बुधवार, 21 सितंबर 2016

कैसे जाने शाकाहारी और मांसाहारी आहार के बारे में (How To Know About Veg Or Non-Veg Food)






दोस्तों Globalisation के इस युग में आये दिन कोई-न-कोई खाने-पीने की वस्तु आती ही रहती है। कभी कोई नए Flavour में chocolate  आ गयी तो कभी किसी नये Brand के Noodles आ गए। कभी कुछ पीने के लिए आ गया तो कभी खाने के लिए।  और हम भी कोई अच्छा सा packet देखा तो हो गए उसे भी खाने-पीने को।



तो ऐसे में उन लोगों के लिए एक दुविधा उठ जाती है जो पूर्णता से शाकाहारी है। क्योंकि आजकल Market में non-veg पदार्थ भी काफी आ रहे। लेकिन अधिकतर लोग फिर भी उसके ingredients पढ़े बिना ही खा लेते। क्योंकि इसमें बहुत खेचल महसूस होती है ,जितना time पढ़ने को लगेगा उससे आधे समय में ही वह चीज ख़तम हुयी होगी ,इसलिए पढ़े कौन।



लेकिन इसके लिए भी एक special symbols होते है ,जो यह दर्शाते है कि खाद्य पदार्थ शाकाहारी है या फिर मांसाहारी। कुछ लोग इस symbols के बारे में जानते होते है लेकिन फिर भी बहुत से लोगों को इन symbols (Logo) के बारे में जानकारी नहीं है।



तो दोस्तों आज शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों पर बने logo के बारे में जानते है।



शाकाहारी निशान (Vegetarian Logo)





शाकाहारी खाद्य पदार्थों के लिए हरे रंग के निशान का इस्तेमाल किया जाता है। आपको बस किसी भी product पर देखना है कि Green Logo बना है या फिर नहीं ,अगर उस वस्तु पर Green Logo बना है तो इसका मतलब कि वह वस्तु शाकाहारी है। 


भारत में हर एक Company/Brand के लिए यह अनिवार्य है कि उसपर हरा निशान बना हो ,जिसकी लंबाई ,चौड़ाई के लिए भी नियम बनाये गए है। 


शाकाहारी चीजों में क्या-क्या आता है और क्या नहीं आता 


कोई भी खाद्य पदार्थ जो भी किसी पेड़,पौधे या फिर किसी वनस्पति से प्राप्त किया गया हो वह सभी शाकाहारी पदार्थ होते है। इनके इलावा दूध और दूध से बने पदार्थ भी शाकाहारी है।



मांसाहारी निशान (Non-Veg Logo)





मांसाहारी खाद्य पदर्थों की पहचान के लिए भूरे रंग (Brown Colour) का उपयोग किया जाता है। तो भी वस्तु मांसाहारी होगी उसपर भूरे रंग का निशान लगा होगा।  कई वस्तुओं पर भूरे रंग के इलावा लाल रंग (Red Colour) का भी चिन्ह लगा होता है ,कई वस्तुओं पर ऐसा उस वस्तु की packing के कारण भी हो जाता है। 



मांसाहारी चीजों में क्या-क्या आता है 



कोई भी वस्तु जिसमे जानवर के किसी भी हिस्से का प्रयोग किया गया हो ,वह सभी मांसाहारी है। किसी भी तरह का कोई जानवर ,पशु ,पक्षी ,मछली आदि किसी के भी मांस ,हड्डियों आदि से बनी वस्तुएं नॉन-वेजीटेरियन  category में आती है। 



किन वस्तुओं पर यह Logo नहीं होते

 

कुछ import की हुए वस्तुओं पर यह चिन्ह नहीं होते और बहुत-सी Medicines पर भी यह चिन्ह नहीं होते। इनकी तसल्ली के लिए आप इनके ingredients पर ही ध्यान दे और दवाई के लिए आप डॉक्टर से ही पूछ सकते है कि उसके minerals/salts का source क्या है।



अंत में एक ही बात ,"शाकाहारी खाओ ,स्वस्थ रहो ,शाकाहार ही उत्तम आहार है।" 



दोस्तों आपको यह जानकारी कैसी लगी comment करके जरूर बताये। अगर अभी भी आपका कोई सवाल है तो आप comment करके या फिर Contact Us Form भरकर पूछ सकते है। 



Google Plus Page पर भी Follow करें 



यह भी पढ़े :

शनिवार, 17 सितंबर 2016

एक चुटकला जो जिंदगी जीना सीखा दे (One Inspirational Joke)







क्या कोई चुटकला जिंदगी जीना भी सीखा सकता है ? What A Joke.........चुटकला कैसे जिंदगी जीना सीखा देगा ? यही सोचेंगे न आप ? पर यह सच है अगर चुटकलों पर भी गंभीरता से ध्यान दिया जाए तो बहुत से चुटकलें भी हमें जिंदगी जीना सीखा सकते है।



अगर विशवास नहीं आता तो आप पहले चुटकला पढ़िए उसके बाद समझते है उस Joke की गहराईयों को।




चुटकला (Joke)






पत्नी बाजार से घर आती है और पति को आवाज लगाती है लेकिन वह सुनता नहीं।
 इसके बाद वह अपने कमरे में जाकर देखती है कि Bed पर दो लोगों की टांगें है जो चादर लेकर पड़े हुए है।
पत्नी को एकदम गुस्सा आ जाता है और वह बैट (Bat) उठाकर दोनों को मारने लग जाती है।
जब पत्नी कमरे से बाहर आती है तो पति को kitchen में देखती है और पति कहता है कि तुम्हारे मम्मी-पापा आये  हुए है ,वह हमारे कमरे में आराम कर रहे है।



First impression में तो यह एक चुटकला ही है ,लेकिन अगर सोचा जाए और पत्नी की  मनोदशा को थोड़ा आगे ब्यान किया जाए तो पत्नी को एकदम से कितना दुःख और पछतावा हुआ होगा ,उसे अपने आप से ही घृणा हो रही होगी कि यह मैंने क्या कर दिया।




 
एक पल उसने सोचा नहीं और क्रोध के वश में होकर उसने बिन-मतलब  अपने पति पर बहुत ही गहरा शक किया और सालों के भरोसे को एक ही पल में तोड़कर उसका गुस्सा उसपर इतना हावी हो गया कि वह क्या करने लगी यह उसने एक बार भी न सोचा और अपने ही माता-पिता को मारने लगी।






सिर्फ और सिर्फ एक पल के गुस्से ने उसकी जिंदगी ही बदल दी। अगर वह थोड़ा-सा सोचती या फिर अपने पति पर उसका भरोसा ही कायम रहता कि नहीं मेरा पति ऐसा नहीं कर सकता और देखती कि कौन है तो ऐसा कदम उसने नहीं उठाना था। बस तीव्र गुस्से ने उसकी बुद्धि का हरण कर लिया और उसे नासमझ बना दिया।




 
दोस्तों अब हम हमारी अपनी बात पर आते है ,ऐसा ही कुछ हम सबके साथ भी हो सकता है या फिर कभी-कभी कुछ ऐसा हुआ हो ,हमने पहले सोचा कुछ और ही हो ,लेकिन हुआ कुछ और हो। हम सच्चाई को कई बार एकदम पहचान नहीं पाते और सोचते है किहमने जो देखा या फिर सुना है वह बिलकुल सही है। लेकिन ऐसा हर बार नहीं होता , बहुत बार हमारी आँखें और हमारे कान भी हमें धोखा दे जाते है और हम बिना कुछ सोचे-समझे कुछ ऐसा बोल जाते है जो  चाहिए या फिर कई बार इतना ज्यादा बुरा कर जाते है जो हमें नहीं करना चाहिए था।

यह भी पढ़े : मेहनत और किस्मत (Hard Work & Luck)



लेकिन फिर जब बाद में असलियत पता लगती है तब सोचते (Think) है कि हमने बहुत बुरा कर दिया ,मुझे  ऐसा नहीं कहना चाहिए था या फिर मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था।  अब माफ़ी मांगू भी तो कैसे मांगू ? सिर्फ ek minute के आक्रोश में हम अपना आपा खो (lost)  बैठते है और अपने सालों के भरोसे (loyality) को कुछ ही seconds में भुला देते है। क्या यह बात सही है कि सालों के भरोसे को एक ही  पल में हम भूल जाएँ और उसे दांव पर लगाते हुए यह भी न सोचे कि हम जो करने जा रहे है क्या वह सही भी है ? एकदम से इतना गुस्सा ? वो भी उसके प्रति जो हमारे सबसे प्यारों (ख़ास दोस्त/रिश्तेदार ) में से है।



दोस्तों ऐसा कुछ-न-कुछ तक़रीबन हम सबके साथ हो ही जाता है कि हम ऐसा कर बैठते है और कुछ समझ ही नहीं पाते ,बस हमें उस समय अपने गुस्से का पता होता है।



यह भी पढ़े : समझदार पत्नी (Intelligent Wife)
 


सालों के प्रेम को हम सिर्फ एक पल के गुस्से के कारण दांव पर लगा देते है। क्या गुस्सा इतना बलवान है कि हम इंसान जोकि परमात्मा की सबसे बड़ी और सबसे अद्धभुत रचना है और हम सिर्फ एक आक्रोश के वश में आ जाए। दुनिया में लाखों प्रजातियों के जीव है उनमें से  इंसान ही सबसे अधिक बुद्धिमान है और हम फिर भी गुस्से के वश में होकर अपनी सूझ-बूझ खो बैठते है।



तो इसका मतलब सारे गुस्से की जड़ ही यह गुस्सा है। सिर्फ गुस्सा ही हमसे ऐसे काम करा देता है ,जो हम कभी  करना तो दूर सोचना भी नहीं चाहते, लेकिन फिर  क्रोध के वश होकर हम वह काम कर ही जाते है ,हम वो बन जाते है ,जो हम है ही नहीं।




 
तो दोस्तों अब आप शायद समझ गए होंगे कि गुस्सा कितना ज्यादा घातक है। अगर हम अपनी जिंदगी को आराम से जीना चाहते है और असल में एक सफल जीवन चाहते है तो हमें अपनी जिंदगी से क्रोध का त्याग कर देना चाहिए। पर जैसे कि हम गृहस्थ जीवन व्यतीत कर रहे है ,उसके लिए कभी-कभी गुस्सा करना भी पड़ जाता है ,वैसे तो कभी भी न करे ,ज्यादा अच्छी बात है ,अगर करना पड़े भी तो उसकी भी कुछ सीमा होती है ,जो इस ब्लॉग में पहले पहले की Post क्या आप जागृत है ? (Kya Aap Jag Rahe Hai ?) में  विकारों की सीमा में बताया गया है। 



तो बस दोस्तों एक खुशहाल जिंदगी जीने के लिए , जीवन से क्रोध को निकाल फेंकिये और खुश रहे ,सभी से प्यार करें और सब लोगों में खुशियां बाँटें। 


यह भी पढ़े : मांस का मूल्य (Price Of Flesh)



दोस्तों आपको यह Post एक चुटकला जो जिंदगी जीना सीखा दे (One Inspirational Joke) कैसी लगी। इसमें पहले एक Joke है ,मगर अगर उस joke को हम थोड़ा seriously सोचे तो वह जिंदगी जीना सीख दे। आपको यह post कैसी लगी comment करके जरूर बताएं। 



अगर आपने E-Mail द्वारा Post प्राप्त करने के लिए अभी तक subscribe नहीं किया तो अन्य ऐसी ही कहानियां पढ़ते रहने के लिए subscribe करना न भूले। 


Facebook Page like करें
Google Plus Page पर Follow करें 



अगर आपके पास भी कोई कहानी है ,  जो आप हम सभी लोगों के साथ बांटना चाहते है तो आप contact कर सकते है ,अगर आपकी कहानी पसन्द आयी तो आपके नाम के साथ इस Blog पर प्रकाशित की जायेगी। 



अगर आप किसी special article से related उसपर inspirational story चाहते है ,तो आप उसका शिर्षक (Title) भी suggest कर सकते है ,अगर उसके related  मैं कहानी लिख सकता हुआ तो जरूर लिखूंगा।




बुधवार, 14 सितंबर 2016

ईश्वर से मुलाक़ात (Met With God)






मोहन नाम का लगभग 8-9 वर्षों का एक लड़का था। वह भगवान से मिलना चाहता था। लेकिन जब भी वह अपने मम्मी-पापा से भगवान का पता पूछता तो वो कह देते कि भगवान जी अपने आप  तुमसे मिलने आएंगे ,वह अपने घर पर नहीं आने देंगे तुम्हे और ऐसा कहकर वह मोहन की बात को टाल देते।



पर मोहन की तो पक्की जिद या फिर यूं कहें उसके दिल में तो भगवान के प्रति अटूट प्यार भरा हुआ था कि उसने भगवान जी से मिलकर ही रहना है।



मोहन ने भगवान जी से मिलने का सोचा। वह यह तो जानता नहीं था कि भगवान रहते कहा है , इसलिए मोहन ने एक दिन सुबह-सुबह जल्दी उठकर खाना pack किया ,biscuits साथ में लिए और पीने के लिए शरबत भी अपनी bottle में डाल लिया और चल पड़ा भगवान की खोज में।



वह भगवान जी को ढूंढते-ढूँढ़ते दूर कहीं चला गया और पेड़ के नीचे बैठ गया।



उसके सामने ही एक बूढ़ी औरत भी बैठी थी।उन्होंने कितने दिन से कुछ नहीं खाया था और जिद्द में बैठी थी कि अगर भगवान आकर उसको कुछ खिलाएंगे तभी वह भोजन करेगी ,नहीं तो वह भूखी रहकर ही व्रत करती रहेगी।



मोहन उस बूढ़ी औरत के पास गया और बैग में से कुछ biscuits निकालकर आगे किये और अपने हाथों से उन्हें खिलाने लगा।



Biscuits के बाद ,शरबत भी  उन्हें पीने के लिए दिया।



दोनों बहुत खुश हुए और घर वापिस आ गए।



घर आकर मोहन ने अपनी मम्मी-पापा को बताया कि आज मैं भगवान जी से मिला और वो बहुत बूढ़े हो चुके है ,उनसे सही से चला भी नहीं जाता और शायद उनके घर पर खाना भी नहीं होता होगा क्योंकि वह बहुत भूखे थे।



वह बूढ़ी औरत जब घर गयी उसने अपने घर वालों से कहा कि आज भगवान जी ने मुझे खुद अपने हाथों से खाना खिलाया और वह बच्चे के रूप में मेरे पास आये थे और बड़े ही प्यार के साथ मुझे खिलाया-पिलाया।



मोहन की ज़िद्द थी कि भगवान जी से मिलना है और उस बूढ़ी औरत ने निश्चय किया हुआ था कि अगर भगवान  खुद आकर उसे खाना खिलाएंगे तभी वह खाना खायेगी।



दोनों की इच्छाएं पूरी हो गयी ,दोनों ने एक-दूसरे में भगवान को देख लिया और दोनों की ही मुरादे पूरी हो गयी।



मोहन को दर्शन हो गए और उस औरत को खाना भी खिला दिया।



दोस्तों ,कहानी तो आपने पढ़ ली पर अब जो असल बात है उसपर आते है। इस कहानी का मतलब यह है कि अगर हम भी भगवान पर अटूट भरोसा करते है लेकिन सोचते है कि अगर भगवान हमारे पास खुद चलकर आएंगे तभी हम कोई काम करेंगे ,तो हम गलत है। यह सच है कि ईश्वर हम सबको देखते है और अपने भक्तों की सहायता के लिए भी आते है। लेकिन यह जरूरी नहीं कि Bhagwan Ji खुद ही प्रकट हो, क्योंकि वह तो हम सभी के अंदर भी विराजमान है ही । बहुत बार Ishwar ऐसा करते है कि जो लोगों की जो भी दिक्कत होती है ,वह खुद किसी इंसान के स्वरुप के अंदर से प्रकट होकर हमारी मनोकामनायें (Wishes) पूरी कर देते है। जैसे कि इस कहानी में Bhagwan किसी रूप में नहीं आएं ,बल्कि उस बूढ़ी औरत के लिए Bhagwaan मोहन के रूप में आकर उसकी मनोकामना पूरी कर देते है और मोहन के लिए उस बूढ़ी औरत के रूप में उसकी भी मनोकामना पूरी कर देते है।



ईश्वर ऐसे ही दो लोगों का आपस में संपर्क करा देते है। कई बार आपने सुना भी होगा या आपके साथ भी हुआ  होगा कि आप जब कहीं बार गए होंगे या कभी भी आपके ऊपर कोई मुसीबत आयी होगी ,कई बार कोई ऐसा इंसान आपको मिल जाता है जो सारी की सारी मुश्किल का आसानी से हल करा देता है या उस मुसीबत से हमें बाहर निकाल देता है और ऐसा होने के बाद वह हमारी ज़िन्दगी से भी दूर चला जाता है यानी कि हमारा उसके साथ बाद में कोई contact नहीं रहता। यह सब ईश्वर ही करते है या तो वह हमारी सहायता के लिए किसी इंसान को भेज देते है या फिर क्या मालुम खुद ही इंसान का रूप लेकर हमारे सामने आये हो और हमें अपना असली रूप न दिखाना चाहते हो।



तो दोस्तों भगवान पर अटूट भरोसा तो रखिये लेकिन कभी ऐसा मत सोचिये कि अगर भगवान खुद हमारे पास आएंगे तभी हम मानेंगे कि भगवान है ,वह  खुद अपने रूप में नहीं आते ,बल्कि किसी इंसान को भेज देते है और उसके स्वरुप में खुद होते है या फिर खुद ही इंसान का रूप धारण करके आते है।



दोस्तों आपको ईश्वर से मुलाक़ात (Met With God ) कहानी कैसी लगी commnt करके जरूर बताये अगर पसन्द आयी तो दोस्तों के साथ Share करना न भूलें।



Facebook Page Like करना न भूले 
Google Plus Page पर भी Follow करें 

सोमवार, 5 सितंबर 2016

Teacher's Day Quotes In Hindi

दोस्तों सर्वेपल्ली राधाकृष्णन जी अपने विद्यार्थियों के प्रिये अध्यापक थे। इन्हीं के जन्मदिवस के अवसर पर Teacher's Day (शिक्षक दिवस) मनाया जाता है। इनके कुछ श्रेष्ठ विचार (Quotes) निम्नलिखित है। 



Dr Sarvepalli Radhakrishnan Ji की Biography पढ़ने के लिए click करे







मेरा जन्मदिन मनाने के बजाए अगर 5 सितम्बर का दिन शिक्षक  दिवस के रूप में मनाया जाए ,तो यह मेरे लिए सम्मान की बात होगी।






आध्यात्मिक जीवन ही भारत की प्रतिभा है।






सच्चे शिक्षक वह होते है जो हमें खुद के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करते है।






कोई भी व्यक्ति तब तक स्वतन्त्र नहीं है जब तक की उसे विचारों की स्वतंत्रता प्राप्त न हो।






मनुष्य के दिमाग का अगर सदुपयोग करना है ,तो यह शिक्षा के द्वारा ही संभव हो सकता है।






शिक्षा के परिणामस्वरूप ऐसे व्यक्ति का निर्माण होना चाहिए जो रचनात्मक हो और प्राकृतिक आपदाओं और ऐतिहासिक परिस्थितियों से लड़ सके।






मनुष्य जैसा जीवन व्यतीत कर रहा है ,वह सिर्फ उसका कच्चा स्वरूप है जैसा वह व्यतीत कर सकता है।






अगर विश्व भर में शांति स्थापित करनी है तो यह सिर्फ राजनितिक या आर्थिक बदलाव से नहीं आ सकती ,बल्कि इसके लिए मानव के स्वभाव में बदलाव आना जरूरी है।






किताबें ही एक ऐसा साधन है जिसके द्वारा हम अलग-अलग संस्कृतियों ,सभ्यताओं के बीच में पुल का निर्माण कर सकते है।






आनंद और आनंद भरा जीवन सिर्फ ज्ञान और विज्ञान के आधार पर व्यतीत किया जा सकता है। 


दोस्तों आपको Dr Sarvepalli Radhakrishnan Ji के Quotes लिखे हुए कैसे लगे , comment करके जरूर बताये और अपने दोस्तों और Teacher's के साथ share करना न भूले। 


एक और बात दोस्तों आप अगर इन Quotes को कहीं अन्य जगह पर शेयर करना चाहते है ,जैसे कि whatsaap वगैरह पर ,आप Link copy and paste करके तो आसानी से share कर ही सकते है ,लेकिन अगर आप Link नहीं भेजना चाहते ,तो आप text तो copy कर नहीं सकते ,इसीलिए images भी साथ में है ,इन Pictures को आप आसानी से download करके आगे share कर सकते है।


Facebook Page Like करना न भूले 
Google Plus Page पर भी Follow करें 



यह भी पढ़े :

रविवार, 4 सितंबर 2016

महान शिक्षक डॉक्टर सर्वेपल्ली राधाकृष्णन (Dr. Sarvepalli Radhakrishnan Biography In Hindi)






5 सितम्बर (5, September) का दिन भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन महान शिक्षक राधाकृष्णन का जन्म 1888 ई. को  तमिलनाडु के तिरुतनी ग्राम में हुआ। यह ब्राह्मण कुल में पैदा हुए थे। इनके पिता जी , सर्वपल्ली वीरास्वामी , राजस्थ का काम करते थे और इनके माता सीताम्मा गृहणी थे।


शिक्षा (Education)


राधाकृष्णन जी अपने जीवन प्रथम आठ वर्ष अपने ग्राम तिरुतनी में ही व्यतीत किये। इसके बाद इनके पिता जी ने इन्हें मध्य शिक्षा के लिए क्रिश्चियन मिशनरी संस्था लुथर्न मिशन स्कूल जोकि तिरुपति में था ,वहां भेज दिया। 1896 ई. से लेकर 1900 ई. तक इन्होंने यही से शिक्षा ग्रहण की। 1900 ई. से लेकर 1904 ई. तक वेल्लूर से इन्होंने शिक्षा ग्रहण की।  इसके बाद इन्होंने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज ,मद्रास से अपनी graduation की degree complete की। 


क्रिश्चियन school और college में पढ़ने की वजह से ही इन्हें बाइबिल  दी जाती थी और इन्होंने Bible के महत्वपूर्ण अंशों को कंठस्थ किया ,जिसके कारण इन्हें सम्मानित भी किया गया। इन्होने 1916 ई. में दर्शनशास्त्र M.A. की। इसके बाद मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में सहायक प्राध्यापक के रूप में चयनित हुए। इसके पहले यह tuisions  भी पढ़ाते थे। 



शिक्षक के रूप में प्रसिद्धि  (Sikshak Ke Roop Me Prasidhi)



इनके पढ़ाने का तरीका अन्य शिक्षकों से कुछ हटकर ही था।  डॉ. साहब अनेक विषयों के जानकार थे तथा हर एक बात को  उसकी गहराई से समझते और समझाते थे। किसी भी विषय को पढ़ाने से पहले यह खुद उसका achhi तरह से अध्ययन  करते थे और फिर विद्यार्थियों को पढ़ाते थे। डॉ. साहब ऐसे ऐसे व्याख्यान देते थे कि बच्चों को बहुत ही सरलता से सब कुछ समझ आ जाता था और कभी-कभी हास्य से भरपूर गुदगुदाने वाली कहानियां सुनाकर छात्रों को हंसाने के साथ-साथ शिक्षा भी दे दिया करते थे। 

इसी कारणों के कारण यह विद्यार्थियों के चहेते थे। 



धार्मिक विचार (Dharmik Vichaar)



धार्मिक दृष्टिकोण भी इनकी काफी अच्छी थी और यह धार्मिक भेद-भावों से भी कोसों दूर थे। लेकिन उस समय कुछ ईसाई लोग अनपढ़ हिन्दू लोगों को उनके धर्म के विरुद्ध ही बढ़काते थे कि हिन्दू धर्म में यह बातें गलत है ,वो बातें गलत है , वगैरह वगैरह। लेकिन ईसाईयों की यह सब बातें बिलकुल बेबुनियाद थी और बिलकुल झूठी थी ,जो भी वह लोग (क्रिश्चियन मिशनरी , ईसाई) कहते थे ,वह सब कुछ झूठ और अपने धर्म को ऊंचा साबित करने के लिए कहते थे। 


लेकिन राधाकृष्णन जी ने काफी ग्रंथों का ज्ञान प्राप्त किया और उन सभी लोगों के सारे शक भी दूर किये और उन्हें हिंदुओं के गौरवमयी धर्म के बारे में बताया और उन्हें जागृत कराया। 


इन्होंने सभी लोगो को बताया की हिंदु संस्कृति , हमारी भारतीय संस्कृति बहुत ही समृद्ध है और यह धर्म, ज्ञान ,सत्य और अहिंसा पर आधारित है। 


राधाकृष्णन जी किसी भी धर्म के विरुद्ध नहीं थे ,लेकिन उस समय क्रिश्चियन मिशनरी अपने ईसाई धर्म का प्रचार ,प्रसार बहुत ही अधिक कर रहे थे और वह लोग हिंदुत्ववादी विचारो को बुरा बताते थे। इसलिए डॉ. साहब ने अपने धर्म के प्रति विश्वास रखते हुए ,अनेक ग्रंथों और शास्त्रो का अध्यन किया था और फिर सभी लोगों को अपने धर्म के प्रति जागरूक किया। 


एक अन्य बात इनकी ध्यान रखने योग्य है कि इन्हें ईसाई धर्म के बारे में भी बहुत अच्छी जानकारी प्राप्त थी। 



शैक्षिक/सामाजिक विचार 


राधाकृष्णन जी सम्पूर्ण विश्व को ही एक school के रूप में मानते थे। इनके अनुसार  शिक्षक का काम सिर्फ छात्रों को शिक्षा देना ही नहीं है ,बल्कि शिक्षक को विद्यार्थी का बौद्धिक विकास भी करना चाहिए और उस में देश के प्रति सम्मान की भावना भी जागृत करनी चाहिए। इनके अनुसार शिक्षक को सिर्फ शिक्षा देकर ही नहीं सन्तुष्ट हो जाना चाहिए ,बल्कि छात्रों से प्रेम और सम्मान भी हासिल करना चाहिए। शिक्षक के गुणों को बताते हुए डॉ. साहब ने यह भी कहा है कि शिक्षक को निरंतर अभ्यास करते रहना चाहिए। इन्हीं विचारों के कारण राधाकृष्णन जी विद्यार्थियों के चहेते थे। 


राजनीति में सहयोग (Political Career)


1952 ई. में डॉ. राधाकृष्णन जी भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति के पद पर नियुक्त हुए। इन्होंने यह पद 1962 ई. तक सम्भाला। इसके बाद 1962 ई. में ही यह भारत के द्वितीय राष्ट्रपति बने। 

शिक्षक दिवस की मांग (Why Teacher's Day Is Celebrated In India in Hindi )


1962 ई. में जब यह राष्ट्रपति पद पर नियुक्त हुये थे ,तब इनसे मिलने इनके कुछ विद्यार्थी और कुछ साथी, मित्र इनसे मिलने आये और आग्रह किया कि 5 सितम्बर का दिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाये।  तब इन्होंने कहा कि , मुझे बहुत ख़ुशी होगी अगर मेरे जन्मदिवस का दिन सभी शिक्षकों को समर्पित हो। तभी से भारत में 5 September का दिन Teacher's Day के रूप में मनाया जाने लगा। 

भारत रत्न (Bharat Ratna)


1954 ई. में इन्हें भारत के सबसे बड़े नागरिक सम्मान ,भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 


अन्य सम्मान (Other Honor/Prizes)



  • 1931 ई. में इनको नाइट बैचलर (Knight Bachelor) का अवार्ड मिला जिसमे इन्हें सर की उपाधि दी गयी जोकि ब्रिटिश सरकार द्वारा दिया जाता है। लेकिन स्वतंत्रता के बाद इन्होनें इस सम्मान को वापिस कर दिया। 



  •  1938 ई. में फेलो ऑफ़ दी ब्रिटिश अकादमी (Fellow Of The British Academy) के  पुरस्कार के साथ सम्मानित किया गया। 


  • 1954 ई. में भारत रत्न (Bharat Ratna) इन्हें नवाजा गया। 


  • 1954 ई.  में इनको जर्मन द्वारा आर्डर पौर ले मेरिट फॉर आर्ट्स एंड साइंस (Order Pour Le Merit For Arts And Science) दिया गया जोकि असाधारण उपलब्धि के कारण दिया जाता है। 


  • 1961 ई. में दी पीस प्राइज ऑफ़ दी जर्मन बुक ट्रेड (The Peace Prize Of The German Book Trade) से विभूषित किया गया। जिसके लिये विश्व भर से एक साल में एक ही व्यक्ति को चुना जाता है।


  • 1962 ई. से इनके जन्मदिन को भारत में शिक्षक दिवस (Teacher's Day) के रूप में मनाया जाने लगा। 


  • 1963 ई. में दी ब्रिटिश आर्डर ऑफ़ मेरिट (The British Order Of Merit) मिला। 


  • 1975 ई. में टेम्पलेटों प्राइज (Tempelton Prize) दिया गया। यह Prize Templeton Foundation द्वारा  विश्व भर से एक ही व्यक्ति को दिया जाता है। इनके स्वर्गवास के कुछ महीनों बाद इन्हें यह सम्मान दिया गया था। 


  • 1989 ई. में ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University) द्वारा इनके नाम से स्कॉलरशिप (Scholarship) शुरू की गयी। 


यह भी पढ़े : जीवन में हमेशा सतर्क रहे (Always Be Careful In Life)


अंतिम समय 



राष्ट्रपति पद का कार्यकाल पूरा करके यह 1967 ई. में अपने घर में वापिस आ गए थे। वहां यह एक सादा जीवन व्यतीत करने लगे और इनका पहरावा भी इनका पारंपरिक सादा पहरावा था। 17 अप्रैल, 1975 ई. को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी ,इस संसार को छोड़कर स्वर्गवास को प्राप्त हुए। 



दोस्तों आपको Dr. Sarvepalli Radhakrishnan Ji के जीवन पर लिखा गया यह article कैसा लगा, comment करके जरूर बताये।



Facebook Page Like करना न भूले 
Google Plus Page पर भी Follow करें 




शुक्रवार, 2 सितंबर 2016

बिना सिम के भी कॉल कैसे मिल जाती है (How Emergency Number Works Without Sim In Hindi)




Emergency Call.........यानी कि आपातकालीन काल, यह एक ऐसी सुविधा है जिसे मुसीबत के समय में कोई भी व्यक्ति mobile में अगर sim न भी हो तो भी इस नंबर को मिला सकता है। यह सुविधा सरकार द्वारा जनता की सहायता के लिए दी जाती है । अगर हमारे mobile में sim card नहीं भी है, तो भी इस number को हम dial कर सकते है।



सिम न होने पर भी कैसे नंबर मिल जाता है (How Emergency Number Can Dial Without Sim Card)






ऊपर मैंने जो बात बताई कि सिम न होने पर भी नंबर मिल जाता है, यह बात तो अधिकतर सभी लोग जानते ही होंगे ।लेकिन बात यह आती है कि बिना sim के भी नंबर dial हो कैसे जाता है। यह एक ऐसा प्रश्न है ,जिसके बारे में अधिकतर लोग नहीं जानते और जब भी इसके बारे में वो सोचते है या हम जब अपने दोस्तों में बैठकर बातें करते है तो यही एक प्रश्न है ,जो लोगों को दुविधा में डाल देता है कि सिम कार्ड न होने पर भी नंबर कैसे मिल जाता है। बस यह वाली confusion दूर नहीं होती अधिकतर लोगों की।



तो दोस्तों आज आप लोगों को इस बारे में ही जानकारी दूंगा कि बिना sim card के भी emergency number कैसे मिल जाता है।



यह जानकारी सुनकर आपको बहुत आश्चर्य होगा कि sim card से signal नहीं आते। सिम कार्ड हमारे मोबाइल में सिग्नल नहीं देता बल्कि सिग्नल तो मोबाइल अपने आप ही खिंचता है।


अगर sim card से सिग्नल नहीं आते तो सिम का क्या काम है?




सिम कार्ड में कुछ information store होती है ,जिसे mobile phone read करता है, sim card के द्वारा ही mobile phone को यह पता चलता है कि आप किस network द्वारा registered है यानी की आपके पास कौनसी company ka sim है (example: Airtel, Aircel, Reliance Jio, Bsnl, Idea etc.) और सिम कार्ड में ही users ki details save होती है यानी कि कौनसे व्यक्ति द्वारा call की जा रही है, जब हम new sim लेते है तो उसके लिए identity proof (example: Aadhaar Card, License, Voter Id Card etc.) देना पड़ता है और हमारी यही details उस sim card में होती है कि हमारे द्वारा वह सिम उसे किया जा रहा है ।




यानी की सिम कार्ड सिर्फ इतना काम करता है कि वह mobile को हमारी details देता है ,जिससे वो network द्वारा हमारी कॉल आगे दूसरे व्यक्ति के नंबर पर transfer कर देता है। एक और बात हमारा क्या नंबर है, यह detail भी सिम कार्ड में ही सेव होती है।



लेकिन बात अभी भी यह आती है कि emergency number kaise dial hota hai.




तो इसका जवाब आपको अब मिल जाएगा। जैसा कि आपको अभी बताया कि sim card में हमारी details होती है और वो phone को बताती है कि हम कौनसे network द्वारा registered है और जब तक mobile phone में sim नहीं डलेगा तब तक mobile में सभी calls block होती है ताकि इसका गलत इस्तेमाल न हो सके और हम इसके इस्तेमाल करने का भुगतान भी कर सके। आपातकालीन काल हम इसलिए कर पाते क्योंकि mobile में आपातकालीन कॉल्स unblock होती है, यानी कि कुछ numbers जो internationally acceptable है ,उन numbers पर कोई भी किसी भी मोबाइल से काल कर सकता है। जो भी phone manufacturer companies होती है वो इन कुछ numbers की list को unblock रखती है ,मतलब की mobile phone इन कुछ numbers को मिलाने के लिए user की id वगैरह नहीं check करता और call मिला देता है।




इसी वजह से हम emergency number को बिना सिम कार्ड के भी मिला पाते है।


क्या इसमें कोई जादू है



एक अन्य प्रश्न जो सभी के दिमाग में उठता होगा कि आपातकालीन कॉल में क्या कोई magic trick होती है कि यह हर जगह से मिल जाता है चाहे फ़ोन में सिम हो पर सिग्नल न आ रहे हो।



यह बात भी थोड़ी confuse करती है अधिकतर लोगो कि वैसे तो जब हम coverege area से बाहर होते है तो सिग्नल नहीं आ रहे होते लेकिन फिर भी आपातकालीन कॉल करने का लिखा होता है ,तो क्या आपातकालीन कॉल कोई जादू है कि अगर network न भी हो तो भी मिल जाती है?



तो इसका जवाब है, "नहीं।" आपातकालीन कॉल कोई जादू नहीं, बल्कि यह किसी भी network tower से अगर mobile को सिग्नल मिल रहा है तो यह उसी टावर से call मिला को connect करता है।



एक और बात इसमें ध्यान रखने वाली है कि यह कॉल हर ऐसा नहीं कि कहीं से भी मिल जाए। अगर कोई ऐसी जगह है जहाँ पर सिग्नल नहीं आते तो उस जगह से आपातकालीन कॉल भी नहीं मिल सकेगी।



यह कॉल भी network के द्वारा ही काम करती है, बस फर्क सिर्फ इतना है कि यह user की आइडेंटिटी नहीं चेक करती ।



क्या सभी मोबाइल में आपातकालीन कॉल की सुविधा होती है



जी हाँ, सभी mobile phones में emergency call की suvidha होती है लेकिन मोबाइल कंपनी द्वारा इमरजेंसी नंबर अलग -अलग हो सकते है ,लेकिन फिर भी दो ऐसे नंबर है जो कि सभी मोबाइल फ़ोन्स से unblock होते है, 112 और 911 यह दो ऐसे इमरजेंसी नंबर्स है जो कि internationally acceptable है।



अब आप भी यह बात जान चुके है कि बिना सिम के भी इमरजेंसी नंबर कैसे डायल हो जाता है ,तो दोस्तों इस जानकारी को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूले।



तो दोस्तों आपको यह जानकारी "बिना सिम के भी आपातकालीन नंबर कैसे मिल जाता है ( How Emergency Number Works Without Sim) कैसी लगी comment करके हमें जरूर बताएं।  इसके बारे में बहुत से लोगों को confusion होती है या फिर बहुत लोगों को मालुम ही नहीं होता कि आखिर यह काम कैसे करता है , तो आप सभी लोगों को भी इसके बारे में पता लग जाए इसलिए आज आपके लिए यह जानकारी प्रस्तुत की।



अगर आप किसी को भी किसी भी जानकारी के बारे में कोई confusion हो तो आप comment करके या फिर contact form को भरकर संपर्क कर सकते है।



Facebook Page Like करना न भूले 
Google Plus Page पर भी Follow करें 

शनिवार, 27 अगस्त 2016

जीवन में हमेशा सतर्क रहे (Always Be Careful In Life)

जीवन में हमेशा हमें सतर्क (सावधान) रहना चाहिए, इसी पर पहले एक छोटी-सी कहानी(Hindi Story) पढ़िए फिर आगे -



नंदन वन में एक शेर(Lion) रहता था। एक बार की बात है वह जंगल में घूम रहा था ,घुमते घुमते उसके पैर में काँटा चुभ गया। काँटा चुभने के कारण शेर के पंजे में जखम बहुत गहरा हो गया और वह दौड़कर शिकार भी नहीं कर पा रहा था। शेर बहुत ही असहाय हो गया और लंगड़ाकर भी बहुत मुश्किल से चल पाता था।





वह शेर कितने दिनों से कुछ खा भी नहीं पाया ,उसकी हालत भूख मरने जैसी हुयी पड़ी थी।


यह भी पढ़े : अक्ल बढ़ी या किस्मत (Akal Badi Ya Kismat)


ऐसे ही लंगड़ाते-लंगड़ाते वह एक गुफा के पास पहुंचा। शेर को लगा शायद गुफा के अंदर उसे कोई शिकार मिल जाए ,जिसे खाकर वह अपनी भूख मिटा सके। लेकिन जब शेर अंदर गया तो गुफा खाली थी ,पर उसे इतना मालुम पड़ गया था कि गुफा में कोई जानवर जरूर रहता है। उसी जानवर के इन्तजार में शेर उसी गुफा में छिपकर बैठ गया।



उस गुफा में एक सियार(Jackal) रहता था। वह दिन भर बाहर घूमता और सूरज छिपने (sun rise) पर गुफा में आ जाता। वह सियार काफी चालाक(clever)  था और हर समय चौकन्ना रहता था। आज जब सियार अपनी गुफा में जाने लगे तो उसने गुफा के बाहर किसी बड़े जानवर के पैरों के निशान देखे ,जिससे उसे शक हो गया कि गुफा में कोई अन्य जानवर भी है।



उसने इस बात का पता लगाने के लिए कि कही गुफा में कोई अन्य जानवर तो नहीं ,एक तरकीब सोची। सियार गुफा से थोड़ी दूर गया और गुफा(Cave) को आवाज देकर बोला ,"गुफा....... । "



कुछ पल रूककर सियार फिर से बोला ,"ओ गुफा ,क्या हुआ ,आज तो बोलती क्यों नहीं ? क्या बात हो गयी ?"



यह भी पढ़े : मांस का मूल्य (Price Of Flesh)


अंदर से शेर सब सुन रहा था पर बिलकुल चुप था और उसे भूख भी बहुत ज्यादा लगी हुयी थी ,वह इसी इन्जार में था कि सियार जल्द-से-जल्द अंदर आये और उसे खाकर वह अपनी भूख मिटा सके। 



सियार फिर से बोला ," गुफा ,मैंने तुमसे पहले ही कह रखा है कि जिस दिन तुम मुझे अंदर आने के लिए नहीं कहोगी ,उसदिन मैं अंदर नहीं आऊंगा ,अगर तुम मुझे आने के लिए नहीं कहोगी, तो फिर मैं जा रहा हूँ। "



सियार की ऐसी बातें सुनकर शेर सोच में पड़ गया। शेर ने सोचा कि शायद गुफा सियार को हमेशा बुलाती ही होगी। शेर सोचने लगा कि कही सियार चले ही न जाए और उसे फिर भूख ही रहना पड़ेगा। शेर आवाज बदलकर बोला ," नहीं नहीं ,सियार राजा ,तुम मत जाओ , अंदर आ जाओ , मैं कब से तुम्हारा ही इन्तजार कर रही थी। "



सियार ने शेर की आवाज को पहचान लिया और उसकी मूर्खता पर हंसने लगा। वह वहां से चला गया और फिर कभी भी उस गुफा में नहीं आया। बेचारा मुर्ख शेर(Foolish Lion) उसी गुफा में भूखा-प्यासा रहकर मर गया। 


यह भी पढ़े : सत्संग क्यों जरूरी है (Why Satsang is Important)



तो दोस्तों ,आपने कहानी पड़ी कि कैसे सियार ने सावधान रहकर और अपनी सूझबूझ से अपनी जान जोखिम में पड़ने से बचा ली। 



हमें भी इसी तरह हर समय सावधान रहना चाहिए। चाहे वह अपनी सुरक्षा की बात हो ,या फिर वह किसी भी काम को लेकर हो। जो व्यक्ति हर समय सतर्क रहता है ,उसके साथ कुछ भी बुरा होने के Chances 80% तक कम हो जाते है। 



अब बात आती है कि हम क्यों सतर्क रहे ,न हो हमारा कोई दुश्मन है और न ही हम किसी के अधीन है, तो हमारा कोई क्या बिगाड़ सकता है। 



यह भी पढ़े : समझदार पत्नी (Intelligent Wife)


लेकिन यह सोच गलत है। सतर्क रहने का सिर्फ यही मतलब नहीं कि हमें किसी इंसान से हमें खतरा है। हम बाजार आते जाते है ,वहां भी हर समय सावधानी चाहिए कि हम सड़क की side पर तो चल रहे है ,कोई तेज गति से हमारी तरफ ही तो नहीं आ रहा। और जब हम खुद vehicle चला रहे होते है तब भी सावधानी चाहिए कि कहीं दूसरी तरफ से तेज रफ़्तार में आ रहा हो और कहीं उसकी गलती का खामियाजा हमें ही न भुगतना पड़ जाए।



तो हर समय सावधानी जरूरी है। यह बात तो हुयी अपनी जिंदगी के प्रति सावधानी की। लेकिन व्यापर में भी सावधानी बहुत जरूरी है। अब बात कहानी से थोड़ी बाहर की करते है। 



व्यापार में सावधानी इस प्रकार की अगर हम कोई भी काम करते है या फिर अपना काम आगे किसी को सौंप देते है तो सिर्फ उसी पर निर्भर न रहें बल्कि खुद भी एक बार check कर ले कि सब काम सही तो हुआ है न। क्योंकि अगर हमने काम आगे किसी worker को सौंप है तो हो सकता है वह इसको ज्यादा seriously न ले ,क्योंकि उसको अपनी तनख्वाह तक मतलब है (ऐसा हो सकता है ,जरूरी नही कि सभी ऐसे हो पर कुछ ऐसे होते भी है )। इसलिए अपना काम एक बार खुद चेक करें कि सभी काम सही हुआ हो। 


यह भी पढ़े : कबीरा अहंकार मत कर (Kabira Ahankaar Mat Kar)




अगर कोई Paper Work है ,चाहे आप Business Owner है ,या फिर एक Employee ,अगर आप Paper Work का  काम आगे सौंपते है तो भी सावधानी बहुत जरूरी ही कि कहीं कोई दूसरा आपसे Fraud करके आपके भोलेपन का फायदा न उठा ले और आपके साथ धोखा न हो जाए। Employee के लिए सावधानी इसलिए जरूरी है कि चाहे वो उसका अपना काम नहीं है लेकिन काम तो उसका ही है ,उसके Boss ने उसपर भरोसा करके उसे जिम्मेदारी का सौंपा है और उनका मान रखना चाहिए। वैसे भी चाहे किसी का अपना काम हो या फिर Job करता हो ,काम तो उसका अपना ही है क्योंकि उसी से वह अपने जीवन की जरूरतों को पूरा कर रहा है। 



एक बात हर एक Employee (Worker) के लिए ,"जो व्यक्ति अपना काम सच्ची निष्ठा और ईमानदारी से करता है ,जीवन में सफल भी वही होता है। "





दोस्तों आपको "जीवन में हमेशा सतर्क रहे" कहानी कैसी लगी comment करके जरूर बताये। इसमें पहले एक simple story है जो शायद आपने पहले भी सुनी हो ,लेकिन हमें इस कहानी से शिक्षा लेते हुए इसे अपने जीवन में भी उतारना चाहिए ,ताकि हम भी अपनी life की मुश्किलें को थोड़ा तो कम कर सकें और ऐसे ही थोड़ा-थोड़ा कम करते करते एकदिन हम सबकी life की मुश्किलें ख़तम हो जाएंगी अगर हम बस अपनी life के प्रति जागरूक रहेंगे।



अगर आपने E-Mail द्वारा Post प्राप्त करने के लिए अभी तक subscribe नहीं किया तो अन्य ऐसी ही कहानियां पढ़ते रहने के लिए subscribe करना न भूले। 



Facebook Page like करें
Google Plus Page पर Follow करें 



अगर आपके पास भी कोई कहानी है ,  जो आप हम सभी लोगों के साथ बांटना चाहते है तो आप contact कर सकते है ,अगर आपकी कहानी पसन्द आयी तो आपके नाम के साथ इस Blog पर प्रकाशित की जायेगी। 



अगर आप किसी special article से related उसपर inspirational story चाहते है ,तो आप उसका शिर्षक (Title) भी suggest कर सकते है ,अगर उसके related  मैं कहानी लिख सकता हुआ तो जरूर लिखूंगा।