शनिवार, 13 मई 2017

Mother's Day Quotes In Hindi

माँ का प्यार तो असीम होता है और कोई भी कितना ही क्यों न पढ़ा-लिखा हो जाए या फिर कितना भी बढ़ा पंडित-विद्वान क्यों न बन जाए ,लेकिन माँ के प्यार का गुणगान गाने के लिए शब्द किसी के पास नहीं है। क्यूंकि ऐसा कोई शब्द ही नहीं ,जिससे माँ की ममता के बारे में कुछ भी कहा जाए। लेकिन फिर भी जितना हो सके ,माँ के प्यार को शब्दों के रूप में व्याख्यान करने की कोशिश की ही जाती है ताकि माँ की ममता के गुणों को गाया जा सके। 


दोस्तों कुछ ऐसा ही GyanPunji पर Mother's Day के उपलक्ष्य में किया जा रहा है कि माँ के प्यार को शब्दों के रूप में भी प्रकट किया जा सके । आज आपके साथ कुछ quotes/images शेयर करने जा रहा हूँ ,जो आप अपनी मम्मी से मदर्स डे के दिन प्यार का इजहार करने के लिए उन्हें भेज सकते है। 

तो दोस्तों आप यह images download कीजिये और send कीजिये अपनी प्यारी-प्यारी Super-Mom को। 

Mother's Day Quotes In Hindi की video देखे 






Mothers Day Greetings In Hindi







माँ अपने बच्चों की मुसीबतो से रक्षा चट्टान बनकर करती है।





दुनिया मे सिर्फ माँ ही एक ऐसी है,जो अपने बच्चो की खुशी के लिए 24घण्टे भी काम करती रहे, लेकिन फिर भी नही थकती।








सिर्फ मां-बाप ही अपनी संतान को उसके भले के लिए मारते है और इसी मार की वजह से सन्तान को जिंदगी में कही और से ठोकरे नही खानी पड़ती।




अपने बच्चो की खुशी के लिए मां कुछ भी कर सकती है।




जिंदगी में चाहे हर एक चीज का मोल लगा देना, लेकिन माँ-बाप के प्यार को कभी




मां से बेहतर डॉक्टर कोई और हो ही नही सकता।




कभी भी ऐसा वक्त न आने देना ऐ दोस्त
कि मां रोये और तू हंसे
अगर कभी ऐसा हो गया
तो समझ लेना तूने अपनी तकदीर गंवा दी।








आज लाखो रुपये खर्च के भी
वो खुशी नही मिलती
जो स्कूल जाते वक्त मां से मिला
एक रुपया खर्चने से मिलती थी।




मां-बाप से बढ़कर कोई भी प्यार नही कर सकता।




जब दुनिया भर की दवाएं भी काम नही कर पाती
तो माँ की मांगी एक दुआ ही सब दवायो से श्रेष्ठ होती है।




दुआ से बढ़कर कोई दवा नही,
मां के प्यार से बढ़कर कोई प्यार नही।




सुपरमैन सुपरवुमन के बारे में मैं नही जानता,
लेकिन मेरी माँ Super Mom जरूर है।




जिंदगी में कभी भी इतने ऊंचे मत उठना
कि माँ-बाप के सामने भी बड़े बनकर रहने लगो।




मां की ममता से बड़ा दुनिया मे कुछ भी नही।








मां के प्यार के लिए क्या शेर लिखूं ,मां ने ही तो मुझे शेरों के शेर बनाया है।

दोस्तों अगर आपको मातृ दिवस पर यह विचार पसंद आये तो कमेंट करके हमारा होंसला जरूर बढ़ाये ताकि आगे भी हम आपके लिए ऐसे ही बढ़िया-बढ़िया कोट्स लिखते रहे और अगर सच में पसंद आये तो अपने दोस्तों के साथ भी जरूर शेयर करे ताकि वह भी अपनी super-mom को यह quotes भेज सके।


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मातृ दिवस पर अनमोल विचार
Mother's In 2017 is on 14May 2017

सोमवार, 1 मई 2017

समझदार व्यक्ति भी मूर्ख हो सकता है (Samjhdaar Ya Fir Murkh)

दोस्तों हमेशा याद रखे ,जरूरी नही कि नासमझ व्यक्ति ही मूर्ख हो, कई बार समझदार व्यक्ति भी मूर्खो से भी बदतर काम कर जाते है।



पहले यह कहानी पढ़िए-






पुराने समय की बात है एक मजदूर अपने गधे के साथ काम करके अपने गांव वापिस लौट रहा था। रास्ते में उसको एक चमकीला पत्थर दिखाई दिया ,उसे वह पत्थर पसन्द आ गया और उसने अपने गधे के साथ उस पत्थर को बांध दिया और वापिस अपने गांव को चलने लगा।



रास्ते मे उसे एक जोहरी दिखा, उसने गधे पर उस पत्थर को देखा तो वह समझ गया कि मजदूर नासमझ है, उसे इस पत्थर की कीमत का नही पता और वह जोहरी उस मजदूर के पास गया और उस पत्थर को उससे मांगा। मजदूर बोला कि वह उसे यह पत्थर 1000 रुपये में देगा।

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जोहरी ने कहा, "नही, मैं अधिकतम इसके 500 रुपये ही तुम्हे दूंगा और अगर तुम 500 रुपये में यह पत्थर मुझे देना चाहते हो तो दे दो, नहीं तो तुम्हारी मर्जी ।" लेकिन मजदूर ने पांच सो रूपये में वह पत्थर देने से इनकार कर दिया।



जोहरी भी यह सोचकर आगे चल पड़ा कि वह तो अनपढ़ मजदूर है,उसे इस पत्थर की कीमत क्या मालूम होगी? और वह अपने आप उसके पास आएगा और 500  रुपये में ही वह पत्थर दे देगा।



आगे चलते-चलते मजदूर को एक और जोहरी मिला। वह भी उसके पास पत्थर देखकर हैरान हुआ। दूसरा जोहरी भी मजदूर के पास आया और बोला कि ," क्या तुम मुझे अपना यह पत्थर बेचना चाहोगे?"

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मजदूर बोला, "ठीक है, लेकिन इसके बदले में मैं तुमसे 2000 रुपये लूंगा। दूसरे जोहरी ने तुरंत दो हज़ार रुपये अपनी जेब से निकाले और उससे वह पत्थर ले लिया।



पहले वाला जोहरी भी सोच रहा था कि कही इतना कीमती पत्थर हाथ से न चला जाये ,वह उसी रास्ते को ही चल पड़ा जिधर मजदूर गया था और उससे वह पत्थर मांगा।



मजदूर बोला, "वह पत्थर तो अब मैंने 2000 रुपये में बेच दिया।"

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जोहरी बोला,"तुम भी बिल्कुल पागल, नामसझ हो, उस पत्थर की कीमत लाखों रुपये की थी, जो तुमने सिर्फ 2000 रुपये में बेच दिया।" और भी उसे बहुत बुरा बोलै।



मजदूर हंसते हुए बोला, "हुजूर मैं तो हूं ही अनपढ़। अगर आपको इसकी असल कीमत मालूम थी ,फिर भी आपने वह पत्थर मुझसे क्यों नही लिया, जबकि आपको तो मैं सिर्फ 1000 रुपये में दे रहा था? आपने सिर्फ 500 रुपये के लालच में लाखों का नुकसान कर लिया। मैं तो अनपढ़ हूँ ,लेकिन आप तो पढ़े-लिखे होकर भी मूर्ख निकले, जो अपने इतना नुकसान कर लिया।"



दोस्तों, अब खुद ही बताइए बेवकूफ कौन? मजदूर को तो उस पत्थर की कीमत ही नही मालूम थी, इसलिए उसने सस्ते में बेच दिया। लेकिन पहला जोहरी, जिसे उस पत्थर की असल कीमत भी मालूम थी और उसे वह बहुत ही सस्ते में मिल भी रहा था ,लेकिन फिर भी उसने न खरीदा सिर्फ 500 रुपये के लालच में।






दोस्तों अगर जिंदगी में कभी ऐसा मौका आये कि कोई बहुत ही कीमती चीज आसानी से या बहुत कम कीमत पर मिल रही है और उस वस्तु का हम उपयोग भी कर सकते है तो कभी भी यह लालच नही करना चाहिए कि शायद थोड़ी और ही सस्ती मिल जाये, उसका सौदा उसी समय कर लेना चाहिए। वर्ना हमे भी मूर्ख बनने में समय नही लगेगा।

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Friends, आपको यह कहानी समझदार व्यक्ति भी मूर्ख हो सकता है कैसी लगी , हमे कमेंट करके जरूर बताये। अगर पसन्द आयी तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करना न भूले और हमे subscribe जरूर करे।

शनिवार, 22 अप्रैल 2017

मुसीबतें कमजोर बनाती है या फिर मजबूत?

दोस्तों जिंदगी में एक बात हमेशा याद रखना -

मुसीबतें तो सभी लोगो पर आती है ,
लेकिन यही मुसीबतें कईयों को
बिखेर देती है और
कईयों को निखार भी देती है ।



दोस्तों यह हम पर निर्भर है कि हम मुसीबतों का सामना किस प्रकार और कैसे करते है ? मुसीबतें तो सभी लोगों पर आती है ,ऐसा कोई नहीं होगा जिसकी जिंदगी में कोई मुसीबत न आयी हो ,लेकिन यही मुसीबतें अगर लोगो को बिखेरती है तो यही कई लोगो को निखार भी देती है । फर्क सिर्फ हमारी सोच और हमारे कर्मों का है , हम उन मुसीबतो में कैसा और क्या सोचते है और कैसा और क्या करते है ? जो हिम्मत और होंसला हार जाते है मुसीबतें उन्हें हरा देती है लेकिन जो लोग इन्ही मुसीबतों में भी इनका डटकर सामना करते है ,वही लोग कुछ अलग बनकर हम सबके सामने आते है और एक आम इंसान से ख़ास इंसान बन जाते है ।



उन लोगो में और हम में कोई फर्क नहीं होता ,फर्क सिर्फ होंसले और हिम्मत का है । कुछ तो ऐसे लोग भी होते है जिनके पास कुछ भी नहीं होता लेकिन फिर भी हिम्मत न हारकर सभी के लिए मिसाल कायम कर देते है । आपने Nick Vujicic का नाम तो सुना ही होगा ,वह भी हम सभी के लिए एक मिसाल है ,जिनके न हाथ है और न ही टाँगे ,लेकिन फिर भी एक सफल इंसान बन गए । क्या इन्होने अपनी जिंदगी में हार मान ली ? अगर यह भी हिम्मत हार जाते तो क्या आज यह इस मुकाम पर होते जिस पर आज है? इनके साहस और अटूट मेहनत कि वजह से ही आज यह पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना पाए और क्यूंकि इन्होने जिंदगी में आयी विपत्तियों को चुनौती पूर्ण स्वीकार किया और उन सभी मुसीबतों को पार करते हुए वह किया जो यह करना चाहते थे और अपनी कड़ी मेहनत के कारण एक सफल इंसान बन गए ।



इसलिए दोस्तों अगर जिंदगी में कभी भी कोई भी मुसीबतें आये तो हिम्मत और होंसला न हारिये ,और कभी यह न कहिये कि मेरे पास यह नही, वो नही, आपके पास सांसे तो है न? जब तक सांसे है,तब तक सब कुछ है। जब आप मुसीबतों का सामना होंसले के साथ करना सीख जाएंगे तब आप जिंदगी में कभी भी बिखरेंगे नहीं ,बल्कि हमेशा निखरते ही जाएंगे 

गुरुवार, 20 अप्रैल 2017

माँ का प्यार और बच्चों की झूठी आजादी

दोस्तों यह कहानी आजकल की सच्चाई है। मां का प्रेम तो असीम होता है, लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नही पाते। वह तो बस थोड़ा पैसा क्या कमा लिया अब उन्हें आजादी चाहिए और वह अपने माँ-बाप को संभालने में ही असमर्थ हो जाते है।



चलिए पहले एक मां के दिल की व्यथा के बारे में जानते है।



प्रीतम अपने माँ-बाप का इकलौता बेटा था। माता-पिता ने उसे पढ़ा-लिखाकर एक बढ़िया इंसान बना दिया और वह अच्छी जॉब पर भी लग गया। जॉब के कारण प्रीतम (जॉब शहर से बाहर लगी) घर वालो से दूर रहता था और वैसे भी पढ़ा-लिखा होने के कारण उसे अब आजादी चाहिए थी और वह घर वालों से दूर ही रहना पसंद करता था।






समय गुजरा ,विवाह लायक उसकी उम्र हुई तो उसका विवाह भी हो गया। जहां पर प्रीतम रहता था ,वहां कई बार उसके माता-पिता ने भी आने की इच्छा जाहिर की, लेकिन उनका बेटा तो हमेशा कुछ-न-कुछ कहकर टाल ही देता और कहता कि काम के कारण वह उनके पास तो रुक पायेगा नही और प्रीति (प्रीतम की पत्नी) के पास भी समय कम ही होता है, आप यहां आकर क्या करेंगे? क्योंकि इस आजकल के लड़के को तो आजादी चाहिए थी और घर वाले अगर कुछ कह दे तो वह इसे पसन्द न था, इसलिए अपने पास बुलाने से इनकार कर दिया।

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कुछ समय और गुजरा, प्रीतम के पिता जी का देहांत हो गया और अब उसकी मां अकेली कैसे और कहा रहती? प्रीतम अपनी मां से बोला, "मम्मी, आप तो जानती ही है कि हमे दिन भर कितने काम होते है। आप वहां आएंगी तो बेवजह आपको तकलीफ होगी,इसलिए हमने सलाह की है कि आपको हम वृद्ध आश्रम छोड़ दे,वहां वह अच्छे से आपका ख्याल रखेंगे। अगर आपको कोई भी तकलीफ हो तो आप हमें कह दीजियेगा।"



ज्यादा प्रीतम क्या बोलता? मां तो मां होती है और वह समझ गयी कि उसे अपने पास नही रखना चाहते और अंदर ही अंदर अपने दुख को दबा लिया और उनकी खुशी के लिए वृद्ध आश्रम में रहने को भी हां कर दी।



वृद्ध आश्रम में कभी कभी दोनों बच्चे(बेटा और बहू) अपनी मां से मिलने आ भी जाते लेकिन मां उनसे कभी कोई शिकायत न करती। समय बीता.... उनकी भी (माता की) उम्र हो चली और वह भी अंतिम सांसे ले रही थी, तो Formality के लिए उनका बेटा और बहू भी मिलने आ गए। मां ने अपने बेटे से एक ही बात कही, "बेटा.... मैंने आज तक तुमसे कुछ न मांगा, लेकिन जिंदगी के अंतिम पलों में तुमसे कुछ मांगना चाहती हूं।"



बेटा हैरान कि पता नही मां इस समय भी क्या कह देगी? लेकिन फिर भी बोला-" जी, बोलिये.... मैं जरूर आपकी इच्छा को पूरा करने का प्रयास करूंगा।"

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मां बोली," बेटा ... वृद्ध आश्रम में कुछ cooler वगैरह लगवा देना और साफ तथा ठंडे पानी के लिए water cooler भी लगवा देना। बस यही अंतिम इच्छा है। क्योंकि यहां पर गर्मियों में गर्मी बहुत होती है और कोई cooler या AC भी नही है। पीने के पानी की भी काफी दिक्कत होती है।



बेटा फिर थोड़ा हैरान हुया और फिर बोला,"लेकिन मां.... अब क्यों? आजतक तो आपने मुझसे कोई शिकायत नही की आश्रम के बारे में। और अब, इस अंतिम समय मे यह सब?"




मां बोली(आंखों से कुछ आंसू भी निकलने को हो रहे थे) ,"बेटा मेरी तो कोई बात नही, सब कुछ सह लिया और कुछ अधिक परेशानी भी न हुई। लेकिन मैं अपने बेटे को जानती हूँ, अगर कल को उसे यहां आना पड़ा तो वह यहां आराम से न रह पाएगा और उसे बहुत कठिनाई होगी यहां रहने में ,इसलिए अंतिम समय मे यह सब मांग रही हूँ।"



आगे क्या हुआ, क्या नही हुआ.....यह सब छोड़िये..... कहानी इतनी ही है। माँ तो सब कुछ समझती है, बेटे के नकारने के बावजूद भी अंतिम समय मे भी उसके बारे में ही सोचती रही। लेकिन वही बेटा अपनी मां के बारे में एक पल भी न सोच सका और सब कुछ भूलकर उसे ही अपने से दूर कर दिया,जिसने उसका हमेशा से ख्याल रखा।

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दोस्तों , यह आजकल की सच्चाई बनती जा रही है कि बच्चे अमीर होने के बावजूद भी अपने माँ-बाप को नही संभाल पाते जबकि मां-बाप गरीब होने के बावजूद भी अपने बच्चों का भली-भांति पालन-पोषण करते है और उन्हें पढ़ा-लिखाकर इस काबिल बनाते है कि वह कोई बड़ा अफसर वगैरह बन जाये। शायद ऐसे बच्चे अफसर बन भी जाते है, लेकिन सिर्फ अपने ही माँ-बाप के लिए। इनपर ही रौब करना,इनको ही बोलना और सिर्फ और सिर्फ अपनी मन-मर्जी करना। इतने बड़े अफसर हो जाते है कि माता-पिता को ही छोटा बना देते है।



wow..... बढ़िया....  अधिक पढ़ा-लिखा यही होता होगा? शायद आजकल के युग मे अमीरी का यही मतलब होता होगा कि कुत्तों को पाल लो,वह घर के सदस्य बन सकते है,उन्हें घूमा-फिरा सकते है,उनके लिए समय है , इसमे ही शानो-शौकत है। लेकिन अपने ही मां-बाप को नही संभाल सकते। उनके लिए जरा-सा समय भी नही है। उनके साथ कही घूमने नही जा सकते।






Great....... शायद आजकल का समय तरक्कियों मे है। इतनी तरक्किया हो रही है कि आजकल के लोग दूसरों के साथ इतने मिलनसार हो गए है कि बाकी के सभी लोग हमारे अपने है, जानवर परिवार का अटूट हिस्सा है। लेकिन जो अपना ही परिवार है,जिन्होंने हमे शिक्षा दी,पढ़ाया-लिखाया, हमारे लिए सब कुछ किया, सिर्फ वही नही हमारे.... उनके संस्कार अब पुराने है, वह old-age, old-people है जोकि young को कहा compete कर सकेंगे और इसलिए उनको साथ रखने में शर्म महसूस होगी ,लेकिन जानवर को पालने से इज्जत बढ़ेगी और लोग animal-lover कहेंगे।



बढ़िया सोच है भई.......??? बढ़िया है ..... या घटिया.... यह तो आप सब समझ ही गए होंगे? मेरा इस आर्टिकल को लिखने का मकसद सिर्फ इतना ही है कि कोई भी इतना न पढ़-लिख जाए कि घर वालों पर ही अफसरशाही झाड़ने लगे। पढ़ो-लिखो.... खूब कमायों.... लेकिन उस पढ़ाई-लिखाई का कोई फायदा नही जो अपनो से ही दूर कर दे और उस कमाई का भी कोई फायदा नही, जिसे कमाकर अपनो के लिए ही समय न बचे।

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दोस्तों, इस बार नही कहूंगा कि यह post अगर अच्छी लगी तो जरूर share करे। अच्छी लगी या बुरी लगी, share करना या share नही करना,यह सब आपकी मर्जी.....  लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि GyanPunji पर आने वाले समय मे भी ऐसी ही आलोचना से भरपूर पोस्ट आप जरूर पढ़ते रहेंगे। अगर यह सब पसन्द नही आया तो शायद Gyan Punji पर आपके लिए Gyan ही न हो। क्योंकि Gyan Punji पर आपको सिर्फ वही मिलेगा (mostly) जोकि असल ज्ञान होगा। इसलिए अगर अगर आगे भी ऐसे ही पढ़ते रहना चाहते है तो Like ,Follow और Subscribe करना न भूले।

सोमवार, 17 अप्रैल 2017

जरूरी नहीं कानों से सुनी हुयी बात सच ही हो

Inspirational Hindi Joke


दोस्तों आप पहले भी GyanPunji पर Inspirational Jokes पढ़ चुके है और इसी को आगे ले जाते हुए आपके सामने एक और ऐसा ही चुटकला पेश है ,जो आपको हंसाएगा तो है ही,साथ ही साथ शिक्षा भी देगा।



चलिए पहले चुटकला पढ़ते है-






पप्पू दुकान पर हरी मिर्च खरीदने गया और दुकानदार से बोला - भैया, लाल मिर्च देना...


दुकानदार- हरी मिर्च लाना.....😀😀😀


पप्पू, भैया लाल मिर्च जल्दी मंगवा दो


दुकानदार - हरी मिर्च जल्दी ले आ😁😁😁


पप्पू गुस्से से बोला, भाई साहब मैं कब से लाल मिर्च मांग रहा हूँ और आप हरी मिर्च मंगवाये जा रहे है, क्या आपको सुनता नही? क्या बात हो गयी?😡😠😡😠


दुकानदार- नही, नही.... भाई साहब,,, हरी तो मेरे यहाँ काम करने वाले लड़के का नाम है..... वो आपको लाल मिर्च ही लाकर देगा। यह लो मिर्च भी ले आया।

😃😄😃😄😃😄😃😄



hahahahaha....... मज़ेदार लगा न चुटकला? शायद आपने पहले पढ़ा-सुना भी हो। लेकिन यह सिर्फ एक चुटकला ही नही बल्कि इसमें भी हमारी जिंदगी की हक़ीक़त छिपी हुई है



दोस्तों, कई बार हमें लगता है कि ,जो हमने सुन लिया वह बिल्कुल सच ही है और कानों से सुनी हुई बात कभी झूठ नही हो सकती। और हम बिना सोच-विचार किये एकदम से नतीजे पर पहुंच जाते है और वही मान लेते है जो हमने कानों से सुना हो।



इस हिंदी चुटकले में भी कुछ ऐसा ही है। ग्राहक लाल मिर्च लेने आया ,लेकिन shopkeeper बोला हरी मिर्च लाना। और ऐसे ही ग्राहक को गुस्सा आ गया कि वह तो लाल मिर्च मांग रहा है ,लेकिन दुकानदार हरी मिर्च- हरी मिर्च बोले जा रहा था। लेकिन वह तो हरी को कह रहा है कि हरी.. मिर्च लाना, जोकि उसके यहाँ काम करने वाले लड़के का नाम है।



दोस्तों हम भी life में ऐसे ही थोड़ी-सी बात सुनकर ही उसे सच मान लेते है बिना पूरी हकीकत जाने। इसलिए ही हमारे बुजुर्ग कह गए है कि जरूरी नही कि कानो से सुनी हुई बात और आंखों से देखी गयी चीज सच ही हो। आंखें भी धोखा दे जाती है, इसपर Hindi Inspirational Joke पढ़े।



कुछ ऐसा ही हमारे साथ life में हो जाता है और हम एकदम से अपने दोस्तों पर या किसी व्यक्ति पर गुस्सा हो जाते है और कई बार तो हमेशा-हमेशा के लिए ही बुलाना छोड़ देते है। अब आप ही सोचिए कि अगर ग्राहक ऐसे ही चिढ़कर एकदम से चले जाता तो क्या उसे कुछ पता चलना था? क्या दुकानदार ने समझ पाना था कि वह एकदम से भागा क्यों ? अगर ग्राहक गुस्सा अंदर ही रख लेता और मिर्च लेकर चल जाता तो  उसने तो यह ही समझना था कि शायद दुकानदार पागल होगा लाल मिर्च को हरी कहता है।






अगर ग्राहक गुस्से से न बोलता लेकिन अंदर-ही-अंदर गुस्सा रखता तो शायद आगे से वह दुकान पर भी न आता और दुकानदार और ग्राहक दोनों ही असलियत न समझ पाते। दोस्तों, वैसे तो यह चुटकले के साथ आपको reality में जो होता है वह समझा रहा हूँ, लेकिन अगर आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है ,तो इसे जरा अपनी life की किसी घटना के साथ जोड़कर देखिए। शायद कभी-कभी हम भी एकदम से गुस्सा कर जाते है ,लेकिन बाद में जब असलियत का पता लगता है फिर अंदर से हमे बहुत बुरा लगता है और कई बार ऐसा भी हो सकता है कि हमने अपने किसी साथी को बुलाना छोड़ दिया हो, लेकिन वह यह न समझ पाया हो कि असल मे उसे बुलाना छोड़ा क्यों? क्योंकि कोई बात हो ही न, और हमने आधी अधूरी बात सुनकर उसे पूरा सच मान लिया हो।



तो दोस्तों यह सच नही कि जो हमने सुना ,वह सच ही हो। कई बार कानों से सुनी हुई बाते भी सच नही होती बल्कि वह आधा सच होती है,जो सच तो है,लेकिन वह सच नही जिसे हम जानना चाहते है। जैसे कि महाभारत के युद्ध मे भी जब कहते है अश्वथामा मर गया, लेकिन वह अश्वथामा नही मरा होता, जो गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र था, बल्कि हाथी नामक अश्वथामा मरा था। द्रोणाचार्य ने भी एकदम से उसी को सच मान लिया ,लेकिन  उनका पुत्र तो जीवित था।  इसलिए दोस्तों कभी भी एकदम से निर्णय नही लेना चाहिए। पहले बात को सुनना चाहिए, फिर समझना चाहिए, फिर हर एक पहलू के बारे में सोच-विचार करना चाहिए, अगर इसमें असफल हो जाये तो फिर सामने वाले से ही पूरी बात के बारे में जानना चाहिए और फिर ही किसी निर्णय पर पहुंचना चाहिए। अगर यह सब भी न कर सके फिर कम-से-कम एक बार वही पर गुस्सा ही कर लीजिये क्यूंकि शायद आपका गुस्सा ,आपकी गलतफहमी दूर कर दे। वैसे गुस्सा करना तो नहीं चाहिए ,लेकिन ऐसी situation में गुस्सा शायद आपके रिश्ते को बचा ले। जानिये गुस्सा करना भी कैसे लाभदायक हो सकता है। 



Friends , अब आप समझ गए होंगे कि कैसे हमे हमारे कान भी धोखा दे सकते है और कैसे एक चुटकला भी हमे शिक्षा दे सकता है। हम अगर सीखने की इच्छा रखे तो हम किसी भी चीज से सीख सकते है ,example तो आपके सामने ही है।



दोस्तों , आपको कान से सुनी हुई बात भी झूठ हो सकती है यह post कैसी लगे हमे जरूर बताएं, आगे भी ऐसी ही inspirational stories hindi में पढ़ते रहने के लिए GyanPunji ब्लॉग को पढ़ते रहना न भूले क्योंकि सच्चा ज्ञान ही मनुष्य की असल पूंजी है ।



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रविवार, 9 अप्रैल 2017

सच्चा भक्त कौन और कैसा होता है? (Who Is True Devotee)

दोस्तों आज GyanPunji पर भक्ति के विषय में लिखने का प्रयास करूँगा। वैसे भक्ति और प्रेम ,यह दो ऐसे  शब्द है ,जिनका शब्दो में वर्णन करना बहुत ही कठिन है और जिस मनुष्य में यह दो भाव जितने गहरे होते जाते है ,उसके लिए शब्द उतने ही कम हो जाते है। क्योंकि इन भावो की जितनी गहराई होगी ,वहां शब्द उतने ही फीके हो जाते है ,यह भाव तो शब्दो और अर्थों से कही अधिक गहरे है और इसीलिए मुख से इनका वर्णन भी कठिन है क्योंकि यह भाव तो दिल और आत्मा से जुड़े होते है।



भक्ति......... ? क्या है भक्ति ? क्या सिर्फ किसी देवी-देवता की पूजा करना ही  भक्ति है ? या फिर किसी ख़ास पाठ का नियमित पाठ है भक्ति ? या फिर देवी-देवता के विषय में ज्ञान को भक्ति कहते है ?

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क्या इन्ही में से किसी एक को या फिर सभी को भक्ति कहते है ? चलो पहले इन तीनो पर गहराई से विचार करते है और फिर बाद में असल भक्ति क्या है ,उसके बारे में बात करेंगे।


क्या देवी-देवता की पूजा करना ही भक्ति है ?



कई लोग सोचते है कि किसी देवी-देवता की पूजा कर ली तो वह उनका सच्चा भक्त हो गया। लेकिन क्या यह सच्ची भक्ति है ? Mostly जो भी ऐसा सोचते है ,वह करते क्या है कि शरीर या मुख से तो देवी-देवता की पूजा कर रहे होते है ,लेकिन उनका मन कही और ही भटक रहा होता है। मंदिर में गए....... समय थोड़ा अधिक लग गया ,अरे यह क्या ....... साथ ही भक्त सोचने लग जाएगा .....,यार ,मेरा तो सीरियल शुरू हो गया होगा ,चलो जल्दी-जल्दी घर चलता हूँ ,जितना छूट गया होगा वह youtube से देख लूंगा। अगर सीरियल नहीं ,तो फिर cricket match का क्या बना ? कौन जीत रहा होगा ? कोहली ने शतक लगा दिया होगा या फिर आउट हो गया होगा ? चलो फटाफट घर जाकर देखते है। अगर ज्यादा ही जल्दी होगी तो फिर ,भक्ति की थोड़ी-सी break और मोबाइल का lock खोल और Cricbuzz से score देखने शुरू।






यह भक्ति कैसी हुयी ,समझ ही गए होंगे सभी।



अब दूसरी भक्ति ..........

नियमित पाठ 


नियमित पाठ करना अच्छी बात है। इससे इंसान में अच्छे विचारों के साथ-साथ सकारत्मकता भी आती है। लेकिन कई लोग ,दूसरे लोगो के सामने ......मुझे यह पाठ आता है ,मुझे वो पाठ आता है...... या फिर पाठ करते-करते ध्यान वही Cricbuzz या फिर TV Serial की तरफ।



यह भक्ति भी कैसी हुयी आप समझ ही गए होंगे।

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अब तीसरी भक्ति की बात करते है-


देवी-देवता के बारे में जानकारी ,कुछ अधिक ही जानकारी



धर्म के बारे में जानकारी होना अच्छी बात है ,लेकिन धर्म के बारे में जानकारी होकर अपने ही धर्म या किसी दूसरे के धर्म के खिलाफ बोलना ,यह क्या बात बनी ? वो भी बिना किसी मतलब के। धार्मिक बन गए ,धर्म के बारे में भी जानकारी है ,लेकिन उस जानकारी का इस्तेमाल किसी को नीचा दिखाने के लिए करना ,यह क्या बात बनी ? अब अधिकतर सभी लोग सोचेंगे कि कोई धार्मिक जानकारी का कैसे गलत इस्तेमाल कर सकता है।  बहुत-से ऐसा सोचेंगे ही ,ऐसी ही मेरी एक Post पुस्तके भी सोच-समझकर पढ़नी चाहिए में भी अधिकतर लोगों ने यही सोचा कि कोई गलत किताब क्यों लिखेगा ,उसका जवाब भी मेरे पास था ,लेकिन उन किताबों का मैं नाम नहीं बता सकता था ,क्योंकि अगर नाम बता दिया तो लोग उसके बारे में और भी अधिक जानने लग जाएंगे। 


लेकिन भक्ति की जानकारी कैसे गलत इस्तेमाल होती है? ,यह आपको थोड़ा-बहुत बता सकता हूँ। Youtube पर videos तो अधिकतर सभी देख ही लेते है ,बस वही पर बहुत-सी ऐसी videos मिल जाएंगी और ख़बरों में भी कभी-कभी ऐसी बाते आ ही जाती है। ऐसा mainly दो कारणों से होता है ,जब भक्त को ,जिस देवी-देवता को वह मानता है उसके बारे में सब मालुम होता है और कुछ लोग (जोकि द्वेष फैलाने वाले होते है) ,कुछ मार्मिक बातों को तोड़-मरोड़कर कुछ इस तरह पेश करते है कि उनका ,जिनकी वह भक्ति करते है उनपर से विश्वास उठ जाता है। यह कैसी भक्ति हुयी ? ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ऐसे भक्तों के पास जानकारी होती है लेकिन तर्क नहीं होते। सिर्फ जो पढ़ा ,जितना पढ़ा ,बस उतना ही मानते है ,इससे आगे सोच-समझ नहीं होती। 



दूसरे तरह के लोग जो गलत जानकारी फैलाते है ,उनकी बात रहने दीजिये ,शायद आप समझ गए हो। अगर नहीं समझे तो वो भी Youtube पर ही पता लग जाएगा जो अपनी जानकारी से दूसरों को भ्रमित करते है और गलत तरीके से तर्क पेश करते है। 



ऐसी भक्ति भी  भक्ति हुयी क्या  ? जो अपने इष्ट के ही विरुद्ध हो जाए ?

दोस्तों आपने तीन तरह के भक्तो की भक्ति भावना के बारे में जान लिया (भक्ति भावना अन्य तरह की भी हो सकती है ,भक्ति भावना और भक्ति के भेद अलग-अलग बाते है). अब बात करते है असल भक्त की भक्ति की। ऐसी भक्ति जो सर्वोच्च है। 


असल भक्ति ,सच्चा भक्त कैसा होता है ?




सच्चा भक्त.........  और सच्ची भक्ति..............  वैसे तो इसके बारे में कहना बहुत कठिन है,क्योंकि भक्ति की गहराई की कोई सीमा नही होता। लेकिन सच्ची भक्ति ने यह जरूरी नही कि भक्त सदैव पूजा-पाठ करने वाला ही हो या फिर उसे अपने इष्ट के बारे में सम्पूर्ण जानकारी ही हो।



क्योंकि सच्ची भक्ति तो सच्ची लगन और निष्ठा के साथ होती है। ऐसी भक्ति में इष्ट ,सिर्फ इष्ट न रहकर सखा, माता-पिता, भाई-बंधु किसी भी रूप में भक्त को प्रिये हो जाता है।



एक सच्चा भक्त, अपने इष्ट से कभी नही कहता कि मुझे यह चाहिए, मुझे वो चाहिए, क्योंकि जिस प्रकार एक नवजन्मे बालक (जिसने अभी तक बोलना न सीखा हो) के माता-पिता को मालूम होता है कि उसे किस चीज की आवश्यकता है और किस चीज की नही,उसी प्रकार ही भक्त के लिए ईश्वर होते है। भक्त जानता है कि उसके प्रभु उसका ख्याल अपने आप रख लेंगे उसे कुछ भी कहने की जरूरत नही।



लेकिन ऐसे सच्चे भक्त को सिर्फ एक ही लालसा होती है कि उसके ईश्वर उसे एक बार उसकी आँखों को भी दर्शन करा दे। मन मे भले ही हज़ारो बार अपने भगवान के दर्शन किये हो, लेकिन एक बार सिर्फ शरीर की आंखों को भी दर्शन करा दे।






ऐसी भक्ति जितनी गहरी होती जाती है ,उतना ही अहम भाव भी खत्म होता जाता है। जैसे अन्य व्यक्ति तो कह देते है,मैं ऐसे करता हूँ, मैं वैसे करता हूँ...... मुझे यह यह आता है..... वगैरह वगैरह। लेकिन सच्चा भक्त इन बातों से दूर होता जाता है क्योंकि वह तो भगवान के करीब है और जो भगवान के करीब होते है उनके विकार भाव नही रहते ।

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ऐसे भक्त तो किसी के साथ भी वैर-विरोध नही रखते। अगर कोई इन्हें कुछ कह भी दे तो भी बात हंसकर ताल देते है या फिर अनसुनी कर जाते है। ऐसे व्यक्ति तो सभी से सिर्फ प्रेम करना जानते है क्योंकि सभी जीव परमपिता परमात्मा की ही सन्तान है, यह बात एक भक्त भली भांति जानता है और कभी भी जीव-हिंसा नही करता और न ही कुछ भी तामसिक भोज्य पदार्थ ग्रहण करता है।



भक्ति में ऐसी शक्ति है जो अंधे को भी देखने की क्षमता दे देती है। जिससे लंगड़ा व्यक्ति भी दौड़ने लग जाता है और गूंगा भी बोलने लगे जाता है। यानी कि जो कुछ भी इस संसार मे संभव नही वह भी संभव हो जाता है।



क्यों......, यह बात हजम नही हुई कि लंगड़ा भी दौड़ने लग जाये? लेकिन मैंने आंखों से ऐसा देखा हुआ है कि लंगड़ा व्यक्ति भी दौड़ता है। लंगड़ा व्यक्ति भी जब दौड़ने लगा.... इसपर भी जल्द ही आप एक पोस्ट पढेंगे ।



भक्ति से ऐसी-ऐसी शक्तियां आ जाती है जो कोई विज्ञान के नजरिये से सोच भी नही सकता। हमारे भारत का तो इतिहास भी गवाह है कि भक्ति में सबसे अधिक बल है। ईश्वर स्वयं भी भक्त की रक्षा करने आ जाते है, ऐसी बाते तो कोई भौतिकतावादी सोच भी नही सकता कि ऐसा असल मे भी होता होगा।

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दोस्तों, कुछ-कुछ ऐसे ही होते है सच्चे भक्त.... उनके बारे में लिखने का प्रयास तो मैंने किया लेकिन जो उनकी भक्ति होती है ,जो उनकी श्रद्धा और उनका विश्वास होता है.... वह तो वही जाने जो ऐसा होता है क्योंकि अगर हम जानते होते तो इस दुनियादारी में ही लीन न रहते। हो सकता है शायद आप मे से भी कोई ऐसा हो, जिसे ईश्वर का सानिध्य प्राप्त हो। या फिर कोई अपने प्रभु के निकट आना चाहता हो तो उसे भी सिर्फ ईश्वर पर भरोसा रखने की जरूरत है और फिर भगवान आपका भरोसा कभी भी टूटने नही देंगे।



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बुधवार, 5 अप्रैल 2017

ज्ञानी न करत अभिमान

कहत सुनत सब दिन गए , उरझि न सुरझ्या मन। 
कही कबीर चेत्या नहीं , अजहूँ सो पहला दिन।।


अर्थ :

कहते-सुनते सभी दिन निकल गए ,लेकिन यह मन उलझ कर अभी तक न सुलझ पाया। कबीर जी कहते है कि अभी भी यह मन होश में नहीं आता ,आज भी यह वैसा ही है जैसा पहले दिन था। 



भावार्थ :

हम बहुत कुछ कहते है और बहुत कुछ सुनते है, और फिर सोचते है कि हमने सब कुछ जान लिया। हमारी सभी उलझने खत्म हो गयी। जैसे जैसे हमारा ज्ञान बढ़ता जाता है वैसे वैसे हम में अहं भाव (ego) आते रहते है।



अगर कोई सच मे ज्ञानी है, तो फिर उस मे अहंकार नही होगा क्योंकि ज्ञान तो अहंकार/अंधकार दूर करता है न कि इसमें फंसाता है।



अजहूँ सो पहला दिन, यानी कि हम निकले तो अहम को दूर करने थे, लेकिन आज भी इस मन की अवस्था वैसी ही है जैसे शुरू में थी, क्योंकि अहंकार तो खत्म हुए नही, ज्ञान की खोज में निकले थे ,लेकिन ज्ञान की जगह तो हमारी मैं मैं ने ले ली।






इस दोहे के द्वारा कबीर जी के कहने का यही अर्थ है कि अगर सच मे ज्ञानी है तो फिर ज्ञान का मान किस बात का? दूसरों को नीचा दिखाने की जिद्द किस बात की? ज्ञान तो अंधकार दूर करने के लिए होता है न कि अंधकार पैदा करने के लिए। और जिसमे अहंकार है, वह अभी भी वही का वही ही है, यहां से शुरुआत की थी।




ज्ञानी अभिमानी नहीं , सब काहू सो हेत।
सत्यवान परमार थी , आदर भाव सहित।।



अर्थ : 

ज्ञानी व्यक्ति कभी अभिमानी नहीं होते ,उनके तो हृदय में सभी के लिए ही प्यार रहता है। ज्ञानी तो सदा सत्य का ही पालन करते है और सभी का भला ही सोचते है। 



भावार्थ :

इस दोहे का अर्थ भी पहले दोहे के समान ही है। जो भी ज्ञानी होगा ,वह अभिमानी नहीं होगा ,क्योंकि जहाँ अभिमान हो ,वहां ज्ञान नहीं होता। अभिमान तो मूर्ख लोग करते है। जो भी व्यक्ति सच में समझदार है, उसमे अहंकार नहीं होगा और वह सभी का हित ही सोचेगा क्योंकि knowledge ego या बुराई नहीं सिखाती ,ज्ञानवान तो अच्छाई ही बांटता है और सबका भला ही सोचता है।



जो ज्ञानी होगा ,वह हमेशा सच ही बोलता है। सभी का आदर करता है और परमार्थी होता है।



दोस्तों, कई लोग ऐसे होते है, या फिर यूं कहें बहुत से लोग ऐसे होते है ,जो अधिक पढ़-लिख जाते है या फिर जिन्हें भी ज्यादा knowledge होती है,उन्हें अपने ज्ञान का अहंकार हो जाता है और वह सोचते है कि हमे तो बहुत कुछ मालूम है,हमे तो सब कुछ मालूम है।






लेकिन असल मे भौतिकता की जानकारी होना ही पूर्ण रूप से intelligency नही होती। सच्चे अर्थों में ज्ञानी वही है,जिसने अपने आप को अपने वश में कर लिया और किसी से कोई वैर-भाव न रखें और सभी की मदद करता रहे। क्योंकि भौतिकता का ज्ञान सिर्फ दुनिया मे रहने के लिए जरूरी है,लेकिन जिंदगी जीने के लिए प्रेम और अध्यात्म की भी आवश्यकता होती है। जो व्यक्ति पढ़ा-लिखा हो और सभी से प्रेम भी करता हो और उसे किसी भी बात का गुमान न हो,वही व्यक्ति असल मे ज्ञानी है और ऐसा व्यक्ति न सिर्फ अपना जीवन खुशियों से जीता है बल्कि दूसरों का भी हमेशा भला सोचता है और उन सभी मे खुशिया बांटता है,जो भी उनके संपर्क में आते है।



दोस्तों सिर्फ इतना ही कहूंगा, अगर किसी को भी लगता है वह सच में ज्ञानवान है तो फिर अपने ज्ञान के द्वारा दूसरों को नीचा दिखाने का अहम् छोड़  देना चाहिए (अगर किसी को है) और हमेशा अपनी सूझ-बूझ के द्वारा दूसरों की मदद करते रहना चाहिए ,बिना यह सोचे कि बदले में वह हमारे लिए क्या करेगा ?



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