच्चाई दो अलग-अलग चीजे है।



तो दोस्तों पहले एक कहावत पर ध्यान देते है -



"हाथी के दांत दिखाने के और ,खाने के और। "



यह शायद आपने सुना ही होगा ,यानी कि हाथी जो दांत दिखाता है उनसे खाता नहीं ,और जिनसे खाता है उन्हें दिखता नहीं।



वैसे तो यह कहावत नकारात्मक सोच को दर्शाती है ,लेकिन कई बार नकारात्मक भी सकारात्मक बन जाती है।



कुछ ऐसा ही हमारी आँखों के साथ है, इस कहावत को पढ़िए -



"मनुष्य की आँखें दुनिया के लिए और , ईश्वर के लिए और। "



 
अब इस कहावत को deeply सोचिये । यानी कि मनुष्य दुनिया को जिस आँखों से देखता है उसी आँखों से ईश्वर को नहीं देख सकता। शरीर वाली आँखें सिर्फ दुनिया देखने के लिए या फिर दुनिया वालों को दिखाने के लिए ही है। लेकिन अगर भगवान के दर्शन करने है तो इसके लिए भीतर की आँखें चाहिए। भीतर की आँखों में से एक आँख सच्चाई की भी है। लेकिन अजब तो देखिये ,हाथी को तो उसके दोनों यानी की दिखाने वाले और खाने वाले ,दोनों ही दांतो का पता होता है। लेकिन मनुष्य को अपनी भीतरी आँखों का पता ही नहीं और न ही इन आँखों को कोई भी वैज्ञानिक पता लगा सकता है।



तो इन आँखों से ईश्वर को कैसे देखे। इसके बारे में कबीर जी का एक बहुत दोहा है -




"साँच बराबर तप नहीं , झूठ बराबर पाप। 
  जाके हिरदय साँच है , ताके हिरदय आप।"




अर्थ :
कबीर जी कहते है कि सच के बराबर अन्य तपस्या कोई  नहीं है ,सच की तपस्या सबसे बड़ी और सबसे कठिन है और झूठ के बराबर अन्य कोई पाप नहीं है।
जिनके हृदय में सच है और जो लोग हमेशा सच बोलते है उनके ह्रदय में ही आप यानी की उनके ह्रदय में ही भगवान है।



भाव:
दोस्तों अब  इस दोहे को भीतर से समझते है कि सच को सबसे कठिन तपस्या क्यों कहा है ? जैसे ,अगर कोई चोर है और वह कह दे कि मैंने चोरी की है ,तो उसे मालुम है कि उसे सजा मिलेगी और इसी डर से वह सच नहीं बोलेगा।



बच्चा भी तभी झूठ बोलता है जब उसे डर होता है कि उसने कोई गलती की है तो उसे सजा मिलेगी।



यानी की झूठ वह ही बोलता है जो गलती करता है और उसके मन में डर भी रहता है कि कही उसका झूठ पकड़ा न जाए।



तो इसका मतलब यह हुआ कि जो हमेशा सच बोलता है वह गलतियों नहीं करता। यह नहीं की वह बिलकुल ही गलती नहीं करता ,अगर कभी वह कुछ गलत कर भी दे तो उसे अपनी गलती का एहसास  होता है और सच बोलकर उसके लिए क्षमा भी मांगता है। जो सच बोलते है उनके दिल हमेशा साफ़ रहते है और किसी से उन्हें कोई वैर-विरोध नहीं होता।



अब बात करते है कि झूठ सबसे बड़ा पाप क्यों है?

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झूठ बोलना यानी की धोखा देना। अगर कोई किसी का दुश्मन है तो उसे तो मालुम ही होगा वह उसे क्षति पहुंचाएगा। लेकिन जब कोई अपना ,जिसपर हमें पूरी तरह से भरोसा होता है अगर वह हमसे झूठ बोले तो यह सबसे बड़ा पाप हुआ क्योंकि उसपर हमे पूरी तरह से विश्वास था और कभी भी नहीं सोच सकते थे कि हमारा अपना ही हमारे साथ इस प्रकार करेगा। इसलिए दुश्मन अगर हमे हानि पहुंचाए तो यह तो सीधी-सी बात है कि वह ऐसा करेगा ही लेकिन अगर कोई करीबी ऐसा करे और हमसे झूठ बोले, तो यह उसके लिए सबसे बड़ा पाप हुआ।



इसलिए ही कबीर जी ने कहा है कि जो सच्चे लोग होते है ,जिनके हृदय  में सच हो और मन साफ़ हो उनके ही हृदय में भगवान होते है।



तो दोस्तों अब आप समझ गए होंगे कि सच सबसे बड़ी तपस्या क्यों है और झूठ से बढ़कर अन्य कोई पाप नहीं। इसलिए हमे हमेशा सच बोलना चाहिए क्योंकि सच बोलने वालो के दिल हमेशा साफ़ होते है और यह सबसे बड़ी तपस्या भी है। और हमे झूठ से हमेशा दूर रहना चाहिए क्योंकि इससे बड़ा पाप कोई नहीं है।

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यहाँ तक तो हो गयी दोहे की बात।



अब यह हृदय आँखों का काम कैसे करता है। कैसे हम सच्चाई और मन के द्वारा ईश्वर के दर्शन कर सकते है ?






तो दोस्तों ,इसका उत्तर है ,जो सच्चे होते है और जिनके मन साफ़ होते है ,उन्हें भगवान के दर्शन अपने आप ही हो जाते है और ऐसे लोग प्रत्यक्ष रूप से न सही लेकिन उनका मन यह जरूर जानता होता है कि उनके इष्ट उनके साथ है और उन्हें अपने मन में सदैव ही अपने इष्ट के दर्शन होते है।



दोस्तों अगर आप GyanPunji के regular reader है तब तो आप यह कहानी अच्छे से समझ गए होंगे ,लेकिन अगर आप GyanPunji पर ईश्वर दर्शन या कर्मों पर यह पहली कहानी पढ़ रहे है तो यह अन्य कुछ कहानियां भी जरूर पढ़े ,फिर आप इस article को अच्छे-से समझ जाएंगे।



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गुरुवार, 29 दिसंबर 2016

साधु का अजीब उत्तर (Saadhu's Strange Answer)

"HINDI  INSPIRATIONAL  STORY  ON  HOW  TO  LEAVE  BAD  HABITS"

मुकेश नाम का व्यक्ति था। वह वैसे तो बहुत ही अच्छा व्यक्ति था लेकिन उसमे एक ही बुरी आदत थी कि वह cigarette बहुत पीता था। उसके बीवी और बच्चे भी उसे बहुत समझाते और वह खुद भी सिगरेट से होने वाले नुकसानों के बारे में जानता था, लेकिन वह अपनी इस बुरी आदत को छोड़ नहीं पा रहा था।



उनके गाँव में एक साधू आये जो लोगों की सब समस्याओं का समाधान बहुत ही सरलता से कर देते थे।



मुकेश भी उन साधू बाबा जी के दर्शन करने के लिए गया और अपनी समस्या उन्हें बतायी। वह बोला साधू महाराज, "वैसे तो ईश्वर की कृपा मुझपर बहुत है और न ही कभी गलत संगत में गया हूँ, बस दिक्कत है तो सिर्फ इतनी की मैं cigarette नहीं छोड़ पा रहा हूँ। मैंने बहुत प्रयास किया कि सिगरेट पीनी छोड़ दूं लेकिन सिगरेट पीने की आदत मुझे जकड़े हुए है ,मैं चाहकर भी इस आदत को छोड़ नहीं पा रहा। जबकि मैं इससे होने वाले नुक्सान भी जानता हूँ और मुझे यह भी मालुम है कि सिगरेट सिर्फ मेरे लिए ही नहीं बल्कि मेरी बीवी और मेरे बच्चों की भी सेहत खराब करती है। लेकिन यह आदत मुझे पकड़े हुए है। कृपा करके कुछ समाधान बताईये की मैं इससे छुटकारा पा सकूँ।"



साधू बाबा बोले, "बेटा, मैं तुम्हारी परेशानी समझ गया, लेकिन तुम मेरे पास कल सुबह आना तब मैं तुम्हारी समस्या का समाधान कर दूंगा।"




मुकेश अगले दिन सुबह साधू जी के पास गया और देखा कि साधू बाबा भोजन करने के बाद भी अपनी भोजन की थाली के पास ही बैठे हुए है और उन्होंने अपने मुंह में चम्मच डालके रखा हुआ है। मुकेश ने साधू जी को प्रणाम किया और साधू जी अपने मुंह में चम्मच डाले हुए ही बोले, "आओ वत्स"। मुँह में चम्मच था ,इसलिए वह सही तरह से नहीं बोल सके। मुकेश कुछ देर वही पर बैठा रहा ,लेकिन साधू को ऐसे देखकर उसे काफी हैरानी हुई । आखिर उसने साधू जी के एक शिष्य से पूछ ही लिया कि ,"साधू बाबा मुँह में ऐसे चम्मच लेकर क्यों बैठे हुए है।"

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शिष्य बोला, "इन्होंने नहीं चम्मच मुँह में डाला बल्कि चम्मच इनके मुँह में आया हुआ है और मुँह में से बाहर निकलने का नाम ही नहीं ले रहा।"


मुकेश एकदम हैरानी से बोला, "यह कैसे, आप क्या कह रहे है।"



शिष्य बोला, "दरअसल बात यह है कि गुरु जी रोज भोजन करते है और चम्मच भी उनके मुँह में जाता है और आज भी जब गुरु जी भोजन करने के लिए बैठे और चम्मच से खा रहे थे तो बाद में इनके मुँह में से चम्मच अभी तक निकल ही नहीं और उनके मुँह में ही रह गया।"



मुकेश को शिष्य का उत्तर भी बहुत अजीब लगा। लेकिन फिर भी वो तो साधू और शिष्य थे, वह उन्हें क्या कहता? और साधू जी के सामने ही बैठा रहा।


आखिर जब बहुत समय हो गया, मुकेश साधू जी के करीब जाकर फिर से बोला, "महाराज, आपने आज मुझे मेरी समस्या का हल बताना था। कृपा करके बताईये।"


साधू मुँह में चम्मच लिए हुए ही बोले, " बेटा, मैं अभी तुम्हे ठीक तरह से समझा नहीं सकता क्योंकि यह चम्मच मेरे मुँह में से निकल ही नहीं रहा और जब तक निकल नहीं जाता तब तक अच्छे से तुम्हे समझा नहीं पाऊंगा।"


मुकेश साधू जी से बोला, "महाराज, क्यों मज़ाक करते है मेरे साथ। एक छोटी-सी समस्या आपके पास लेकर आया और आप बहाने ही बनाये जा रहे है। यह एक चम्मच है,जिसे आपने अपने मुँह में डालकर रखा हुआ है, यह कोई जीवित वस्तु थोड़े न है जो आप पर control कर सके। अगर आपने नहीं जवाब देना था, तो पहले ही बता देते।"



साधू बोले , "बेटा , तुम देख ही रहे हो ,यह चम्मच मेरे मुँह में ही है ,मैं रोज भोजन करते वक्त इसी चम्मच का इस्तेमाल करता हूँ ,लेकिन अब आज यह मेरे मुँह में से निकल ही नहीं रहा। "




अब मुकेश को और भी अधिक गुस्सा आने लगा और साधू जी से बोला, "आपके बारे में सुन तो बहुत रखा था कि सभी समस्याओं का समाधान आपके पास है लेकिन आज देख लिया कि कैसे साधू है आप ? दूसरे लोगों को बेवकूफ समझते होंगे आप ,लेकिन मैं नहीं हूँ। कोई भी वस्तु किसी इंसान को वश में नहीं कर सकती ,इतना तो अच्छे से जानता हूँ। बस बहुत हो गया आपका खेल।" और भी न जाने गुस्से में क्या-क्या बोल दिया साधू महाराज को।



अब साधू जी अपने मुँह में से चम्मच निकालकर बोले, "बेटा, इतनी देर से मैं भी तो तुम्हे यही समझाने की कोशिश कर रहा हूँ कि जो समस्या तुम मेरे पास लेकर आए वह भी एक वस्तु है, cigarette अपने आप नहीं तुम्हारे मुँह में जाती, बल्कि तुम इसे लेकर अपने मुँह में डालते हो तभी यह तुम्हारे मुँह में आती है, नहीं तो अपने आप नहीं आ सकती। इस आदत को तुमने पाल रखा है ,यह कोई जीवित वस्तु नहीं जो तुम्हे वश में कर सके बल्कि तुम्हारी ही सोच और तुम्हारी ही आदत तुम पर हावी हो रही है और तुमने ही इसे जीवित की तरह बना दिया है एक अजीव को।"

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मुकेश को अब बहुत शर्मिंदगी महसूस हो रही थी क्योंकि वह अब सब समझ चूका था और उसने साधू जी के सही से बर्ताव भी नहीं किया और उन्हें बहुत बुरा बोला था। उनकी सारी बात अब मुकेश की समझ आ चुकी थी । मुकेश ने अब साधू महाराज जी से क्षमा भी मांगी और उनका धन्यवाद भी किया कि उन्होंने उसे सही रास्ता दिखाया।



दोस्तों ऐसा ही कुछ हमारे साथ भी होता है, हम कहते है कि हमारी आदत हमे जकड़े हुए है क्योंकि हम रोज-रोज जो बुरे काम करने लग जाते है और बाद में वह हमारे रोज के काम बनकर हमारी आदत बन जाते है और हम कहते है कि यह मेरी आदत बन चुकी है और मैं अपनी इस बुरी आदत को छोड़ना चाहता भी हूँ लेकिन आदत मुझे नहीं छोड़ रही।



लेकिन क्या असल में किसी भी आदत में, जिसमे कोई प्राण भी नहीं, उसमे इतनी शक्ति है कि हम पर काबू कर सके? क्या हम इतने कमजोर हो जाते है कि अपनी एक आदत के वश में होकर हम आने घुटने टेक दे?



नहीं दोस्तों, ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि असल में हमारी कोई भी बुरी आदत हमारी ही बनाई हुई है ,उसमे अपनी कोई भी जान नहीं कि हम पर काबू कर सके। यह तो बस हमारी ही कमजोरी है कि हम अपनी आदत को अपने पर हावी होने देते है। याद रखिए हम मनुष्य है, ईश्वर की बनायी हुयी ऐसी संरचना जो हर एक काम करने में सक्षम है तो फिर हम इतने कमजोर तो हो नहीं सकते कि अपने एक बुरी या फिर अपनी कुछ बुरी आदतों को छोड़कर अच्छे न बन सके।



बुरी आदतों को छोड़ने के लिए हमे कुछ अधिक नहीं बस सिर्फ इतना-क करना है कि अपना संकल्प दृढ़ रखना है और हमेशा अपनी सोच को अपने ही वश में करके रखना है।



जब ऐसा करलेंगे तो ऐसी कोई बुरी आदत नहीं जो हमपर काबू पा सके क्योंकि आदते अजीव है लेकिन वह हमारी सोच के कारण ही जीवित की तरह हमपर काबू करती है, इसलिए ऐसी आदतों को दृढ़ निश्चय करके हमे छोड़ देना चाहिए।



तो दोस्तों आपको यह कहानी साधु का अजीब उत्तर (Saadhu's Strange Answer) जोकि बुरी आदतों को कैसे छोड़े (How To Leave Bad Habits In Hindi) पर लिखी हुयी है कैसी लगी हमे comment करके जरूर बताये।



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रविवार, 18 दिसंबर 2016

सुख और दुःख का मूल कारण (Root Cause Of Happiness & Saddness In Hindi)

HINDI INSPIRATIONAL STORY




आज के समय में अधिकतर हम सभी लोग दुखी रहते है। ऐसा शायद ही कोई व्यक्ति हो जो दुखी न हो। हर एक व्यक्ति को किसी-न-किसी का बात का दुःख (sorrow) है ही। लेकिन क्या किसी ने सोचा है कि दुःख आखिर है क्या? सिर्फ इतना कि जब हमे ख़ुशी (Happiness) की प्राप्ति नहीं होती और कुछ ऐसा काम या कोई ऐसी बात हो जाए तो उससे हमे जो अनुभूति(Feeling) होती है तो उसे हम दुःख का नाम दे देते है।

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तो इसका मतलब की जो हमने सोचा नहीं (we never thought), ऐसी बात जब हो जाए तो दुःख होता है। अब अगर हम हमारी अनुभूति को ही विस्तार में लेकर जाए तो सुख भी तो एक अनुभूति ही है।



मान लेते है मुझे Games खेलने के लिए Best SmartPhone की जरूरत है, अगर मुझे कोई अचानक सबसे बढ़िया मोबाइल तोहफे (Surprise Mobile Gift) में दे दे तो इससे मुझे ख़ुशी की प्राप्ति होगी। इसका मतलब अगर गहराई से सोचा जाए तो मेरी ख़ुशी सिर्फ एक भौतिक वस्तु (material thing) पर निर्भर करती है और तो और इससे मुझे कोई फायदा (Benefit) भी नहीं मिलेगा क्योंकि Games खेलने से आँखें खराब होंगी (eyesight weak) और दूसरी बात अपना कीमती समय (precious time) जिसमे मैं बहुत कुछ सीख सकता था उसे मैं सिर्फ Games खेलने में बर्बाद कर दूंगा। यानी की इससे मुझे नुक्सान ही होगा लेकिन फिर भी मुझे इसमें ख़ुशी को प्राप्ति हो रही है क्योंकि मेरी ख़ुशी Games में है चाहे मुझे इससे नुक्सान (Loss) ही क्यों न हो।



तो अब बात clear हो गयी कि मेरी ख़ुशी सिर्फ भौतिक चीज पर निर्भर (happiness depends on material things) करती है।




अब दुःख की भी बात कर लेते है कि दुःख किस बात पर निर्भर करता है। ऐसी क्या अनुभूति है जो हमे दुःख देती है।



मान लेते है मैं बाजार से ₹200 का एक गुलदस्ता (Bouqet) लाया अपने कमरे में सजाने के लिए और उसी दिन ही ₹50 का एक मटका (Water Pot) ले लिया पानी भरने के लिए।



अब गुलदस्ते में तो फूल (Flowers) थे और 2दिन बाद वह मुरझा (wither) गए लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं पड़ा क्योंकि मैं जानता था कि फूल है यह तो मुर्झायेंगे ही, पर मटका खरीदने के 4 दिन बाद वह मुझसे गलती से गिरकर टूट गया,तब मुझे बहुत दुःख हुआ कि मेरे 50रूपये व्यर्थ (waste) चले गए और मेरा नुक्सान (Loss Of Money) हो गया।



अब इस बात की गहराई को देखा जाए तो इसमें क्या था? जब गुलदस्ता ख़रीदा तब मैं जानता था कि फूल है मुरझा ही जायेंगे चाहे इनकी कीमत अधिक थी (more costly) लेकिन फिर भी मैंने खरीदा, पर जब मैंने मटका ख़रीदा जिसकी कीमत 50रुपये थी यानी कि गुलदस्ते की कीमत का चौथा हिस्सा (one fourth price) तब मैंने सोचा कि 6महीने या साल तक तो चल ही जाएगा। लेकिन जब वह 4दिनों में ही टूट (break) गया तो मुझे दुःख हुआ।



अब बात फिरसे करते है कि दुःख आखिर है क्या? तो दोस्तों मेरा दुःख सिर्फ मेरी सोच (thoughts) या फिर मेरी इच्छा (wish) पर निर्भर (depend) है और मेरी ख़ुशी भी मेरी सोच या मेरी इच्छा पर निर्भर है। क्योंकि मुझे मालूम था और मेरी सोच थी कि गुलदस्ता एक या दो दिन ही चलेगा और वह मुरझा गया तब मुझे कोई दुःख नहीं हुआ लेकिन मटके वक्त मेरी सोच इससे कही अधिक थी और वह मेरी सोच के अनुसार न चल सका और उससे पहले ही टूट गया और मुझे दुःख हुआ। इसमें मेरी ख़ुशी या मेरे दुःख का relation कीमत से न था बल्कि यह सब मेरी सोच थी।






मेरी जो अनुभूति (Feelings) है वही सुख और दुःख का कारण है, चाहे उसमे वास्तविकता (reality) या फिर यूं कहें उससे मुझे कोई फायदा हो या न हो या फिर नुक्सान ही क्यों न हो, सिर्फ मुझे मेरी सोच तक ही या इससे कुछ अधिक मिल जाए तो वह मुझे ख़ुशी देगी लेकिन अगर कुछ मेरी सोच से कम हो तो वह मुझे दुःख देगा।



अब उपरोक्त लिखा कि चाहे कोई फायदा हो या न हो, और चाहे नुक्सान ही क्यों न हो ,तो ऐसी चीज अगर मेरी सोच से बढ़कर मिल जाए तो ख़ुशी। अब ख़ुशी को एक अच्छे से SmartPhone में Games खेलने से जोड़ा था और Games खेलने से जो नुक्सान होगा वह भी ऊपर बताया तो मैं इस नुक्सान पर भी ध्यान नहीं दे रहा सिर्फ जो मेरी सोच के अंदर या इससे बढ़कर हुआ वही ख़ुशी है। और जो सोच से कम हुआ वही दुःख।



तो दोस्तों अब आप समझ गए होंगे कि सुख और दुःख क्या है? यह असल में वास्तविकता या फिर किसी फायदे या नुक्सान से नहीं बल्कि मेरी सोच से उत्पन्न मेरे भाव है। क्योंकि अगर असल ख़ुशी होती तो वह कभी भी भौतिकता में नहीं होती और न ही असल दुःख कभी भौतिकता में होता है।




दोस्तों, यहाँ सुख और दुःख की बात तो हो गई जो सिर्फ हमारी सोच पर निर्भर करती है और यह सिर्फ भौतिक ही सुख-दुख है। अब यह भी जान ले कि आतंरिक सुख और दुःख क्या होता है? इसके बारे में विस्तृत वर्णन की भी Post आप जल्द ही पढ़ेंगे लेकिन इतना जान लीजिए जिस भी किसी काम को करने या किसी काम के होने से आत्मा को ख़ुशी मिले वही असल सुख होता है और जो आत्मा को दुःख मिले वही असल दुःख। ऐसे सुख या दुःख उन्ही को होते है जिनके मन साफ़ होते है और किसी भी तरह का उनमे विकार नहीं होता। वैसे तो ऐसे महात्माओं के लिए सुख और दुःख कुछ भी नहीं, वह सभी प्रकार की स्थिति में समताभाव ही धारण रखते है लेकिन फिर भी उनमे जो हर एक प्राणी के लिए प्रेम होता है,उससे उनको सुख या दुःख की अनुभूति होती है जिसमे उनका कोई भी स्वार्थ नहीं होता। ऐसी ख़ुशी या ऐसा दुःख सीधा आत्मा को भी होता है ,जिसमे स्वार्थ भाव न हो।



(Note: बिना वजह फूल भी नहीं तोड़ने चाहिए न ही ऐसे गुलदस्ते खरीदने चाहिए, क्योंकि सुंदरता नष्ट करने से नहीं बढ़ती बल्कि सँभालने से बढ़ती है। यह सिर्फ एक example के तौर पर बताया गया ताकि यह article आसानी से समझ आ सके।)



तो दोस्तों आपको यह article सुख और दुःख का मूल कारण (Root Cause Of Happiness & Saddness In Hindi) कैसा लगा? अगर आपका इसके बारे में कोई भी सवाल है तो आप comment करके पूछ सकते है।



दोस्तों अगर आपको यह आर्टिकल पसन्द आया तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूले और आपके सुझाव हमारे लिए अमूल्य है।


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असली सौंदर्य (Real Beauty)


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गुरुवार, 8 दिसंबर 2016

क्रोध करने से होने वाले नुक्सान और फायदे (DisAdvantages & Advantages Of Anger)

दोस्तों आज इस Post में आप क्रोध करने के फायदे और नुक्सान (Merits & Demerits Of Anger) के बारे में जानेंगे। वैसे क्या क्रोध करने का कोई फायदा भी हो सकता है? ऐसा title पढ़कर ही कईयो की तो हँसी छूट जायेगी कि अब क्रोध करने के भी फायदे कब से होने लग गए ? लेकिन क्रोध करने के अगर नुक्सान है तो इसके कुछ फायदे भी है। लेकिन आप इसके फायदों को सही ढंग से तभी समझ पाएंगे अगर आप पूरी Post को ध्यान से पढ़ेंगे।

क्रोध करने से होने वाले नुक्सान (DisAdvantages Of Anger In Hindi)




आईये पहले क्रोध करने से होने वाले  नुकसानों के बारे में जान ले-



क्रोध करने के तो बहुत सारे नुकसान है,शायद आप कई नुकसानों को जानते भी हो, लेकिन फिर भी आईये कुछ नुकसानों के बारे में विस्तार से जान ले।


बुद्धि का नाश (Destroy Of Brain Power)



क्रोध बुद्धि का विनाश कर देता है। जब भी मनुष्य को तीव्र क्रोध आता है ,चाहे वह कितना भी समझदार क्यों न हो, उसकी बुद्धि उसका साथ नहीं दे पाती और वह कुछ ऐसा भी करने को आतुर हो जाता है,जो वह कभी सपने में भी भूलकर भी न सोच सकता हो। यानी की क्रोध सबसे भयंकर है। यह अच्छे-से-अच्छे व्यक्ति को भी दानव की तरह बना देता है। क्रोध के आवेश में आकर मनुष्य की बुद्धि का विनाश हो जाता है।


रिश्तों में कड़वाहट (Sourness In Relations)



क्रोध करने से इंसान की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है ,जिसके फलस्वरूप उसे यह नहीं ध्यान रहता कि वह क्या बोल रहा है? या फिर क्या कर रहा है? किसी की छोटी-सी गलती पर भी एकदम इंसान क्या-क्या कर जाए मालुम नहीं, जिससे करीबी रिश्ते भी टूट जाते है। कई बार तो क्रोध होता भी ऐसा है कि दूसरे ने गलती भी नहीं की होती बस गलतफहमी की वजह से शक हो जाता है और गुस्सा करके इंसान अपने सबसे करीबी को भी ऐसी-ऐसी बातें कह देता है जो वह सोचता भी न हो । इस प्रकार गुस्सा अच्छे से अच्छे रिश्तों में भी कड़वाहट पैदा कर देता है।


संपत्ति की बर्बादी (Destruction Of Property)







कुछ लोग क्या करते है कि गुस्सा किसी व्यक्ति पर आया होता है, लेकिन निकाल अपने किसी चीज पर देते है। जैसे कि किसी को phone पर किसी से किसी बात को लेकर साधारण सी भी लड़ाई हो गयी, तो कई लोग क्या करते है कि phone को दीवार में दे पटकेंगे।



अब आप ही सोचिये जरा कि चलो किसी पर गुस्सा आया तो आया ,लेकिन अपना ही phone दिवार में देकर पटकने से क्या मिल गया? या कुछ तो ऐसे भी होते है, जो भी हाथ में हो वही चीज तोड़ देंगे। मतलब नुक्सान तो उसने अपना ही किया। अपनी ही सम्पति का नुक्सान कर दिया। क्या यह सही है? गुस्सा किसी और पर और नुक्सान अपनी ही चीज का। इसलिए गुस्सा न ही करे तो ही बेहतर है क्योंकि यह बहुत ही हानिकारक है।


सबसे बड़ा नुक्सान, हमारा ही स्वास्थ्य खराब होता है (Biggest Loss, Our Own Health Deteriorated)



हम जब गुस्सा करते है, इससे हमारी ही सेहत खराब होती है। हमारे दिमाग की सोचने-समझने की शक्ति ख़त्म हो जाती है और शरीर में रक्त का बहाव भी तीव्र हो जाता है ,जिससे blood-pressure भी बढ़ जाता है, और दिमाग पर भी बोझ इतना अधिक हो जाता है कि हमारे शरीर की नाड़ियो पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और इससे लकवा भी हो सकता है।



जरा सोचिए दोस्तों कि गुस्सा करना सही है अथवा नहीं? कुछ समय का क्रोध या यूं कहें कुछ seconds का गुस्सा हमारी पूरी life भी बर्बाद कर सकता। गुस्सा हमे किसी अन्य व्यक्ति के कारण आया, लेकिन उसका नुक्सान तो हमें ही झेलना पड़ा। क्रोध करने से दूसरे व्यक्ति का क्या चला गया? हमने अपना ही नुक्सान किया। हमारी ही बुद्धि का नाश हुआ, रिश्तों में कड़वाहट पैदा हुई, हमने अपनी ही सम्पति को नष्ट किया और सबसे बड़ी बात कि हमने अपनी ही सेहत का नुक्सान किया। तो दोस्तों कभी भी गुस्से को अपने अंदर नहीं आने देना चाहिए क्योंकि यह बहुत ही नुकसानदायक है।



खैर अब बात आती है गुस्सा करने के फायदों की । वैसे तो गुस्सा करना नुकसानदायक ही है, लेकिन फिर भी जैसा को आपको कहा था कि गुस्सा करने के भी फायदे होते है तो फिर फायदे तो बताने ही पड़ेंगे। तो अब आप पढ़िए, लेकिन जरा ध्यान से पढ़ियेगा..... क्योंकि यह अति महत्वपूर्ण है कि इसको आप deeply समझ सके। गुस्से का वैसे सीधा-सीधा तो कोई benefit नहीं है लेकिन अगर आपका गुस्सा आपके control में है या फिर अगर आप control कर सकते है तो फिर इसका बहुत benefit आप ले सकते है। तो अब पढ़िए गुस्सा करने के फायदों के बारे में-


गुस्सा करने के फायदे (Benefits Of Anger In Hindi)



अब आप ध्यान से पढ़ियेगा इस रोचक तथ्य के बारे में कि गुस्सा करने के भी लाभ हो सकते है। क्योंकि आज तक जिसने भी कही पर भी पढ़ा या सुना होगा ,सिर्फ गुस्से से होने वाले नुकसानों के बारे में ही पढ़ा-सुना होगा। लेकिन आज आप GyanPunji पर गुस्से से होने वाले लाभ के बारे में भी जान सकेंगे। लेकिन याद रखियेगा इसका तभी फायदा है अगर आपका गुस्सा आपके काबू में है अन्यथा गुस्से करने से हानि ही होती है। अब पढ़िए इसके फायदों के बारे में -


किसी को सुधारने के लिए (For Improving Someone's Character/Habits)



गुस्सा वैसे तो बहुत खतरनाक है,इससे हमारा ही अधिक नुक्सान होता है न कि उसका जिसपर हम गुस्सा निकाल रहे हो। लेकिन कभी-कभी गुस्सा करना फायदा भी दे जाता है। लेकिन ऐसे गुस्से पर आपका पूरी तरह से control होना चाहिए। अगर आपका गुस्सा आपके नियंत्रण में है और आप जानते है कि आप क्या बोल रहे है,मतलब कि जो भी शब्द आप गुस्से में भी बोल रहे है ,अगर वह आपकी चेतना यानी की दिमाग पर नियंत्रण रखते हुए ही बोले जा रहे है तो इसका सबसे बड़ा फायदा दूसरों को समझाने के लिये किया जा सकता है।



अगर आप नहीं समझे तो एक example के द्वारा आप समझ जाएंगे।



मान लीजिए आपका कोई दोस्त है, आपका कोई करीबी मित्र जिससे आप बहुत प्रेम करते है, और उसपर आप कभी गुस्सा हो ही नहीं सकते। लेकिन अगर ऐसा मित्र किसी गलत संगत में या किसी गलत काम में पड़ जाता है और आपके द्वारा बार-बार प्रेम से समझाने पर भी वह न समझे तो आपको गुस्सा करने का प्रयत्न करना चाहिए। आपके मित्र को ऐसा लगे कि आप उसपर गुस्सा है, उसे गुस्से से समझाये ,प्रेम से नहीं। क्योंकि प्रेम से तो उसे समझ में नहीं आया। गुस्से में कुछ इस प्रकार समझाये कि उसे लगे आप बहुत गुस्से में है। गुस्सा करिये भी, लेकिन याद रखे आपका गुस्सा आपके नियंत्रण में ही हो। क्योंकि अगर आपका गुस्सा आपके नियंत्रण में है और आप भली-प्रकार से जानते है कि आप क्या बोल रहे है और जो बोलना चाहिए वही बोल रहे हो तो यह गुस्सा आपके दोस्त की जिंदगी बदल सकता है और आपकी भी क्योंकि वह अगर समझ जाए तो सही रास्ते पर आ जायेगा और आपका सबसे प्रिये मित्र भी आपके साथ ही रहेगा।



तो दोस्तों यह गुस्सा करने का सबसे बड़ा benefit है कि गुस्से को नियंत्रण में रखकर हम किसी को सुधार भी सकते हों।



अब जानते है गुस्सा करने का एक और फायदा-


मज़ाक में गुस्से को लेकर चले जाना



वैसे तो कभी भी गुस्सा मत कीजिये लेकिन मान लीजिए अगर आपको गुस्सा आ भी गया, लेकिन उसी वक्त आपको एहसास हो गया कि आप जो बोले गलत बोले है तो उस बात को उसी समय मज़ाक में टाल दीजिये।



अगर यह बात अभी भी नहीं समझे तो इसे भी एक example के द्वारा समझिये-



अगर कोई विवाहित है, मान लीजिए अगर उसे अपनी पत्नी पर किसी वजह से गुस्सा आ भी जाता है और गुस्से में अपशब्दो का प्रयोग करता है ,लेकिन उसी समय उसे अपनी गलती का एहसास हो जाए तो उस गुस्से को खत्म कीजिये और उस बात को मज़ाक में टाल दीजिये। अगर गुस्सा करने के बाद पत्नी कहे कि मैं मायके जा रही हूँ। तो आप उसे जाने दीजिए, रोकिये मत। बस इतना कहिये तुम मायके जाओ मैं भी अपने ससुराल जा रहा हूँ और बच्चों को उनके ननिहाल भेजने लगा हूँ। अगर ऐसा भी नहीं कह सकते तो एक काम करे, अपना और पत्नी का bag इकट्ठा या अलग-अलग बाँध ले और कहिये चलो चलते है तुम्हारे मायके😀।






बस फिर क्या हो जाइये आगे से मज़ाकिया mood में। गुस्सा करिये खत्म और शांत होने के बाद आराम से बात को सुलझा लीजिये या फिर वही की वही पर खत्म कर दीजिए। याद रखिये पति-पत्नी का रिश्ता जन्मों-जन्मों का होता है और किसी भी विवाहित का सबसे भरोसेमंद साथी उसका/उसकी पति/पत्नी ही है।



Note: वैसे तो कभी भी गुस्सा नहीं करना चाहिए, खासतौर पर पति-पत्नी को आपस में कभी नहीं होना चाहिए, लेकिन अगर कभी आ भी जाए तो उस बात को मज़ाक में ले जाकर उस गुस्से को वही पर खत्म कर देना सबसे बढ़िया है।



तो दोस्तों अब आप गुस्सा होने के कुछ फायदे तो समझ गए, situation के हिसाब से आप इससे भी अच्छी तरह से जान सकते है कि गुस्सा करने का आपको क्या benefit मिल सकता है।



दोस्तों, फिर से वही बात द्वारा से कहूंगा गुस्सा करना बहुत बुरी बात है,यह हमें भी नुक्सान देता है और दूसरे व्यक्ति को भी। लेकिन अगर आपका गुस्सा आपके control में है तो आप उसका फायदा भी ले सकते है। लेकिन अपने क्रोध को अपने पर हावि न होने दे और अपने दिमाग पर और शब्दों पर पूरा नियंत्रण रखें तभी आप क्रोध से भी फायदा ले सकते है।



दोस्तों उम्मीद करता हूँ इस article के द्वारा जो समझाने का प्रयास किया गया है,वह आप समझ गए होंगे। लेकिन अगर अभी भी इस article में अगर आपको कोई confusion है तो comment करके जरूर पूछ लीजियेगा क्योंकि गुस्सा होता तो हानिकारक ही है। दोस्तों अगर आपको यह article पसन्द आया तो हमें comment करके जरूर बताएं और अपने दोस्तों के साथ share करना न भूले।



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Essay On Anger in hindi 

बुधवार, 30 नवंबर 2016

क्या इन्टरनेट बैंकिंग सच में फायदेमंद है (Is Internet Banking Really Beneficial In Hindi)

दोस्तों यह तो सभी जानते है कि 8 नवम्बर, 2016 की रात से पुराने 500 और 1000 के नोट बन्द हो चुके है। 500 और 1000 रुपये के नोट बन्द होने के फायदे और नुक्सान भी आपने पढ़ ही लिए होंगे। अगर नहीं पढ़े तो पढ़ने के लिए click करे।



अब बात आती है कि सरकार की तरफ से एक और अभियान चलाया जा रहा है कि लोग अधिक से अधिक Online Banking का इस्तेमाल करे। जिससे सारी transactions पारदर्शी हो सके और government भरपूर revenue generate कर सके और देश की भलाई में इस पैसो को लगा सके।



खैर Online Banking है तो बढ़िया। अगर हम इसके फायदों को देखे तो बहुत ही बढ़िया है कि आसानी से कुछ clicks के द्वारा ही हम किसी भी व्यक्ति को भुगतान कर सकते है। लेकिन जैसे हर एक सिक्के के दो पहलु होते है वैसे ही online banking में भी दो ही पहलु है। अगर इसके फायदे है तो नुक्सान भी बहुत अधिक है। शायद इसके नुक्सान का अंदाजा अभी तक बहुत कम लोगो ने ही लगाया होगा। OnLine Banking के फायदे कम और नुक्सान अभी तो अधिक ही है। ऐसा क्यों लिखा कि नुक्सान अधिक है ,आप समझ जाएंगे पूरी Post पढ़ने के बाद। इसके नुक्सान जानने से पहले इसके फायदों के बारे में जान लेते है। अगर आप Benefits Of Online Banking in Hindi जानते भी है तो भी एक बार इसके benefits जरूर पढ़े क्योंकि तभी आप सही तरह से इसके नुकसानों के बारे में जान पाएंगे।



ऑनलाइन बैंकिंग के लाभ (Benefits Of Online Banking In Hindi)





आईये अब पहले Online Banking के Benefits के बारे में जान ले-

Online Passbook Check



Online Banking के जरिये कोई भी, कही पर भी बैठकर, बिना बैंक जाए अपनी पासबुक चेक कर सकता है यानी कि खाते में कितनी रकम बची है ,यह कही पर भी बैठकर check कर सकते है।

Funds Transfer


अगर Online Banking का इस्तेमाल कर रहे है तो आसानी से किसी भी खाते में भी पैसो का भुगतान कर सकते है। इसमें यह जरूरी नहीं कि Bank same ही हो। आप किसी भी Bank से किसी भी Bank में Money Transfer कर सकते है।

Bills Pay


Bill Pay करने के लिए पहले लंबी-लंबी कतारों में लगना पड़ता था लेकिन अब घर बैठे ही बहुत से bills का भुगतान किया जा सकता है।

ATM Card Block


अगर आपको लगे कि आपके ATM के साथ कोई छेड़-छाड़ हुयी है या फिर कोई आशंका हो कि आपके ATM का कोई अन्य दुरूपयोग कर सकता है तो आपको ATM card को जल्द-से-जल्द Block करा देना चाहिए। ऐसा internet banking के जरिये आप कुछ clicks में ही कर सकते है।

Cheque Book Request


अगर आप cheque का इस्तेमाल करते है और आपकी cheque book ख़तम हो रही है तो आप online banking के जरिये भी cheque book लेने के लिए रिक्वेस्ट भर सकते है।

Recharge









अगर आपके नंबर पर balance कम हो गया या ख़तम हो गया लेकिन internet चल रहा हो तो आप कही से भी online banking के जरिये balance रिचार्ज कर सकते है।


यह सुविधा bank application भी provide करती है या फिर third party apps के जरिये भी recharge करा सकते है।

Online Shopping


यह तो सभी को मालूम होगा कि Internet banking के द्वारा online shopping भी कर सकते है। वैसे तो COD की Option भी available होती है ,लेकिन यह option हर order पर नहीं होती।
 

Online Discounts


Online Banking के जरिये Online Banking के इस्तेमाल से आपको कई तरह के special discounts भी मिल जाते है। जैसे कि cashback offers या फिर flat discount। Amazon पर Giftcard के जरिये additional discounts भी मिल जाती है।


Recharge करवाने के लिए भी कुछ offers मिल जाती है।




यह फायदे तो हुए हम लोगों के लिए, लेकिन सरकार को online banking से क्या लाभ है, अब यह जान लेते है-


सरकार को इससे जो सबसे बड़े लाभ होंगे वह पढ़े-

Transparency


Online banking का जितना अधिक इस्तेमाल होगा, उतनी ही payments में transparency आएगी। यानी कि सरकार को सब खबर रहेगी कि किसने कहा पर भुगतान किया है।

Increase Government's Revenue


Payment System में transparency की वजह से governmemt का revenue भी increase होगा।


Government का revenue यानी कि जो भी सरकार को taxes के द्वारा पैसा प्राप्त होगा वह बढ़ेगा। क्योंकि अब अधिक-से-अधिक भुगतान online banking के द्वारा होगा, जिससे हर एक transaction पर सरकार की निगाह रहेगी और tax evasion (टैक्स चोरी) कम हो जायेगी।

देश को फायदा (Benefits Of Online Banking to Country To Country In Hindi)


Online Banking के द्वारा Money proper circulate होगी जिससे यह पैसे Banks में पड़े रहकर भी एक दूसरे के द्वारा भुगतान किए जा सकेंगे। क्योंकि पैसा Banks में ही रहेगा और proper circulate होगा इससे आने वाले समय में महंगाई और ब्याज दरें (interest rates) कम होंगे ,जिससे देश तरक्की की तरफ जाएगा।




यह बात तो हो गयी benefits की। आम जनता को Online Banking से क्या लाभ है, सरकार को Online Banking से क्या लाभ है और देश को Online Banking के क्या लाभ है, यह सब तो आपने जान लिया । अब बात आती है ,इससे होने वाले नुक्सान की। जो ऊपर कहा था कि इससे नुक्सान भी काफी अधिक है, अब इससे होने वाले नुकसानों को जानते है।


लेकिन यह नुक्सान सिर्फ आम जनता को छोटे या छोटे दर्जे के medium business man को ही होंगे।

 

अब इस तरह के कौन से business man है ,जिन्हें नुक्सान होगा? (Disadvantages Of Online Banking)





जो भी local trade करता है, जिसका काम कुछ सीमा तक ही सीमित है, जैसे की कोई भी करियाना की दुकान, Stationery की दूकान, Mobile या Mobile Recharge की दुकानें वगैरह (etc) ऐसी दुकानों को नुक्सान हो सकते है।


अब ऐसी दुकानों को क्या-क्या नुक्सान हो सकते है, आईये इसके बारे में जानते है-

 मोबाइल/रिचार्ज की दुकानों को नुक्सान (Loss To Mobile/Recharge Shops)


ऑनलाइन बैंकिंग से सबसे पहले और सबसे बड़ा नुक्सान तो mobile या फिर recharge shops को होगा।

पहले recharge shops को बात करते है-


भुगतान करने के लिए online banking पर जोर दिया जा रहा है। जिससे की payment mobile से ही हो जायेगी।


अब अगर कोई mobile recharge करने के लिए shop पर जाता है तो भी इसे e-payment करने के लिए अपने mobile phone की आवश्यकता है। तो अब जो लोग भी online banking से जुड़ेंगे ,वह सोचेंगे ," यार दुकान पर क्या जाना? Smartphone तो है ही, Internet से ही recharge कर लेता हूँ।"


या फिर कुछ ऐसे भी पहले होते थे कि recharge की shops तो हर गली/मोहल्ले में अधिकतर होती ही है, तो कोई-न-कोई recharge वाला किसी-न-किसी का दोस्त होता ही है। तो ऐसे में पहले या कुछ अब भी उन्हें Phone करके कह देते है, "इस नंबर पर इतना balance डाल दो, पैसे मैं आते-जाते दे जाऊँगा।" Shop वाला भी recharge कर देता है क्योंकि जान-पहचान तो होती ही है।


तो ऐसे में अब Online Banking के बढ़ने से ऐसी shops को नुक्सान होगा। नुक्सान भी कोई कम नहीं, बहुत बड़ा नुक्सान हो सकता है कुछ दुकानों को तो।

अब Mobile Phone की दुकानों की बात करते है-


आज-कल बहुत से mobile brands आ रहे है जो exclusively Flipkart या Amazon की sites पर बिक रहे है। और आने वाले समय में ऐसा और भी अधिक हो सकता है। जिससे जो retail की shops है, उन्हें नुक्सान होगा। और नुक्सान हो भी रहा है लेकिन आने वाले समय में यह नुक्सान और भी अधिक बढ़ सकता है। क्योंकि लोगों को online banking के बारे में awareness आएगी, जोकि अच्छी बात है,लेकिन इससे ऐसी काफी shops को नुक्सान होगा, जिससे unemployment भी बढ़ सकती है। क्योंकि shops पर जो लोग काम करते है, ऐसी हालत में दुकानदार को उसे हटाना पढ़ेगा, जिससे बेरोजगारी बढ़ सकती है।


अगर आप सोचे कि shops पर काम करने वाले तो company की तरफ से होते है ,तो ऐसा सिर्फ उन दुकानों पर होता है जहाँ पर sale अधिक हो। छोटी दुकानों पर company की तरफ से नहीं होते ।




तो Mobile या फिर Recharge वालों को ऐसी स्थिति में काफी नुक्सान झेलना पड़ सकता है।

करियाना की दुकानों को नुक्सान


ऐसी दुकानों को नुक्सान उन areas में हो सकता है, जहाँ काफी बड़े area में एक या दो जगह पर ही खरीदारी की दुकानें होती है। ऐसे इलाकों में लोग हफ्ते-हफ्ते भर का राशन इकठ्ठा खरीद लेते है क्योंकि नजदीक कोई दुकान नहीं होती। और ऐसी दुकानों पर उन्हें less भी काफी कम मिलती है या सिर्फ MRP पर ही सामान मिलता है क्योंकि competition के लिए कोई अन्य shop होती नहीं ,इसलिए सामान के दाम भी महंगे होते है।



तो ऐसे में लोग सोचेंगे कि अब Online Shopping ही कर लेते है। एक तो free delivery भी जो जायेगी और दूसरा payment भी आसानी से होगी और सामन भी बाजार से सस्ता मिल जाएगा।


ऐसा इसलिए क्योंकि अभी Online Stores जैसे कि Amazon , Flipkart वगैरह Promotion में अधिक पैसा खर्च कर रहे है और अपने profit की तरफ कम ध्यान दे रहे है ताकि आने वाले time में यह profit increase कर सके।


यह हो गया करियाना stores को जो नुक्सान हो सकता है।


अब आगे

Stationery की दुकानों को क्या और कैसे नुक्सान होगा? यह जानिये-


जैसे नुक्सान करियाना stores को नुक्सान हो सकता है वैसे ही stationery shops को भी हो सकता है।


मान लीजिए जो areas छोटे है, जहाँ stationery की कम ही shops होती है और नजदीक में कोई बड़ी दूकान नहीं होती, ऐसे में जब किसी को कोई चीज चाहिए होती है तो वह या तो बहुत अधिक दूर लेने जाते है कई जगह तो कई-कई किलोमेटर्स दूर दुकाने होती है और जाने में घंटों का रास्ता होता है। या फिर जिनको जो सामान चाहिए होता है वह अपनी local जगह वाली shop को बता देते है और order पर वह सामान मंगवा लेते है। ऐसे में सामन आने में हफ़्तों या फ़ॉर महीने के करीब का समय भी लग जाता है। तो ऐसे में ऐसे लोग भी online shopping को preferance दे सकते है।




अब कुछ लोग सोचेंगे कि Stationery की ऐसी कौन-सी चीजे होती है जो न मिल सके? सिर्फ pencil, rubber, sharpner, scale या ज्यादा-से-ज्यादा compass हो आएगी। लेकिन इसमें भी काफी चीजे होती है।



मान लो अगर किसी को Painting या Sketch का शोंक है और उसके skills professional की तरह है , तो Painting colours कई तरह के आते है। ऐसे ही Sketch में भी कई तरह की lead की pencils यानी की अलग-अलग तरह के सिक्कों वाली pencil use होती है जो हर एक shop पर उपलब्ध नहीं होती। Paper की भी कई तरह की qualities होती है जो हर जगह से नहीं मिल पाते। तो ऐसे में , ऐसे लोग भो Online Shopping की तरफ रुख कर सकते है ,जिससे shop वालों का प्रॉफिट कम हो जाएगा।

ऐसे ही Books वालों के साथ भी होगा-


Online Shopping के जरिये हज़ारों/लाखों किताबों को देखा जा सकता है, चाहे IAS की तैयारी की हो या IPS की, चाहे C.A. वालों के लिए हो या फिर M.B.A. वालों के लिए। चाहे धार्मिक किताबें हो या फिर साधारण बच्चों की कहानियों की किताबें। Online Shopping के द्वारा सब कुछ आसानी से देखा और ख़रीदा जा सकता है,जिससे retail shops को काफी नुक्सान होगा और हो भी रहा है।


यह हो गए Online Shopping से होने वाले नुक्सान।


अब बात आती है ऊपर heading तो Online Banking के नुक्सान की है और नुक्सान Online Shopping के बता दिए गए। तो दोस्तों अगर Online Banking बढ़ेगी, लोग Online Banking के बारे में जागरूक होंगे तो उन्हें Online Shopping के बारे में भी तो अधिक पता लगेगा। हालांकि जागरूकता अच्छी बात है, लेकिन इससे दूकान वालों को नुक्सान भी तो काफी अधिक होंगे।


और recharge वगैरह तो सीधा-सीधा सबसे बड़ा नुक्सान है। इस business के लिए सबसे अधिक समस्या उत्पन्न होगी।

तो अब फिर किया क्या जाए (Conclusion)


Online Banking से होने वाले फायदे तो बहुत अधिक है, इससे देश को फायदा ही होगा लेकिन बहुत से लोगों को नुक्सान हो सकता है। और अगर देश के लोगों को ही नुक्सान हो और देश को फायदा यह तो सही न हुआ क्योंकि देश तो देश के लोगों से ही मजबूत बनता है।


ऐसे में हम सबको क्या करना चाहिए-


हमे Online Banking का सही ढंग से इस्तेमाल करना चाहिए। Online Banking का तो इस्तेमाल करे, लेकिन Online Shopping को थोड़ा सोच-समझकर इस्तेमाल करे। जो आप बाजार से खरीद सकते है उसे बाज़ार से ही ख़रीदे। Online Shopping उतनी ही कीजिये जो बहुत आवश्यक है या फिर आप जहाँ रहते है आपके वहां उपलब्ध न हो। अगर किसी चीज का rate आपके local के मुकाबले ही है तो local shop को preferance दे।


इससे सब कुछ सही रहेगा। देश का भी भला होगा और देश के नागरिकों का भी। आपने चाहे Online Banking के जरिये ही भुगतान करना हो तो Retailer को भी तो इस तरीके से कर ही सकते है।



दोस्तों जल्द ही GyanPunji पर आपके सम्मुख एक कहानी भी प्रस्तुत होगी जो Retail Shopping खास तौर पर जो आपके घर के नजदीकी दुकाने है ,उनसे शॉपिंग करने के फायदे को बताएगी।


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तो दोस्तों आपको Internet Banking से होने वाले फायदों और नुकसानों पर लिखा यह लेख (Essay On Benefits and Drawbacks of Online Banking in Hindi) कैसा लगा comment करके जरूर बताये और अगर पसन्द आया तो अपने दोस्तों के साथ भी इसे share करना न भूले ताकि वह भी Merits and Demerits Of Online Banking In Hindi को समझ सके।


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