शनिवार, 8 जुलाई 2017

बीफ: सही या गलत

बीफ यानी कि गाय का मांस, इसे खाना सही है या फिर गलत?


हमारे देश मे प्रत्येक नागरिक अपने खान-पान ,रहन-सहन को लेकर स्वतंत्र है। इसलिए जो जैसा करता है,उसे उसकी स्वतंत्रता कह दिया जाता है और कहते है कि कोई भी कुछ भी करने या खाने पीने को लेकर आजाद है। लेकिन फिर भी कुछ पाबंदियां है, जिनमे से कुछ तो निराधार है और कुछ तो ऐसी भी है कि नासमझी है। कुछ इसी नासमझी की वजह से कई जगह तो पाबंदियां लग ही नही सकी, जबकि वहां पाबंदियां होनी चाहिए थी। जैसे कि कश्मीर में आतंकवादी हमारी फौज पर इतने हमले करते है,लेकिन फौज पर इतनी पाबंदियां है कि वह अपना बचाव ही नही कर पाती।

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और दूसरी तरफ जैसे कि सोशल मीडिया पर फर्जी खाते बनाने पर पाबंदी होनी चाहिए और उसपर कड़ी कार्यवाही भी होनी चाहिए क्योंकि इससे बहुत से लोगो को धोखा मिलता है और नुकसान भी होता है,लेकिन इसकी कोई पाबंदी नही है। और लोग इसी के माध्यम से अफवाहे भी फैलाते है ,लेकिन इसपर कोई पाबन्दी नहीं है।


कुछ ऐसा ही बीफ के मामले में है।


इसपर बात करने से पहले कुछ अन्य बातों पर ध्यान देते है।






सलमान खान पर अभी तक काला हिरण के शिकार का केस चल रहा है, जबकि यह हिरण किसी का पालतू नही था, न ही किसी की कोई धार्मिक भावना इससे जुड़ी थी।


अगर किसी के पालतू कुत्ते को कोई डंडा वगैरह मार दे तो उस कुत्ते का मालिक दूसरे की जान लेने को पड़ता है,जिसने भी उसके कुत्ते को मारा हो।


पालतू तो छोड़िये.... गली के कुत्ते को भी अगर कोई बाहर का आकार मारने लगे, तो उसे भी सभी गली-मोहल्ले वाले एकदम से पड़ेंगे कि इसने तुम्हारा क्या बिगाड़ा?


यह तो सब अपने ही देश मे होता है- ऐसी भी घटनाये है जो है दूसरे देशों की है ,लेकिन भारतीयों को भी उनके प्रति काफी सहानुभूति है-


चीन में डॉग फेस्टिवल (Dog Festival) मनाया जाता है,जिसमे कितने ही कुत्तो को काटा... ओह! सॉरी...कितने ही बेकसूर कुत्तों को काटा जाता है और फिर उन्हें खाया जाता है। इसको लेकर सभी देशों में आपत्ति है कि कुत्तो को बहुत ही बेरहमी से मारते है। खैर छोड़िये...मुझे वहां का इतना मालूम नही... अब असल मुद्दे की बात पर आते है।

बीफ

वैसे तो यह शब्द मुझे लिखना भी गवारा नही...लेकिन अपनी और अन्यों की बात रखने के लिए लिखना पढ़ रहा है।


हांजी...क्या बीफ जायज है? और क्या सड़कों पर गऊ हत्या भी जायज है? एक और बात पर मैं आता हूँ आजकल fighting/action games का बहुत चलन है, जिसपर उच्च ज्ञानी वैज्ञानिको(वैसे हम तो यह बात बचपन से ही जानते है क्योंकि भारतीय सभ्यता के पौराणिक शास्त्रों में सब कुछ बताया गया है) का कहना है कि इससे युवाओ की सोच आकरात्मक होती है। तो क्या ऐसे सड़क पर किसी निर्दोष को मारना सही है?क्या इससे नही किसी की सोच पर बुरा प्रभाव पड़ेगा?

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तो इससे बीफ का क्या लेना देना? अब बात पर आते है.... अगर हिरण का शिकार करने से किसी पर इतना लंबा मुकदमा चल सकता है, अगर कोई पालतू कुत्ते को मारने से दूसरे को हानि पहुंचा सकता है, अगर दूसरे देश के कुत्तो के प्रति हमारे देश के लोगो मे सहानुभूति हो सकती है। तो हमारी अपनी गाय माता के प्रति इतना अत्याचार क्यों? गाय को मां का दर्जा दिया गया है क्योंकि गाय हमारा ख्याल बच्चो की तरह रखती है। गाय के साथ धार्मिक और सामाजिक भावनाएं जुड़ी है, तो फिर गाय का वध क्यों?



ऊपर लिखा था कि कुछ पाबंदियां बेबुनियाद है और कुछ तो है ही नही। मुझे तो आजतक नही समझ आता, हमारा देश जानवरो के हितों में है या फिर अहित में? मुर्गे का मांस साधारणतः हर शहर में बिकता है। तो फिर मुर्गे के बीच मे होने वाली लड़ाई पर प्रतिबंध क्यों? अगर मुर्गे में जान है, उसके हितों की चिंता है तो फिर मुर्गे का मांस भी नही होना चाहिए।



लेकिन गाय का मांस तो बिल्कुल ही नही होना चाहिए क्योंकि इससे भारत के बहुत बड़े वर्ग के लोगो की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई है।


जीवन हर एक जीव मे है






किसी का बच्चा बीमार पड़ जाए तो उसे कैसे चिंता हो उठती है, हाय! मेरा बच्चा।

किसी को मामूली-सी चोट भी लग जाये तो कैसे कराह उठते है और मौत से हमेशा दूर भागना चाहते है।

तो फिर यह भी समझिये कि हर एक जानवर में भी प्राण है,उन्हें भी अपनी जिंदगी प्यारी है। घिनोने अपराध मत करिए और ईश्वर को याद रखिये। जिस प्रकार इंसानो को ईश्वर ने रचा है, वैसे ही यह जानवर भी उनकी ही रचना है। जानवर खाने की चीज नहीं बल्कि कुदरत/वातावरण को संतुलित बनाएं रखने के लिए जरूरी है। कुदरत के नियमो के खिलाफ न जाये और सिर्फ वनस्पति आहार ही ले ,हमेशा शाकाहार ही खाये क्योंकि शाकाहार ही उत्तम आहार है।

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और अगर गऊ माता की बात करते हो कि गऊ माता कैसे हुयी ,तो यह लेख जरूर पढ़िए गाय हमारी माता कैसे है


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रविवार, 18 जून 2017

Father's Day Quotes In Hindi

पिता के प्रेम को प्रकट करने के लिए क्या शब्द लिखू ? ऐसे शब्द दुनिया की किसी भी भाषा में नहीं जो पिता के प्रेम को व्यक्त कर सके। पिता का प्रेम तो अपने बच्चो के लिए असीम होता है जोकि कभी नहीं सेहन कर सकता कि उसके बच्चो पर किसी भी प्रकार की कोई विपदा आये।

भले ही पिता के प्रेम को शब्दों द्वारा प्रकट नहीं किया जा सकता लेकिन फिर भी शब्द ही ऐसा माध्यम है ,जिसके द्वारा हम किसी से बात करने ,अपने भाव प्रकट करने ,प्यार जताने का प्रयास करते है। शब्दों का आभाव होते हुए भी ,बुद्धि के अनुसार ,कुछ प्रयत्न है जिसके द्वारा पिता के प्रेम को शब्दों में प्रकट करने की कोशिश की गयी है।

तो दोस्तों पढ़िए आप यह फादर्स डे पर अनमोल विचार। अगर आपको यह विचार पसंद आये तो आप इसे शेयर करना न भूलिएगा।









जिंदगी में राहें जब भी मुश्किल दिखी
तब मेरे पापा ने मेरा हाथ पकड़कर
हमेशा मुझे सही रास्ता दिखाया।




सुपरमैन तो सिर्फ कहानियों में होते है
लेकिन मेरे पापा तो सचमुच के सुपर डैड है।




पापा कभी प्यार जताते नही
लेकिन अपने बच्चो से सबसे ज्यादा
प्यार वही करते है।




जब मां घर पर अपने बच्चो के लिए
खाना बना रही होती है
तब वह पिता ही होता है,
जो कड़ी मेहनत करता रहता है
और कभी थकता नही,
ताकि उसके परिवार को
खाने के लिए कभी दिक्कत न आये।









मेरे पापा मुझे समय-समय पर सही राह दिखाते रहे
मैं आज जो भी हूँ सिर्फ और सिर्फ उनकी वजह से ही। 




जब कभी भी मुझे डर लगता 
तब साथ देने के लिए मेरे पापा हमेशा मेरे साथ थे।




पिता चाहे कम पढ़ा लिखा ही क्यों न हो
लेकिन अपने बच्चो के लिए ज्ञान का सागर होता है। 




दुनिया मे सिर्फ पिता ही है
जो चाहता है कि उसका बेटा
उससे भी बेहतर बने।



















दोस्तों अगर पिता दिवस पर पिता के प्यार को व्यक्त करने के लिए ,यह अनमोल विचार आपको पसंद आये तो इसे शेयर जरूर के और कमेंट करके हमे भी बताये कि आपको यह कैसे लगे। 


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रविवार, 4 जून 2017

गाय हमारी माता कैसे है ? #MOTIVATION

गाय हमारी माता है यही पढ़ाया जाता है ना हमें बचपन से। अगर आप बड़े हो गए है, और आपके बच्चे भी है, या भतीजा, भतीजी आदि है तो यह लेख तो उन्हें होगा ही और गऊ के सम्मान के बारे में ही हमेशा पढ़ाया/समझाया जाता है।



पर कुछ लोग कहेंगे कि किताबो की बातें ,किताबो में ही अच्छी लगती है और पूछेंगे की गाय हमारी माता कैसे हुई? तो आज इसी का जवाब दूंगा।



गाय हमे दूध देती है..... ओह! एक मिनट रुकिए.... आजकल तो अधिकतर लोग बैंस का दूध पी रहे है। तो गाय हमारी माता हुई तो हुई कैसे....यही न?


चलो आगे बढ़ते है-






गाय के दूध से सैंकड़ो बीमारियां दूर हो भागती है.... फिर से वही बात... बीमारियां तो chemicals वाली दवाईयों से भी दूर भागती ही है, फिर दूध में क्या खास? वो अलग बात है कि केमिकल्स बाद में शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं,लेकिन एक बार तो बन्दा ठीक हो जाता है न? फिर गाय के दूध में क्या खास?

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चलो यार ,कई लोग अभी भी नही मानेंगे न? तो आगे बढ़ते है। गौमूत्र अभी तक की ऐसी औषदी है,जिसके लिए वैज्ञानिको का दावा है कि इससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी भी सही हो जाती है।



ओह! कुछ लोग कहेंगे कि अब गौमूत्र पीए? ...... । जी हां , क्यूंकि यह बहुत ही लाभदायक है । गौमूत्र अमृत समान है। कुछ लोग अगर Bee... तक खा सकते है और उसे ताकतवर कहते है तो फिर गौमूत्र में क्या बुराई? ओह !अच्छा, अब समझा, सोना देने वाली मुर्गी के पेट मे से इकट्ठे ही सभी अंडे निकलने की सोचते होंगे शायद ऐसे लोग। अब सही है न.... लेकिन शायद इन जैसे लोगो ने बचपन मे गाय हमारी माता है, लेख नही पढ़ा होगा और न ही ही सोने का अंडा देने वाली मुर्गी की कहानी भी नही पढ़ी/सुनी होगी।

खैर कोई बात नही.... अभी भी नही मानेंगे, गाय हमारी माता कैसे? तो आज मैं समझता हूँ गाय हमारी माता कैसे?


  • जीवन देने वाली माँ के बाद जिसका दूध सबसे उपयोगी वह गाय हमारी माता है।

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      • जिन चर्म रोगों का इलाज दवायों से भी मुश्किल से ही हो पाता है, उन्ही रोगों का इलाज गऊ माता की जीभ लगने से बहुत ही जल्द हो जाता है।



      • कैंसर जैसी भयंकर बीमारी में जहां महँगी-महँगी दवाएं भी कुछ न कर सकती, उसी रोग का इलाज गौमूत्र द्वारा संभव है।






      • गाय के दूध से बने घी से आंखों की बीमारी, जलन, सड़न आदि सैंकड़ो अन्य रोगों का उवचार आसानी से संभव है,क्योंकि वह हमारी माता है और हमारा अच्छे से ख्याल रखती है।

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      समझे या नही कि गाय हमारी माता क्यों और कैसे है? जैसे माँ का प्यार बच्चे के दर्द को समझता है और उसे सही करने के लिए हर प्रयत्न करता है, ठीक उसी प्रकार गाय हमारी माता की ही तरह,हमारे हर रोगों का नाश करने की शक्ति रखती है,इसलिए गाय हमारी माता है। और माता को खाया नहीं ,हमेशा पूजा जाता है। और अगर कोई अपनी ही माँ की हत्या करे तो  उसके लिए क्या सजा होती है......... यह तो आप सभी को भी मालुम ही होगा।


      अगर आप भी गऊ माता से प्रेम करते है तो इस पोस्ट को जरूर शेयर करे।


      जय गऊ माता जी की।

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      शनिवार, 13 मई 2017

      Mother's Day Quotes In Hindi

      माँ का प्यार तो असीम होता है और कोई भी कितना ही क्यों न पढ़ा-लिखा हो जाए या फिर कितना भी बढ़ा पंडित-विद्वान क्यों न बन जाए ,लेकिन माँ के प्यार का गुणगान गाने के लिए शब्द किसी के पास नहीं है। क्यूंकि ऐसा कोई शब्द ही नहीं ,जिससे माँ की ममता के बारे में कुछ भी कहा जाए। लेकिन फिर भी जितना हो सके ,माँ के प्यार को शब्दों के रूप में व्याख्यान करने की कोशिश की ही जाती है ताकि माँ की ममता के गुणों को गाया जा सके। 


      दोस्तों कुछ ऐसा ही GyanPunji पर Mother's Day के उपलक्ष्य में किया जा रहा है कि माँ के प्यार को शब्दों के रूप में भी प्रकट किया जा सके । आज आपके साथ कुछ quotes/images शेयर करने जा रहा हूँ ,जो आप अपनी मम्मी से मदर्स डे के दिन प्यार का इजहार करने के लिए उन्हें भेज सकते है। 

      तो दोस्तों आप यह images download कीजिये और send कीजिये अपनी प्यारी-प्यारी Super-Mom को। 

      Mother's Day Quotes In Hindi की video देखे 






      Mothers Day Greetings In Hindi







      माँ अपने बच्चों की मुसीबतो से रक्षा चट्टान बनकर करती है।





      दुनिया मे सिर्फ माँ ही एक ऐसी है,जो अपने बच्चो की खुशी के लिए 24घण्टे भी काम करती रहे, लेकिन फिर भी नही थकती।








      सिर्फ मां-बाप ही अपनी संतान को उसके भले के लिए मारते है और इसी मार की वजह से सन्तान को जिंदगी में कही और से ठोकरे नही खानी पड़ती।




      अपने बच्चो की खुशी के लिए मां कुछ भी कर सकती है।




      जिंदगी में चाहे हर एक चीज का मोल लगा देना, लेकिन माँ-बाप के प्यार को कभी




      मां से बेहतर डॉक्टर कोई और हो ही नही सकता।




      कभी भी ऐसा वक्त न आने देना ऐ दोस्त
      कि मां रोये और तू हंसे
      अगर कभी ऐसा हो गया
      तो समझ लेना तूने अपनी तकदीर गंवा दी।








      आज लाखो रुपये खर्च के भी
      वो खुशी नही मिलती
      जो स्कूल जाते वक्त मां से मिला
      एक रुपया खर्चने से मिलती थी।




      मां-बाप से बढ़कर कोई भी प्यार नही कर सकता।




      जब दुनिया भर की दवाएं भी काम नही कर पाती
      तो माँ की मांगी एक दुआ ही सब दवायो से श्रेष्ठ होती है।




      दुआ से बढ़कर कोई दवा नही,
      मां के प्यार से बढ़कर कोई प्यार नही।




      सुपरमैन सुपरवुमन के बारे में मैं नही जानता,
      लेकिन मेरी माँ Super Mom जरूर है।




      जिंदगी में कभी भी इतने ऊंचे मत उठना
      कि माँ-बाप के सामने भी बड़े बनकर रहने लगो।




      मां की ममता से बड़ा दुनिया मे कुछ भी नही।








      मां के प्यार के लिए क्या शेर लिखूं ,मां ने ही तो मुझे शेरों के शेर बनाया है।

      दोस्तों अगर आपको मातृ दिवस पर यह विचार पसंद आये तो कमेंट करके हमारा होंसला जरूर बढ़ाये ताकि आगे भी हम आपके लिए ऐसे ही बढ़िया-बढ़िया कोट्स लिखते रहे और अगर सच में पसंद आये तो अपने दोस्तों के साथ भी जरूर शेयर करे ताकि वह भी अपनी super-mom को यह quotes भेज सके।


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      सोमवार, 1 मई 2017

      समझदार व्यक्ति भी मूर्ख हो सकता है (Samjhdaar Ya Fir Murkh)

      दोस्तों हमेशा याद रखे ,जरूरी नही कि नासमझ व्यक्ति ही मूर्ख हो, कई बार समझदार व्यक्ति भी मूर्खो से भी बदतर काम कर जाते है।



      पहले यह कहानी पढ़िए-






      पुराने समय की बात है एक मजदूर अपने गधे के साथ काम करके अपने गांव वापिस लौट रहा था। रास्ते में उसको एक चमकीला पत्थर दिखाई दिया ,उसे वह पत्थर पसन्द आ गया और उसने अपने गधे के साथ उस पत्थर को बांध दिया और वापिस अपने गांव को चलने लगा।



      रास्ते मे उसे एक जोहरी दिखा, उसने गधे पर उस पत्थर को देखा तो वह समझ गया कि मजदूर नासमझ है, उसे इस पत्थर की कीमत का नही पता और वह जोहरी उस मजदूर के पास गया और उस पत्थर को उससे मांगा। मजदूर बोला कि वह उसे यह पत्थर 1000 रुपये में देगा।

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      जोहरी ने कहा, "नही, मैं अधिकतम इसके 500 रुपये ही तुम्हे दूंगा और अगर तुम 500 रुपये में यह पत्थर मुझे देना चाहते हो तो दे दो, नहीं तो तुम्हारी मर्जी ।" लेकिन मजदूर ने पांच सो रूपये में वह पत्थर देने से इनकार कर दिया।



      जोहरी भी यह सोचकर आगे चल पड़ा कि वह तो अनपढ़ मजदूर है,उसे इस पत्थर की कीमत क्या मालूम होगी? और वह अपने आप उसके पास आएगा और 500  रुपये में ही वह पत्थर दे देगा।



      आगे चलते-चलते मजदूर को एक और जोहरी मिला। वह भी उसके पास पत्थर देखकर हैरान हुआ। दूसरा जोहरी भी मजदूर के पास आया और बोला कि ," क्या तुम मुझे अपना यह पत्थर बेचना चाहोगे?"

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      मजदूर बोला, "ठीक है, लेकिन इसके बदले में मैं तुमसे 2000 रुपये लूंगा। दूसरे जोहरी ने तुरंत दो हज़ार रुपये अपनी जेब से निकाले और उससे वह पत्थर ले लिया।



      पहले वाला जोहरी भी सोच रहा था कि कही इतना कीमती पत्थर हाथ से न चला जाये ,वह उसी रास्ते को ही चल पड़ा जिधर मजदूर गया था और उससे वह पत्थर मांगा।



      मजदूर बोला, "वह पत्थर तो अब मैंने 2000 रुपये में बेच दिया।"

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      जोहरी बोला,"तुम भी बिल्कुल पागल, नामसझ हो, उस पत्थर की कीमत लाखों रुपये की थी, जो तुमने सिर्फ 2000 रुपये में बेच दिया।" और भी उसे बहुत बुरा बोलै।



      मजदूर हंसते हुए बोला, "हुजूर मैं तो हूं ही अनपढ़। अगर आपको इसकी असल कीमत मालूम थी ,फिर भी आपने वह पत्थर मुझसे क्यों नही लिया, जबकि आपको तो मैं सिर्फ 1000 रुपये में दे रहा था? आपने सिर्फ 500 रुपये के लालच में लाखों का नुकसान कर लिया। मैं तो अनपढ़ हूँ ,लेकिन आप तो पढ़े-लिखे होकर भी मूर्ख निकले, जो अपने इतना नुकसान कर लिया।"



      दोस्तों, अब खुद ही बताइए बेवकूफ कौन? मजदूर को तो उस पत्थर की कीमत ही नही मालूम थी, इसलिए उसने सस्ते में बेच दिया। लेकिन पहला जोहरी, जिसे उस पत्थर की असल कीमत भी मालूम थी और उसे वह बहुत ही सस्ते में मिल भी रहा था ,लेकिन फिर भी उसने न खरीदा सिर्फ 500 रुपये के लालच में।






      दोस्तों अगर जिंदगी में कभी ऐसा मौका आये कि कोई बहुत ही कीमती चीज आसानी से या बहुत कम कीमत पर मिल रही है और उस वस्तु का हम उपयोग भी कर सकते है तो कभी भी यह लालच नही करना चाहिए कि शायद थोड़ी और ही सस्ती मिल जाये, उसका सौदा उसी समय कर लेना चाहिए। वर्ना हमे भी मूर्ख बनने में समय नही लगेगा।

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      Friends, आपको यह कहानी समझदार व्यक्ति भी मूर्ख हो सकता है कैसी लगी , हमे कमेंट करके जरूर बताये। अगर पसन्द आयी तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करना न भूले और हमे subscribe जरूर करे।

      शनिवार, 22 अप्रैल 2017

      मुसीबतें कमजोर बनाती है या फिर मजबूत?

      दोस्तों जिंदगी में एक बात हमेशा याद रखना -

      मुसीबतें तो सभी लोगो पर आती है ,
      लेकिन यही मुसीबतें कईयों को
      बिखेर देती है और
      कईयों को निखार भी देती है ।



      दोस्तों यह हम पर निर्भर है कि हम मुसीबतों का सामना किस प्रकार और कैसे करते है ? मुसीबतें तो सभी लोगों पर आती है ,ऐसा कोई नहीं होगा जिसकी जिंदगी में कोई मुसीबत न आयी हो ,लेकिन यही मुसीबतें अगर लोगो को बिखेरती है तो यही कई लोगो को निखार भी देती है । फर्क सिर्फ हमारी सोच और हमारे कर्मों का है , हम उन मुसीबतो में कैसा और क्या सोचते है और कैसा और क्या करते है ? जो हिम्मत और होंसला हार जाते है मुसीबतें उन्हें हरा देती है लेकिन जो लोग इन्ही मुसीबतों में भी इनका डटकर सामना करते है ,वही लोग कुछ अलग बनकर हम सबके सामने आते है और एक आम इंसान से ख़ास इंसान बन जाते है ।



      उन लोगो में और हम में कोई फर्क नहीं होता ,फर्क सिर्फ होंसले और हिम्मत का है । कुछ तो ऐसे लोग भी होते है जिनके पास कुछ भी नहीं होता लेकिन फिर भी हिम्मत न हारकर सभी के लिए मिसाल कायम कर देते है । आपने Nick Vujicic का नाम तो सुना ही होगा ,वह भी हम सभी के लिए एक मिसाल है ,जिनके न हाथ है और न ही टाँगे ,लेकिन फिर भी एक सफल इंसान बन गए । क्या इन्होने अपनी जिंदगी में हार मान ली ? अगर यह भी हिम्मत हार जाते तो क्या आज यह इस मुकाम पर होते जिस पर आज है? इनके साहस और अटूट मेहनत कि वजह से ही आज यह पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना पाए और क्यूंकि इन्होने जिंदगी में आयी विपत्तियों को चुनौती पूर्ण स्वीकार किया और उन सभी मुसीबतों को पार करते हुए वह किया जो यह करना चाहते थे और अपनी कड़ी मेहनत के कारण एक सफल इंसान बन गए ।



      इसलिए दोस्तों अगर जिंदगी में कभी भी कोई भी मुसीबतें आये तो हिम्मत और होंसला न हारिये ,और कभी यह न कहिये कि मेरे पास यह नही, वो नही, आपके पास सांसे तो है न? जब तक सांसे है,तब तक सब कुछ है। जब आप मुसीबतों का सामना होंसले के साथ करना सीख जाएंगे तब आप जिंदगी में कभी भी बिखरेंगे नहीं ,बल्कि हमेशा निखरते ही जाएंगे 

      गुरुवार, 20 अप्रैल 2017

      माँ का प्यार और बच्चों की झूठी आजादी

      दोस्तों यह कहानी आजकल की सच्चाई है। मां का प्रेम तो असीम होता है, लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नही पाते। वह तो बस थोड़ा पैसा क्या कमा लिया अब उन्हें आजादी चाहिए और वह अपने माँ-बाप को संभालने में ही असमर्थ हो जाते है।



      चलिए पहले एक मां के दिल की व्यथा के बारे में जानते है।



      प्रीतम अपने माँ-बाप का इकलौता बेटा था। माता-पिता ने उसे पढ़ा-लिखाकर एक बढ़िया इंसान बना दिया और वह अच्छी जॉब पर भी लग गया। जॉब के कारण प्रीतम (जॉब शहर से बाहर लगी) घर वालो से दूर रहता था और वैसे भी पढ़ा-लिखा होने के कारण उसे अब आजादी चाहिए थी और वह घर वालों से दूर ही रहना पसंद करता था।






      समय गुजरा ,विवाह लायक उसकी उम्र हुई तो उसका विवाह भी हो गया। जहां पर प्रीतम रहता था ,वहां कई बार उसके माता-पिता ने भी आने की इच्छा जाहिर की, लेकिन उनका बेटा तो हमेशा कुछ-न-कुछ कहकर टाल ही देता और कहता कि काम के कारण वह उनके पास तो रुक पायेगा नही और प्रीति (प्रीतम की पत्नी) के पास भी समय कम ही होता है, आप यहां आकर क्या करेंगे? क्योंकि इस आजकल के लड़के को तो आजादी चाहिए थी और घर वाले अगर कुछ कह दे तो वह इसे पसन्द न था, इसलिए अपने पास बुलाने से इनकार कर दिया।

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      कुछ समय और गुजरा, प्रीतम के पिता जी का देहांत हो गया और अब उसकी मां अकेली कैसे और कहा रहती? प्रीतम अपनी मां से बोला, "मम्मी, आप तो जानती ही है कि हमे दिन भर कितने काम होते है। आप वहां आएंगी तो बेवजह आपको तकलीफ होगी,इसलिए हमने सलाह की है कि आपको हम वृद्ध आश्रम छोड़ दे,वहां वह अच्छे से आपका ख्याल रखेंगे। अगर आपको कोई भी तकलीफ हो तो आप हमें कह दीजियेगा।"



      ज्यादा प्रीतम क्या बोलता? मां तो मां होती है और वह समझ गयी कि उसे अपने पास नही रखना चाहते और अंदर ही अंदर अपने दुख को दबा लिया और उनकी खुशी के लिए वृद्ध आश्रम में रहने को भी हां कर दी।



      वृद्ध आश्रम में कभी कभी दोनों बच्चे(बेटा और बहू) अपनी मां से मिलने आ भी जाते लेकिन मां उनसे कभी कोई शिकायत न करती। समय बीता.... उनकी भी (माता की) उम्र हो चली और वह भी अंतिम सांसे ले रही थी, तो Formality के लिए उनका बेटा और बहू भी मिलने आ गए। मां ने अपने बेटे से एक ही बात कही, "बेटा.... मैंने आज तक तुमसे कुछ न मांगा, लेकिन जिंदगी के अंतिम पलों में तुमसे कुछ मांगना चाहती हूं।"



      बेटा हैरान कि पता नही मां इस समय भी क्या कह देगी? लेकिन फिर भी बोला-" जी, बोलिये.... मैं जरूर आपकी इच्छा को पूरा करने का प्रयास करूंगा।"

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      मां बोली," बेटा ... वृद्ध आश्रम में कुछ cooler वगैरह लगवा देना और साफ तथा ठंडे पानी के लिए water cooler भी लगवा देना। बस यही अंतिम इच्छा है। क्योंकि यहां पर गर्मियों में गर्मी बहुत होती है और कोई cooler या AC भी नही है। पीने के पानी की भी काफी दिक्कत होती है।



      बेटा फिर थोड़ा हैरान हुया और फिर बोला,"लेकिन मां.... अब क्यों? आजतक तो आपने मुझसे कोई शिकायत नही की आश्रम के बारे में। और अब, इस अंतिम समय मे यह सब?"




      मां बोली(आंखों से कुछ आंसू भी निकलने को हो रहे थे) ,"बेटा मेरी तो कोई बात नही, सब कुछ सह लिया और कुछ अधिक परेशानी भी न हुई। लेकिन मैं अपने बेटे को जानती हूँ, अगर कल को उसे यहां आना पड़ा तो वह यहां आराम से न रह पाएगा और उसे बहुत कठिनाई होगी यहां रहने में ,इसलिए अंतिम समय मे यह सब मांग रही हूँ।"



      आगे क्या हुआ, क्या नही हुआ.....यह सब छोड़िये..... कहानी इतनी ही है। माँ तो सब कुछ समझती है, बेटे के नकारने के बावजूद भी अंतिम समय मे भी उसके बारे में ही सोचती रही। लेकिन वही बेटा अपनी मां के बारे में एक पल भी न सोच सका और सब कुछ भूलकर उसे ही अपने से दूर कर दिया,जिसने उसका हमेशा से ख्याल रखा।

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      दोस्तों , यह आजकल की सच्चाई बनती जा रही है कि बच्चे अमीर होने के बावजूद भी अपने माँ-बाप को नही संभाल पाते जबकि मां-बाप गरीब होने के बावजूद भी अपने बच्चों का भली-भांति पालन-पोषण करते है और उन्हें पढ़ा-लिखाकर इस काबिल बनाते है कि वह कोई बड़ा अफसर वगैरह बन जाये। शायद ऐसे बच्चे अफसर बन भी जाते है, लेकिन सिर्फ अपने ही माँ-बाप के लिए। इनपर ही रौब करना,इनको ही बोलना और सिर्फ और सिर्फ अपनी मन-मर्जी करना। इतने बड़े अफसर हो जाते है कि माता-पिता को ही छोटा बना देते है।



      wow..... बढ़िया....  अधिक पढ़ा-लिखा यही होता होगा? शायद आजकल के युग मे अमीरी का यही मतलब होता होगा कि कुत्तों को पाल लो,वह घर के सदस्य बन सकते है,उन्हें घूमा-फिरा सकते है,उनके लिए समय है , इसमे ही शानो-शौकत है। लेकिन अपने ही मां-बाप को नही संभाल सकते। उनके लिए जरा-सा समय भी नही है। उनके साथ कही घूमने नही जा सकते।






      Great....... शायद आजकल का समय तरक्कियों मे है। इतनी तरक्किया हो रही है कि आजकल के लोग दूसरों के साथ इतने मिलनसार हो गए है कि बाकी के सभी लोग हमारे अपने है, जानवर परिवार का अटूट हिस्सा है। लेकिन जो अपना ही परिवार है,जिन्होंने हमे शिक्षा दी,पढ़ाया-लिखाया, हमारे लिए सब कुछ किया, सिर्फ वही नही हमारे.... उनके संस्कार अब पुराने है, वह old-age, old-people है जोकि young को कहा compete कर सकेंगे और इसलिए उनको साथ रखने में शर्म महसूस होगी ,लेकिन जानवर को पालने से इज्जत बढ़ेगी और लोग animal-lover कहेंगे।



      बढ़िया सोच है भई.......??? बढ़िया है ..... या घटिया.... यह तो आप सब समझ ही गए होंगे? मेरा इस आर्टिकल को लिखने का मकसद सिर्फ इतना ही है कि कोई भी इतना न पढ़-लिख जाए कि घर वालों पर ही अफसरशाही झाड़ने लगे। पढ़ो-लिखो.... खूब कमायों.... लेकिन उस पढ़ाई-लिखाई का कोई फायदा नही जो अपनो से ही दूर कर दे और उस कमाई का भी कोई फायदा नही, जिसे कमाकर अपनो के लिए ही समय न बचे।

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      दोस्तों, इस बार नही कहूंगा कि यह post अगर अच्छी लगी तो जरूर share करे। अच्छी लगी या बुरी लगी, share करना या share नही करना,यह सब आपकी मर्जी.....  लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि GyanPunji पर आने वाले समय मे भी ऐसी ही आलोचना से भरपूर पोस्ट आप जरूर पढ़ते रहेंगे। अगर यह सब पसन्द नही आया तो शायद Gyan Punji पर आपके लिए Gyan ही न हो। क्योंकि Gyan Punji पर आपको सिर्फ वही मिलेगा (mostly) जोकि असल ज्ञान होगा। इसलिए अगर अगर आगे भी ऐसे ही पढ़ते रहना चाहते है तो Like ,Follow और Subscribe करना न भूले।