मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017

गेम ,सोच और सफलता (Game, Thinking & Success)

दोस्तों आपने बचपन में अपने दोस्तों या परिवार के साथ जीरो काटी गेम तो खेली ही होगी। (जिसे Zero Cross और Tic Tac Toe भी कहते है। ) इसमें 9 डिब्बे होते है और जो भी तीन zero या तीन cross इकठ्ठे बना लेता है ,वह जीत जाता है।



यह गेम है तो मज़ेदार लेकिन इसमें जो पहले बाजी (turn) चलता है उसे 5 चांस मिलते है और जो बाद में चलता है ,उसे 4 chances ही मिल पाते है ,यानी की बराबर के मौके नहीं मिलते। और mostly यह होता है कि अगर दोनों game को अच्छे से खेलना जानते है तो फिर या तो गेम draw होती है या फिर जो first turn चलता है वह जीत जाता है। ऐसे में second बारी जो चलता है ,उसे एक turn कम मिलती है और वह जीत नहीं पाता। खैर गेम तो गेम है ,यह दिमाग की थोड़ी-सी कसरत के साथ-साथ मनोरंजन का साधन भी है ,लेकिन हमारी life में भी कई बार ऐसा ही होता है।






हमारी life भी एक तरह से गेम की ही तरह है ,लेकिन यह game जैसी होते हुए भी game नहीं है क्योंकि यह reality है। जैसा आपको Tic Tac Toe Game के बारे में बताया लाइफ भी कुछ ऐसी ही है। कई बार हम समझते है अब सब कुछ ख़तम हो गया ,अब आगे हम कुछ नहीं कर सकते। या फिर business में ही कुछ ऐसा हो जाता है कि हमे लगता है ,हम जो-जो कर सकते थे ,सब कुछ कर लिया ,अब बस Full Stop .

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लेकिन असल में ऐसा होता नहीं। हम सिर्फ हमारी सोच की सीमाओं के अंदर कैद होकर सोचते है ,उन सीमाओं से बाहर निकलकर कुछ करने का कभी सोचते ही नहीं।


क्योंकि Life तो Life  है ,इसलिए इसमें हम जो चाहे वह कर सकते है ,अगर हम अपनी सोच से हटकर सोचना चाहे तो वो भी सोच सकते है ,लेकिन हम तो सीमाओं में कैद है ,इसलिए उनसे बाहर का सोच नहीं पाते। एक बार कभी सोच की boundaries से बाहर निकलकर तो देखिये, तो सफलता जरूर मिलेगी। लेकिन सही दिशा की और न की गलत।

सफलता प्राप्त करने के लिए क्या करे ?


दोस्तों अब जानते है कि हम अपनी सोच की सीमाओं से बाहर कैसे निकल सकते है ?

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पहले गेम की ही बात करते है ,Picture देखिये और समझिये -




Picture आपने देखली, zero वाले को एक chance कम मिला था लेकिन अगर उस chance को boundaries के बाहर आकर पूरा किया जा सके तो कुछ ऐसा हो ,जैसा आप देख रहे है। सिर्फ एक chance और लेने से zero वाला जीत गया। खैर यह तो गेम है ,boundaries में ही रहकर खेलनी पड़ती है और ऐसा हम (सीमा से बाहर आकर खेलना) कर नहीं सकते। लेकिन हमारी ज़िन्दगी कोई ऐसी गेम नहीं जो boundaries के अंदर कैद हो सके ,हम real है ,हम कुछ भी कर सकते है। बस कुछ ऐसा ही हम सबको अपनी life के साथ करना है,अगर जिंदगी में सफल होना चाहते है।

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अगर किसी व्यक्ति को लगे कि सफलता के सारे रास्ते बन्द हो चुके है तो सिर्फ एक step/chance ऐसा भी जरूर लीजिये कि जो जिंदगी को बदलकर रख दे। आपका यह अंतिम कदम बिलकुल सोच-समझकर होना चाहिए ,लेकिन एक बार एक कदम जरूर उठाईये और अपनी सोच की सीमा से बाहर निकलिए और सोच का दायरा इतना बड़ा कीजिये कि सफलता की ही तरफ जाता हो।


लेकिन जरा संभलकर 



लेकिन जरा संभलकर ,कही किसी बहकावे में मत आ जाना कि सीमाओं से बाहर निकलो हर तरफ सफलता ही मिलेगी क्योंकि सभी रास्ते सफलता की ही तरफ नहीं जाते। जैसा कि आप ऊपर वाली पिक्चर में देख ही रहे है, अगर इस गेम में किसी भी और side zero डालते तो जीत न मिलती।

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सीमाओं से बाहर निकलने का यह मतलब नहीं कि हर तरफ opportunities ही है। रास्ते बहुत है ,लेकिन सफलता उसे ही मिलेगी जिसके पास ज्ञान होगा और अपने ज्ञान का सही-सही इस्तेमाल करके सही रास्ता चुनेगा । जो सीमाओं से बाहर तो निकलेगा ,लेकिन गलत राह में नहीं फंसेगा। यह बात हमारी ज़िन्दगी के हर एक पहलू पर लागू होती है। कुछ ऐसा ही हमारे culture के साथ भी है ,लोग कहते है कि अब modern जमाना है कल्चर-वल्चर छोड़ो और अपनी सोच की सीमाओं से बाहर निकलो। लेकिन अगर सीमाओं से बाहर भी निकलना है तो एक दिशा होनी चाहिए जिससे सही रास्ते पर ही चला जा सके ,अगर कोई सीमाओं के किसी भी छोर पर चलने की सोचेगा तो फिर वह सफलता तो क्या ,कुछ भी नहीं प्राप्त कर सकेगा।






इसलिए दोस्तों सोचिये ,बड़ा सोचिये ,सोच की सीमाओं से भी बाहर आकर सोचिये ,लेकिन अपना रास्ता मत खो देना। अगर सीमाओं से बाहर आना है तो Gyan को भी बढ़ाना होगा ,कुछ अलग लेकिन सही सोचना होगा ,तभी सफलता मिलेगी। 


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शनिवार, 11 फ़रवरी 2017

पुस्तके भी सोच-समझकर पढ़नी चाहिए (Every Book Is Not Enlightening)

दोस्तों आपने सुना होगा कि Books मनुष्य की सच्ची दोस्त होती है। किताबों का ज्ञान हमेशा मुसीबत के समय में हमारी मदद करता है। यह उस समय भी हमारी सहायता करती है जिस समय अन्य सब  हमारा साथ छोड़ जाते है। लेकिन क्या यह सही में सच है कि किताबे हमारी हर समय सहायता करती है ?

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तो इसका जवाब है ,नहीं।  यह पूर्ण रूप से सत्य नहीं है कि किताबें हमारी हर समय सहायता ही करती है । क्योंकि कुछ किताबें ऐसी भी होती है ,अगर हम उन किताबों पर विश्वास कर ले तो हम मुसीबत में भी फंस सकते है या फिर दूसरों को मुसीबत में डाल सकते है। इसलिए हमें किताबें भी सोच-विचारकर ही पढ़नी चाहिए।



अब कुछ लोग सोचेंगे कि किताबें कैसे किसी को मुसीबत में डाल सकती है और इनमे ऐसा क्या है कि हमें books का चयन भी सोच-विचारकर करना चाहिए ?



तो दोस्तों इसका जवाब आपको अब मिल जायेगा। कई लोग आपने देखे होंगे कि जिन्हें किताबें पढ़ने का बहुत शोंक होता है और उन्हें जो भी किताब मिले, उठाकर पढ़ने लग जाते है। तो ऐसे में कई बार chances हो सकते है कि उस किताब में सही जानकारी न हो। या वह wrong information फ़ैलाने के इरादे से ही लिखी गयी हो।






अब आप सोचेंगे कि ऐसी कौन-सी किताब होगी ,जो गलत जानकारी फ़ैलाने के उद्देश्य से लिखी गयी होगी। दोस्तों , प्रत्येक writer जो  भी किताब लिखता है ,वह अपनी समझ और अपनी सोच को उस किताब के माध्यम से व्यक्त करता है। तो ऐसा भी हो सकता है कि जिस writer ने जो किताब लिखी ,असल में वो हकीकत से कही अधिक दूर हो लेकिन पाठक (readers) उसको सच मान ले। इससे होगा यह कि जिसने किताब पढ़ी उसे गलत जानकार प्राप्त हुयी और वह वही जानकारी अपने मित्रों (friends) के साथ भी बांटेगा।

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अब आपमें से कईयों ने सोचा होगा कि ऐसे तो कुछ भी नहीं होता। तो दोस्तों , आपको एक ऐसी ही जानकारी देता हूँ ,जिससे आप समझ जाएंगे-



दोस्तों हमें बचपन से ही पढ़ाया जाता है कि हवाई जहाज को Wright Brothers ने invent किया था ,लेकिन अब सच्चाई सामने आ रही है कि हवाई जहाज उससे कई सालों पहले एक भारतीय व्यक्ति शिवकर तलपड़े द्वारा बनाया जा चूका था। आप भी यह बात जानते और मानते भी होंगे।



तो दोस्तों इसमें दोष किसका ? इसका यही अर्थ हुआ कि जिन्होंने किताबे लिखी उनके पास सही-सही जानकारी नहीं थी।

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एक और बात आपमें से कईयों देखा या सुना होगा कि कई बार लोग हमारे ग्रंन्थों में जो लिखा होता है उन्हें ही तोड़-मरोड़कर हमारे सामने पेश कर देते है और जिन्हें सच की जानकारी नहीं होती तो वह लोग गलत बातों को भी सच मान लेते है। ऐसे लेखक सिर्फ गलत जानकारी फैलाने के इरादे से ही पुस्तके लिखते है।



दोस्तों अब आप समझ गए होंगे कि जरूरी नहीं कि किताबें पढ़ने से ज्ञान मिले ही।


सही किताब की पहचान कैसे करे ?



लेकिन अब सवाल यह आता है कि हमें कैसे पता चलेगा की किस किताब की जानकारी सही है या किस की गलत क्योंकि अगर हम किसी चीज के बारे में जानते नहीं ,तभी तो वह किताब पढ़ रहे है और उसमे जैसा लिखा होगा हम मान लेंगे। तो ऐसे में हम क्या करे ?

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दोस्तों ,इसका उत्तर बहुत ही सरल है ,अपनी सूझ-बूझ का भी इस्तेमाल करे। जरूरी नहीं कि जो किताब में लिख दिया वह सही ही हो। जिसने किताब लिखी वह भी इंसान है और इंसान गलत भी हो सकता है। ऐसी कुछ किताबें लेखको की अधूरी जानकारी के कारण लिखी जाती है और कुछ जान-बूझकर ,सच को सभी के सामने आने से रोकने के लिए या फिर द्वेष भाव फैलाने के लिए।






अगर किसी book की जानकारी काफी deep हो ,जिसके बारे में हम बिलकुल ही अनजान है तो दूसरे लोगो से भी थोड़ा विचार-विमर्श करे और अन्य लेखकों की किताबें भी पढ़े। इस प्रकार हम सही-सही जानकारी प्राप्त कर सकते है।



अब आप सब समझ गए होंगे कि किताबे क्यों सोच-समझकर पढ़नी चाहिए।

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दोस्तों आपको यह Post कैसी लगी comment करके हमें जरूर बताये। अगर आपने भी कभी wrong information वाली book या फिर अन्य कोई जानकारी पढ़ी हुयी है तो हमे भी सचेत करे।


मंगलवार, 7 फ़रवरी 2017

सबसे बड़े दो दुश्मन (Two Biggest Enemies)

 
अगर कोई गुस्सैल और अहंकारी है 
तो उसको दुश्मनो की कोई जरूरत नहीं 
क्योंकि उसको बर्बाद करने के लिए यह दो दुर्गुण ही काफी है। 

 
दोस्तों ,गुस्सा करने से हमारा अपना ही नुक्सान होता है। इससे दूसरे को कोई फर्क पड़े, चाहे न पड़े लेकिन यह हमें  नुक्सान जरूर पहुंचाता है। एक तो हमारा ही पारा चढ़ेगा और दूसरा इससे हमें कई रोग भी लग सकते है । गुस्सा करने से दिमाग की नसों की गति बहुत अधिक तेज हो जाती है ,अगर आपको भी कभी बहुत अधिक गुस्सा आया है तो आपने महसूस किया होगा कि आपका सिर बहुत भारी हो जाता है और आप एकदम से थकान भी महसूस करने लग जाते है । गुस्सा जब आता है तो उसके कुछ क्षणों बाद ही पुरे शरीर में से ऊर्जा समाप्त होने लगती है और शरीर में ऐसा महसूस होता है कि जैसे कोई आपके अंदर से साड़ी शक्ति को खींच रहा हो।

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गुस्से के कारण ही हम कई बार बहुत से सुअवसर (opportunities) गंवा बैठते है ,जिसका हमे बाद में पछतावा होता है और सोचते है कि काश ! अगर हमने उस वक्त गुस्सा न किया होता और जरा सोचा होता तो आज समय ही कुछ और होता।


जैसे कि अभी लिखा ,कि कुछ सोचा होता ,इसका मतलब हमे जब गुस्सा आता है ,चाहे किसी को भी जब गुस्सा आता है तब वह अपने सोचने समझने की शक्ति खो बैठता है और एक असभ्य इंसान से भी बुरा बन जाता है। गुस्सा करने से हम इस कदर तक अपनी सूझ-बूझ गांव देते है कि हम पागलो से भी बदतर बन जाते है। हमारे सोचने समझने की शक्ति खत्म हो जाती है और कुछ भी करने से पहले बिलकुल भी नहीं सोचते।




इसी प्रकार अहंकार है, इससे हम सिर्फ अपने आप का ही सोचते है और अपने आप को दूसरों से बेहतर समझते है। और इसी सोच के कारण हमारा पतन हो जाता है क्योंकि जिसने अपने को सबसे उच्च समझा ,वह आगे कुछ भी नहीं सीख सकता और हमेशा भूलता ही जाता है।

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दोस्तों मान करना या confidence करना अच्छी बात है ,लेकिन अहंकार यानी कि  overconfidence बहुत ही घातक है। चाहे कोई कितना भी बढ़िया क्यों न हो ,लेकिन उसे कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार से सिर्फ हानि ही होती है ,किसी भी प्रकार का कोई लाभ नहीं हो सकता।


मान लेते है अगर मेरा  blog कभी सबसे बढ़िया blogs की list में आ जाता है और ऐसा सोच-सोचकर मुझे अहंकार हो जाए कि मैं तो सबसे बढ़िया blogger हूँ और अपने दोस्तों में भी बस इसी के बारे में बताता रहूँ और कुछ भी न करूँ ,अहंकार से ही भरा रहूँ, तो आप ही जरा सोचिये क्या फिर मैं अपनी सफलता को बनाये रख पाऊंगा ? हमारे विचार जैसे होते है ,वैसी ही हम दूसरों से बाते कर पाते है ,अगर मुझमे अहंकार आ जाए और मैं लाख कोशिश करूँ अच्छा लिखने की ,लेकिन कभी भी लिख नहीं पाऊंगा क्योंकि मेरे जो विचार है मैं तो वही आपसे share कर ससकता हूँ। जब अहंकार आ जायेगा तब कैसे कुछ भी अच्छा व्यक्त कर पाऊंगा। इसलिए दोस्तों अहंकार कभी भी नहीं करना चाहिए। इससे हमारा ही नाश होता है।


गुस्सा और अहंकार से बचने का सबसे सरल उपाय 


गुस्सा करने से बचने के सरल उपाय


दोस्तों गुस्सा हमे कभी भी नहीं करना चाहिए ,हमें हमेशा 3 तरह की सोच रखनी चाहिए गुस्सा करने से बचने के लिए -

  1. यह तो हमसे बड़े है और बड़ों पर गुस्सा होना अच्छी बात नहीं। 
  2. यह तो मुझसे छोटा है ,गलती छोटों से ही तो होती है ,हम भी तो जब छोटे थे बहुत गलतिया करते थे। इसलिए उन्हें छोटा समझ कर माफ़ कर देना चाहिए। 
  3. अगर कोई हमारी उम्र का ही हो तो यह सोचना चाहिए ,चलो छोड़ो ,लड़ना क्यों ?गुस्सा क्यों करना ? हमारा ही तो दोस्त है ,कभी-कभी गलती हो जाती है। 

ऊपर गलती शब्द इसलिए क्योंकि गुस्सा अधिकतर गलतियों पर ही आता है।


अहंकार करने से बचने के सरल उपाय


अहंकार से बचने के भी कुछ सरल उपाय है। अहंकार करने से बचने के लिए यह सोचिये -



नीचे वालों को देखने के बजाए ,ऊपर वालों को देखो ,जो हमसे भी अधिक कामयाब है ,हमेशा अपना compare उनके साथ करे। ऐसा करने से अपने आप पर कभी भी अहंकार नहीं हो पायेगा।

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अहंकार करने से बचने का सबसे बढ़िया तरीका ,हर एक कामयाबी का श्रय ,भगवान को दीजिये। जितने भी कामयाब हो जाए लेकिन भगवान को ही अपनी सफलता का जिमेदार ठहराये।




या फिर अपने घर वालों को ,अगर आप married है तो अपनी wife को भी श्रय दे सकते है ,अगर वह भी आपकी मदद करती है।

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लेकिन भगवान को श्रय देने से अहंकार लेश-मात्र भी उत्पन्न नहीं हो पाता। आस्तिक व्यक्ति की सबसे बड़ी खूबी यही है कि वह नकारत्मक परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारता और सफलता प्राप्त होने पर भी अहंकारी नहीं होता क्योंकि वह शाश्वत सत्य जानता होता है और नश्वरता को भी सही मायनो में जानता है। इसलिए जिसका ईश्वर पर भरोसा है ,वह कभी भी कामयाबी पर अहंकार नहीं करता और नाकामयाबी पर होंसला नहीं हारता क्योंकि वह ईश्वर की कृपा को समझता है।

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इसीलिए दोस्तों ,जिसके पास अहंकार और गुस्सा यह तो दुर्गुण है, वह उस व्यक्ति के सबसे बड़े शत्रु है क्योंकि इतना नुकसान शत्रु नहीं पहुंचाता ,जितना यह दो दुर्गुण पहुंचा देते है।
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बुधवार, 1 फ़रवरी 2017

ऊंचे मुकाम पर कैसे टिके रहे (How To Maintain Success In Life)

Best Motivational Story In Hindi


हर कोई life में ऊंचा मुकाम हासिल करना चाहता है और सभी चाहते है कि उनकी अपनी एक  पहचान हो और उनका रुतबा हो। सभी आदर सम्मान करे।



क्यों सही है न ? Mostly हर एक ऐसा ही सोचता है लेकिन कुछ ही कामयाब हो पाते है ,और उनमे से भी बहुत ही कम है जो सही मायनों में कामयाब होते है। लेकिन बहुत से ऐसे होते है जिनकी कामयाबी कुछ ही समय तक रहती है और जल्द ही उनकी कामयाबी भी गायब, या फिर कामयाब तो रहते है लेकिन इज्जत नहीं प्राप्त कर पाते और पीठ पीछे लोग उनकी बुराई ही करते रहते है और यह बात उन्हें भी मालुम होती है।





लेकिन ऐसा क्यों ? क्यों कामयाब लोगो की अधिकतर सभी  बुराई करते है और कुछ ही विरले लोग होते है जिनकी कोई बुराई नहीं करता। ऐसा क्या reason है कि जो ऊँचे मुकाम पर पहुँच जाते है ,लोग पीठ पीछे उनकी उतनी ही बुराई करते है ?

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इसका reason एक कहानी पढ़ने के बाद पता लग जाएगा।



गोपाल और हर्ष दो दोस्त जोकि अमीर परिवार से थे ,घूमने के लिए गए। वह घूम-फिरकर enjoy कर रहे थे तभी उनके पास एक छोटी बच्ची आयी ,जिसने फटे-पुराने कपड़े पहने हुए थे और शरीर पर मिटटी भी लगी हुयी और उस बच्ची ने हर्ष को पकड़ा और पकड़कर जैसे ही कुछ बोलने को हुयी ,हर्ष ने एकदम से उसे धक्का दे दिया और गुस्से में उसे बोलने लगा कि तुमने मुझे क्यों छुया और गालिया भी देने लगा। एकदम से वह बच्ची सहम गयी और रोने लग गयी। गोपाल उस लड़की की तरफ उसे चुप कराने के लिए जाने लगा लेकिन तभी हर्ष बोला ,"क्यों इस गन्दी लड़की को छूते हो ,छोड़ो........ और चलो ,रोने दो ,अपने आप रोकर चुप हो जायेगी। " लेकिन गोपाल ने हर्ष की बात को अनसुना कर दिया और उसके पास जाकर पूछा ,क्या हुआ ,तुम रो क्यों रही हो?


वह बच्ची पहले तो कुछ न बोली ,लेकिन जब गोपाल ने दुबारा पूछा तो कहने लगी ," Uncle .मेरा छोटा भाई Hospital में बीमार पड़ा है और हमारे पास इतने पैसे नहीं कि इलाज करा सके ,इसलिए इलाज के लिए कुछ पैसे चाहिए थे। "



बच्ची की बात सुनकर एकदम से हर्ष बोला ,"चलो चलते है गोपाल ,क्यों इनके मुँह लगते हो ,यह ऐसे ही बहाने बना-बना कर मांगते है और कुछ करते नहीं ,रोना-धोना तो सब इनका नाटक है।"

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हर्ष के ऐसा बोलते ही लड़की को और भी अधिक रोना आ गया और हर्ष ने  गोपाल को एक बार फिर चलने के लिए कहा।



लेकिन गोपाल को लग रहा था कि लड़की सच कह रही है और उसने हर्ष से कहा तुम जाओ ,मैं आता हूँ।



हर्ष ने गोपाल को चलने के लिए जोर दिया लेकिन वह माना नहीं।



गोपाल ने लड़की को गाड़ी में बैठकर हॉस्पिटल चलने के लिए कहा ,लेकिन इससे लड़की और भी डर गयी और कहने लगी मैं पैदल ही आती हूँ और इस वाले हॉस्पिटल में आप पहुंचिए ,अगर मैं आपकी गाड़ी में बैठी तो यह गन्दी हो जायेगी।



गोपाल थोड़ा गुस्से से बोला की गाड़ी में बैठो ,वह लड़की थोड़ा डर भी गयी और अंदर ही अंदर खुश भी हुयी की uncle शायद उसके भाई की मदद करेंगे।






जो hospital उस girl ने बताया वह उसे वही ले गया और वहां जाकर उसके भाई को देखा जोकि सच में बीमार था और डॉक्टर से भी मिला। गोपाल ने doctor से उसकी दवाईयों वगैरह का खर्च पुछा और उन्होंने जितना भी खर्चा बताया सुनकर एकदम हैरान हो गया ,और पास ही खड़ी उस बच्ची से पूछा कि ,"क्या तुम लोगो के पास इतने भी पैसे नहीं है ?"

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लड़की बोली ,"uncle हम बहुत गरीब है, कभी-कभी हमारे पास खाने के पैसे भी नहीं होते और भूखे ही सो जाते है। "



गोपाल ने फिर से उससे पुछा ,"क्या हुआ, क्या तुम्हारे पापा कोई काम वगैरह नहीं करते ,सिर्फ मांगकर ही खाते हो क्या ?"



लड़की बोली ,"हमारा  काम.........है ,मिट्टी के बर्तन बनाकर बेचते है ,कभी-कभी ही बिकते है ,इसलिए हम अधिक नहीं कमा पाते।" बोलते-बोलते लड़की रोये जा रही थी।

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इससे पहले की आगे वह बच्ची कुछ बोलती गोपाल ने उसे गले लगा लिया और चुप होने के लिए कहा। गोपाल ने डॉक्टर को उसके भाई के इलाज के लिए पैसे दे दिए और लड़की को भी कुछ पैसे दिए ,लेकिन लड़की ने लेने से मना कर दिए और कहा ,sorry uncle ,आपने मेरे भाई के इलाज के लिए  पैसे दे दिए सिर्फ इसीलिए मैं मांग रही थी ,अब और पैसे नहीं चाहिए।"



लेकिन गोपाल ने लड़की को फिर भी  जबरदस्ती पैसे दे दिए और अपना एक card देते हुए बोला ,"अगर कोई और भी help चाहिए हो तो इस number पर phone करना। " इसके बाद गोपाल उसके भाई से फिरसे मिलकर चला गया।



दोस्तों ,कहानी तो आपने पढ़ ली ,अब कहानी पर ध्यान  देते है-

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इस कहानी में 2 दोस्त है ,हर्ष और गोपाल। दोनों ही अमीर।लेकिन दोनों की सोच में बहुत अंतर है। जैसा की आपने कहानी में पढ़ा हर्ष अभिमानी किस्म का है और उसे छोटी लड़की की भावनाओ की कोई कद्र नही क्योंकि उसने फटे-पुराने कपड़े पहने थे।



लेकिन गोपाल के लिए वह बच्ची ,अन्य बच्चो की ही तरह है। उसे उस पर दया आ गयी और उसकी सारी बात भी ध्यान से सुनी और उसकी मदद भी की। गोपाल को उसके कपड़ो वगैरह से कोई फर्क नहीं , यानी कि गोपाल में अपनी अमीरी को लेकर कोई अहंकार नहीं।और वह down to earth है।



दोस्तों असल कामयाबी का राज सिर्फ इतनी-सी ही कहानी में है।अगर हम इस कहानी को समझ जाए तो अपनी ज़िन्दगी में सफलता को हमेशा के लिए बनाये रख सकते है।






जो भी हर्ष जैसे लोग होते है ,करोड़ो रूपये कमाकर भी कंजूसों की ही तरह रहते है या फिर किसी जरूरतमंद की कभी मदद नहीं करते ,ऐसे लोग ही जल्दी ही असफल हो जाते है ,अगर असफल न भी हो तो भी लोग इनका दिल से आदर-सम्मान नहीं करते ,ऐसे ही लोगों की दूसरे लोग बुराई करते है क्योंकि यह इसी लायक है।



लेकिन जो गोपाल जैसे लोग होते है ,करोड़ो ,अरबों रूपये कमाकर भी जिनके मन में अभिमान पैदा नहीं होता और दुसरो की सेवा के लिए हमेशा तैयार रहते है ,ऐसे ही लोगों को सच्ची कामयाबी और सच्ची ख़ुशी मिलती है। सभी लोग भी इनका दिल से आदर-सत्कार करते है।



तो दोस्तों अगर आप भी असल कामयाबी पाना चाहते है और लोगो से मान-सत्कार प्राप्त कर हमेशा के लिए उनके दिलो में बसना चाहते है तो एक प्रण ले लीजिये कि चाहे कितनी भी कामयाबी क्यों न मिल जाए लेकिन अहंकार कभी भी नहीं करेंगे। बल्कि ऐसा कहना ज्यादा सही रहेगा कि "जैसे-जैसे आपकी कामयाबी बढ़ती जाए ,वैसे-वैसे अपने अहंकार को भी कम करते रहे। क्योंकि कामयाबी तभी रूकती है ,अगर अहंकार न हो। वैसे भी कहा गया है कि

"जो परिंदा अपने लिए आसमान ढूंढता है ,
वह छोटी-छोटी उड़ाने भरकर गुरूर नहीं किया करता । "



  
आसमान का कोई अंत नहीं होता और न ही सफलता का कोई अंत होता है ,इसलिए अहंकार किस बात का करना ,

क्योंकि आसमान अभी भी ऊपर है मेरे दोस्त 
जब तक आसमान पकड़ न लो
तब तक नीचे गिरने का डर बना ही रहेगा। 


 कुछ इसी प्रकार ही जीवन में सफलता है ,कब सफल से असफल हो जाए पता नहीं चलता। आसमान चढ़ने के लिए कोई रस्सी तो पकड़ नहीं सकते कि हम गिर न पाए लेकिन सफलता को पकड़े रहने के लिए एक रस्सी है ,जो कभी गिरने नहीं देती

कामयाबी को अगर पकड़े रहना है 
तो शीतल स्वभाव को रस्सी की तरह इस्तेमाल करना होगा। 


तो दोस्तों अब आप सब समझ गए कि हम कामयाबी को कैसे संभालकर रख सकते है । लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम दिखावे के लिए ही सिर्फ अच्छे बने रहे ,लेकिन अंदर से बुरे विचार हम में आते रहे। जैसे रस्सी दिखने में कितनी भी मोटी क्यों न दिखे ,उसकी मजबूती उसके material से ही होती है ,ऐसे ही स्वभाव आप चाहे दिखावे के लिए मीठे दिखा दो ,लेकिन जब तक अंदर से अच्छा आचरण नहीं आता ,तब तक वह किसी का दिल नहीं जीत पायेगा।



इसलिए दोस्तों ,हमेशा अच्छे बने रहिये और जितना भी बन सके दूसरों की मदद करते रहिये क्योंकि हम एक दिल लेकर आये थे और कितने लेकर जाते है यह हम पर निर्भर करता है।


दोस्तों आपको यह article जिंदगी में ऊंचा मुकाम कैसे हासिल करे ,कैसा लगा कमेंट करके हमे जरूर बताये। अगर पसन्द आया तो अपने दोस्तों के साथ share करना न भूले। 



बुधवार, 25 जनवरी 2017

क्या फायदा (What's The Benefit) ?

दोस्तों , आप ,मैं या फिर कोई भी मनुष्य ,धन-दौलत बनाने में ही लगा रहता है। वैसे धन-दौलत होना तो अच्छी बात है और अगर हमारे पास पैसे होंगे तभी हम आसानी से जीवन-यापन कर सकते है ,लेकिन अगर कोई हर समय ही धन-दौलत कमाने के पीछे लगा रहता हो और हमेशा यही सोचता रहे कि अमीर कैसे बना जा सकता (How to become millionare)? तो इसका क्या फायदा ?



मानता हूँ कि जिंदगी में कुछ भी पाने के लिए धन-दौलत का होना बहुत जरूरी है ,लेकिन आखिर हर समय पैसे के पीछे भागने से क्या होगा ? आज इसी पर गहराई से विचार करते है कि हर समय पैसे के बारे में ही सोचकर या हर समय आर्थिक काम में ही व्यस्त रहने से हमे क्या लाभ और क्या नुक्सान हो सकता है ? हम पैसे से क्या कुछ खरीद सकते है और क्या नहीं ?


पैसो से हम क्या-क्या प्राप्त कर सकते है (What We Can Buy With Money) ?




पहले हम बात करते है कि हम पैसे से क्या कुछ हासिल कर सकते है -


    पैसे से हर एक भौतिक वस्तु प्राप्त की जा सकती है ,चाहे खाने-पीने की हो या फिर ऐशो-आराम की।

        आपने अक्सर लोगो से सुना होगा कि पैसे से सब कुछ तो खरीदा जा सकता है लेकिन खुशिया नहीं ,लेकिन अगर इसको भी  गहराई से ले तो खुशियों के लिए भी पैसा जरूरी ही है। अगर किसी को घूमने से ख़ुशी मिलती है तो घूमने के लिए भी पैसो की जरूरत है।



        अगर किसी की ख़ुशी खेलने- कूदने में है तो उसे भी खेल-कूद करने के लिए पैसे तो चाहिए ही ,जिससे वह खेल-कूद का सामान खरीद सके या खाने-पीने के  लिए भी सामान चाहिए ही।



        तो दोस्तों जिसकी जो भी है ,चाहे आप हो या चाहे मैं हर एक वस्तु को पाने के लिए धन तो चाहिए ही।  कई लोगों को दान करने से ख़ुशी मिलती है या  दूसरों की मदद करने से ख़ुशी मिलती है ,तो ऐसा करने के लिए भी उनके पास रूपये तो होने ही चाहिए।

        दान का असली महत्व पर हिंदी में कहानी पढ़िए








        तो इसलिए , असल  ख़ुशी प्राप्त के लिए भी रुपयों की आवश्यकता होती ही है। अगर हमारे पास धन-दौलत होगी तभी हम कोई ख़ुशी प्राप्त कर सकते है।



        लेकिन हर एक की ख़ुशी उसके विचारो और उसकी इच्छाओं पर ही निर्भर करती है।



        दोस्तों आपने यह तो जान लिए कि पैसे से ही सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है ,अब यह जानते है कि पैसो से क्या नहीं प्राप्त कर सकते।


        पैसो से क्या नहीं हासिल कर सकते (What We Can't Buy With Money) ?




        अब आते है इस दुनिया की असलियत पर। कुछ लोग घमंड के नशे में चूर हुए रहते है कि उनके पास काफी धन-दौलत है ,वह सब कुछ खरीद सकते है और जो उनसे नीचे के दर्जे के होते है उनसे दुर्व्यवहार करते है ,लेकिन यह आगे खासतौर से ऐसे ही अमीर लोगो के लिए है जिनके अंदर घमंड पैदा हो जाता है कि वह सब कुछ खरीद सकते है ,अब आगे पढ़िए कि पैसो से क्या नहीं कर सकते। 



        • कोई भी अमीर-से-अमीर व्यक्ति paise खर्च के दवाईया तो खरीद सकता है लेकिन वह कभी भी सेहत नहीं खरीद सकता। 



        • कोई भी धनी व्यक्ति धन से अपनी surgeries तो करा सकता है लेकिन उसमे कुदरती सुंदरता और कुदरती मजबूती नहीं ला सकता। 



        • धन से हज़ारो पुस्तकें खरीद सकते है ,अपने पास उच्च-से-उच्च शिक्षित consultants रख सकते है लेकिन ज्ञान नहीं खरीद सकते ,सही-गलत की समझ नहीं खरीद सकते। 



        • जैसे कि ऊपर लिखा अगर किसी की ख़ुशी घूमने-फिरने में है तो वह धन से यह पूरी तो कर सकता है लेकिन घूमने-फिरने या खेलने-कूदने के लिए जो सेहत चाहिए वह कोई नहीं खरीद सकता। 



        • धन से ऐशो-आराम की वस्तुए तो खरीद सकते है लेकिन मन और दिमाग की शान्ति कोई नहीं खरीद सकता। 

        • पैसो द्वारा भगवान की मूर्ति तो खरीदी जा सकती है लेकिन भक्ति एवं श्रद्धा नहीं खरीदी जा सकती। 



        • धन से मित्र-रिश्तेदार बनाये जा सकते है लेकिन सच्चे मित्र और सच्चे मददगार नहीं।



        • जिसके पास पैसे है वह अपने लिए security gaurd रख सकता है ,care taker रख सकता है ,लेकिन सच्चा साथी ,दिल से मदद करने वाला कभी नहीं खरीद सकता।



        तो दोस्तों ,पैसो से बहुत कुछ तो प्राप्त किया जा सकता है और बहुत-सी खुशिया भी प्राप्त की जा सकती है लेकिन उन खुशियों के सही इस्तेमाल के लिए सेहत या सच्चा साथी नहीं प्राप्त किया जा सकता।



        यहाँ पर यह बात बिलकुल नकारता हूँ , जो कहते है कि पैसो से सिर्फ भौतिक सुख प्राप्त कर सकते है लेकिन आंतरिक सुख नहीं। यह काफी हद तक गलत है(कुछ इंसानों पर ही यह बात पूर्ण रूप से लागू होती है)। जैसा कि ऊपर लिखा ही है ,अगर किसी को दान करने से ख़ुशी मिलती है तो उसे  भी कुछ तो रूपये चाहिए ही दूसरों की मदद करने के लिए और उन्हीं रुपयों के व्यय से दानी को दान करने में ख़ुशी मिलती है।


        आखिर इस Post का मकसद क्या है ?









        दोस्तों ,इस Post में दोनों तरफ ही बातें हो गयी ,शायद थोड़ी confusion हो रही हो कि आखिर यह Post किस लिए ? क्योंकि पैसे से हम क्या कुछ प्राप्त कर सकते है यह भी बात हो गयी और क्या कुछ नहीं प्राप्त कर सकते यह भी बात हो गयी। पर अभी तक समझ नहीं आया होगा कि आखिर इस Post द्वारा क्या कहना चाहता हूँ ?



        दोस्तों इस पोस्ट का यही मकसद है कि पैसा हमारी जिंदगी में बहुत महत्वपूर्ण है और हर काम करने के लिए जरूरी भी ,लेकिन किसी को भी हर समय  पैसे कमाने का ही नहीं सोचते रहना चाहिए या फिर हर समय काम, काम और काम (work, work and always work...) ही नहीं करते रहना चाहिए ,कुछ समय हमे अपने लिए भी निकालना चाहिए जिसमे हमारी असल ख़ुशी है वह काम भी करने चाहिए। या फिर अपने दोस्तों के लिए अपने रिश्तेदारों के लिए भी समय निकालना चाहिए ,सबसे जरूरी ,हमे अपने परिवार को भी समय देना चाहिए क्योंकि वो तो हमारे बिलकुल ही अपने है ,उनके साथ भी time spend करके enjoy करना चाहिए क्योंकि अगर धन  कोई ख़ुशी ही न दे सके तो वो धन किस काम का ? 




        अगर हर समय कमाते रहकर भी हम अंदर से ख़ुशी न  प्राप्त कर सके तो उस कमाई का क्या फायदा ? अगर हम अपने परिवार को ही खुश नहीं  कर सकते तो फिर ...................  (आप समझ गए होंगे कि यहाँ पर क्या आएगा) ? 



        इसलिए दोस्तों कमाईये , खूब कमाईये ,करोड़पति बनिए या फिर अरब-खरबपति बनिए , कमाने में कोई बुराई नहीं ,लेकिन अपनी असल ख़ुशी न भूलिये ,अपने परिवार ,अपने रिश्तेदारो ,अपने साथियों को जिन्होंने इस मुकाम तक  पहुँचने में मदद की ,ऐसे लोगो को कभी न भूलिये ,इनके लिए भी भरपूर समय निकालिये क्योंकि अंत समय में माया किसी का साथ नहीं देती। तो इतनी माया कोई भी अगले जन्मों में तो लेकर जा नहीं सकता ,इतनी माया की तो बात ही क्या, कोई एक तिनका तक लेकर जा नहीं सकता और हम अहंकार करते रहते है कि यह मेरा है ,मैंने किया वगैरह वगैरह ,इसलिए माया को सिर्फ जोड़िये मत ,खर्च भी कीजिये लेकिन सिर्फ असल ख़ुशी के लिए, दिखावे के लिए नहीं । 



        असल ख़ुशी पर भी जल्द ही आप पोस्ट पढ़ेंगे 



        तो दोस्तों अब आप समझ गए होंगे कि इस Post को लिखने का क्या मकसद है। यह खासतौर से उनके लिए है जो सिर्फ  पैसे को ही अहमियत देते है और अपने परिवार और दोस्तों की कोई परवाह ही नहीं करते। ऐसे लोग इस Post को एक बार द्वारा से भी पढ़ ले और परिवार , दोस्तों की अहमियत को समझे क्योंकि परिवार प्यार ,समय और भरोसे से बनता है और दुनिया की सारी दौलत भी परिवार नहीं खरीद/बना सकती। 




        दोस्तों आपको यह Post कैसी लगी comment करके जरूर बताये और अगर आपको पसन्द  आयी तो अपने दोस्तों के साथ भी जरूर share करे। 




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          रविवार, 15 जनवरी 2017

          हम क्या लेकर आये थे और क्या लेकर जाएंगे ? (What We Will Carry With Us When We Go)





          हम क्या लेकर आये थे और क्या लेकर जाएंगे ? , दोस्तों ऐसा तो आपने बहुत बार सुना ही होगा और सभी कहते है , हम न कुछ लेकर आये थे और न ही कुछ लेकर जाना है। सभी यही सोचेंगे कि जब हम पैदा हुए थे कुछ नहीं लेकर आये थे और जब मरेंगे तब कुछ लेकर भी नहीं जा सकते। क्योंकि अगर किसी ने जन्म लिया है तो उसका मरन भी निश्चित है।



          लेकिन अगर हम गहराई से सोचे तो हम कुछ लेकर आये भी थे और बहुत कुछ लेकर जाएंगे भी। जब पैदा हुए थे ,तब हमारे पास एक दिल था, लेकिन जब जाएंगे ,तब कुछ लेकर जाएंगे या नहीं ,यह हमारे ऊपर depend करता है।



          अगर हम सच्चे स्वभाव के रहेंगे और दूसरों की मदद करते रहेंगे  तो फिर जब जाएंगे तो सैंकड़ो, हज़ारो दिल लेकर भी जा सकते है ,लेकिन अगर दूसरों का हमेशा बुरा चाहते रहेंगे तो फिर कुछ भी  नहीं लेकर जा सकते ,बुरे कर्मों के इलावा।



          दोस्तों, अक्सर सभी कहते है कि दुनिया मोह/माया है ,यह दुनिया सब झूठ है ,जो भी हम देखते है सिर्फ छलावा है ,हक़ीक़त में यह कुछ भी नहीं ,लेकिन क्या यह सच है ? अगर दुनिया सच में ही मोह/माया है, सब कुछ झूठा है , तो फिर भगवान ने कर्म फल क्यों बनाया? क्योंकि कर्म तो अगले जन्मों में भी हमारे साथ ही रहते है और परलोक में भी हमारे साथ ही रहते है। फिर अगर यह दुनिया झूठ है तो झूठी वस्तु में कुछ सत्य कैसे ? इसका तो यही मतलब हुआ कि दुनिया सच ही है और हमारा मोह भी एक तरह से सच ही है।



          इसे एक example के द्वारा समझते है -



          मुझे एक सपना आया कि मेरी एक करोड़ रुपये की लाटरी (lottery) निकल गयी ,मुझे वह सब पैसे भी मिल गए और मैं बहुत ही अमीर हो गया। लेकिन जब मैं जागा तो ऐसा कुछ भी नहीं था और अगली रात सोते वक्त भी ऐसा कुछ नहीं हुआ। यानी कि सपना वही पर ख़तम और हक़ीक़त में कुछ भी न हुआ।



          अब ऐसे ही दुनिया है ,अगर यह झूठ होती तो कर्म अगले जन्मों में फल कैसे देते ?अगर यह झूठी है तो कर्मों द्वारा परलोक कैसे अच्छा या बुरा हो सकता है ? यानी की दुनिया जो भी है ,कुछ न कुछ सच तो है ही। बस अब इसी सच को लेकर चलना है।



          अब बात आती है क्या लेकर आये थे और क्या लेकर जाएंगे ? दोस्तों फिर से वही बात एक दिल लेकर आये थे और अनेकों दिल लेकर जा सकते है। सिर्फ हमे कर्म कुछ ऐसे करने है कि दूसरों का भला हो और वह हमे ज़िन्दगी भर याद रखे। अगर किसी का भला नहीं भी कर सकते ,तो कम-से-कम हमारे द्वारा किसी को कोई हानि भी न पहुंचे। अगर हमारे जाने के बाद भी दूसरे लोग हमे याद रखेंगे और हमारी अच्छाई के कारण दूसरों के साथ भी अच्छा करेंगे तो हमारे कर्मों का पेड़ ,हमारे जाने के बाद भी बढ़ता-फूलता रहेगा और इसका फल हमें परलोक और अगले जन्मों में भी मिलता रहेगा ।



          इसलिए दोस्तों आगे से ऐसा कभी मत कहना कि न कुछ लेकर आये थे और न कुछ लेकर जाना है। हमें अपने कर्म ऐसे करने है कि जो हमें हमेशा के लिए दूसरों के दिलो में जिन्दा रख सके। जैसे शहीद भगत सिंह की ही बात कर लेते है ,छोटी सी उम्र में ही शहीद हो गए ,लेकिन वह कुछ ऐसा करके गए थे कि आज भी लोगों के होंसलो में जूनून भर देते है और सभी को भारतीयता का गर्व कराते है। जरूरी नहीं कि शहीदी से ही लोग हमे याद रख सकते है। महान सूफी संत बुल्लेह शाह जी को ही ले लीजिये ,जीवन उनका साधारण व्यक्ति से भी साधारण था ,लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ लिखा जिससे आज भी लोग उन्हें याद रखते है। उनका अलौकिक प्रेम आज भी हम सभी के लिए मिसाल है और उनकी रचनाये हमे आज भी प्रेम और भक्ति सीखाती है।इन्होंने अपना जीवन तो अपने  मुरशद के नाम कर दिया था लेकिन फिर भी इन्होंने जो लिखा हम सभी के लिए अमर साहित्य है।



          तो दोस्तों बस ज़िन्दगी में कुछ ऐसा कीजिये कि ईश्वर हमे जब भी अपने पास बुलाये ,दुनिया छोड़ने के बाद भी हम लोगों के दिलो में जिन्दा रह सके क्योंकि मृत्यु तो एक-न-एक दिन सभी को आनी ही है ,यह भी शाश्वत सत्य है।



          तो आगे से हमेशा यही सोचना कि हमे अब कितने दिल लेकर जाना है ,इस दुनिया में जब आये थे तब कर्मों के इलावा एक दिल लाये थे और उस दिल को कितने दिलों के साथ जोड़कर कितने दिल लेकर जाएंगे यह हम पर निर्भर करता है।क्योंकि न कुछ लेकर आये थे और न कुछ लेकर जाएंगे ,यह तो भौतिकवादी लोग ही कहते है ,हम पैसा ,जमीन वगैरह कुछ नहीं लेकर आये थे ,सिर्फ कर्मो द्वारा हमे अच्छा दिल प्राप्त हुआ है और अच्छे कर्मो के द्वारा सभी का भला करते हुए दिल जीतते जाने है। जो इस दुनिया से दिल जीतकर जाएंगे  ,वह अवश्य सद्गति ही प्राप्त करेंगे।



          दोस्तों आपको यह पोस्ट What We Will Carry With Us When We Go कैसी लगी comment करके हमे जरूर बताये और अगर आप भी हमारे साथ अपने विचार सांझे करना चाहते है तो comment जरूर कीजिये।



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          मंगलवार, 10 जनवरी 2017

          क्या जियो सिम इस्तेमाल करने के लिए बिल आएंगे (Is It True Jio Sending Bills For Using Welcome Offer)

          दोस्तों , जब से Jio sim आया है, free offers के चलते यह काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रतिद्वंदी companies भी अपने एक-से-एक सस्ते plans launch करते जा रहे है ताकि Jio को टक्कर दे सके। जिसके चलते Airtel , Vodafone , BSNL , Idea आदि coampnies भी आकर्षक प्लान्स दे रहे है, ताकि वह भी market में अपनी पकड़ बनाये रख सके।



          लेकिन क्योंकि Jio तो पूरी तरह से free है तो इसको लेकर काफी तरह की अफवाहे भी आ रही है। Social Media पर इसके bill को लेकर भी बहुत images share हो रही है और काफी लोग परेशानी में भी है कि Jio Sim इतनी देर से इस्तेमाल कर रहे है कही उन्हें भी न बिल आ जाए।  तो क्या इनका यह डर सही है अथवा नहीं ? क्या jio सच में अपने ग्राहकों को बिल भेजेगा ? इस बारे में पूरी जानकारी आप पढ़िए।

          क्या जियो सच में बिल भेजेगा 


          अब बात यह आती है कि social media पर इतना कुछ share हो रहा है jio bills भेजे जाने को लेकर ,तो क्या सच में जिओ बिल भेजेगा या नहीं।








           जियो के किसी भी customer को बिल नहीं आएंगे ,यह एक proper company है और कोई भी rule बिना किसी सार्वजनिक सूचना के कभी भी नहीं बदल सकती।  इसलिए किसी को भी कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है।



          अगर फिर भी आपको चिंता रहे तो एक बात जान लीजिये तो तरह के sim connection होते है ,Prepaid और Postpaid . Prepaid यानी की जिस में recharge कराना पड़ता है तभी इसका इस्तेमाल कर सकते है और दूसरे Postpaid जिसका बिल आता है। अगर आपका Prepaid Connection है  फिर तो बिलकुल  ही न चिंता कीजिये क्योंकि Prepaid का कभी भी bill आ ही नहीं सकता।


          Jio Sim प्रीपेड है या पोस्टपेड कैसे पता करे 


          दोस्तों अब सवाल यह आता है कि जो आपके पास जिओ सिम है वह prepaid है या फिर postpaid यह कैसे पता करे। क्योंकि आपने तो सिम लिया है और मुफ्त था जो मिल गया ले लिया। पर अब पता कैसे करे की प्रीपेड है या फिर पोस्टपेड। 


          Step 1: इसके लिए आप सबसे पहले MyJio app open कीजिये।


          Step 2 : App open करने के बाद MyJio Open कीजिय।


          Step 3 : फिर Skip Sign In ,उसके बाद top left corner पर click कीजिये।


          Step 4 : फिर My Plans पर click  करने के बाद check करलीजिये की आपका connection Prepiad है या Postpaid .




           दोस्तों अब आप समझ गए होंगे की Jio का connection कौनसा है , कैसे पता  कर सकते है। अंत में  इतना ही ,चाहे आपका सिम prepaid हो या फिर postpaid, tension लेने की जरूरत नहीं ,आपको कोई भी bill नही आएगा ,अगर कभी company अपने नियम बदलती है तो आपको उसकी जानकारी company द्वारा अवश्य दी जाएगी।


          अगर अभी भी कोई सवाल हो और आप कुछ पूछना चाहते है तो comment करके पूछ सकते है।


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